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शासकीय कार्यालय में वीडियो बनाना हमेशा अपराध नहीं होता; आधिकारिक गोप अधिनियम, १९२३ को समझें

शासकीय कार्यालय में वीडियो बनाना हमेशा अपराध नहीं होता; आधिकारिक गोप अधिनियम, १९२३ को समझें नागरिकों में अक्सर भ्रम रहता है कि सरकारी कार्यालय में वीडियो रिकॉर्डिंग करने से सीधे आधिकारिक गोप अधिनियम के तहत अपराध हो जाता है या नहीं? इस बारे में कानून की स्पष्ट जानकारी होना जरूरी है। आधिकारिक गोप अधिनियम, १९२३ (Official Secrets Act, 1923) राष्ट्रीय सुरक्षा और गोपनीय जानकारी की रक्षा के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। इस कानून के अनुसार प्रतिबंधित स्थानों की जानकारी प्राप्त करना, फोटोग्राफी या वीडियो रिकॉर्डिंग करना, गोपनीय जानकारी इकट्ठा करना या उसे अनधिकृत व्यक्ति तक पहुंचाना — ये कार्य कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में अपराध हो सकते हैं। हालांकि, यह महत्वपूर्ण बात ध्यान रखें – हर शासकीय कार्यालय में वीडियो बनाने मात्र से अपने आप आधिकारिक गोप अधिनियम का अपराध नहीं होता। संबंधित जगह का स्वरूप (क्या वह प्रतिबंधित क्षेत्र है), रिकॉर्डिंग का उद्देश्य, रिकॉर्ड की गई जानकारी गोपनीय है या नहीं, और कानून की कौन-सी धाराएं लागू होती हैं — इन सभी बातों पर विचार करना पड़ता है। नागरिकों को क्या ध्य...

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: चारागाह-खलिहान जैसी सार्वजनिक भूमि पर भूमिधरी अधिकार नहीं दे सकते SDO/SDM

 सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: चारागाह-खलिहान जैसी सार्वजनिक भूमि पर भूमिधरी अधिकार नहीं दे सकते SDO/SDM नई दिल्ली / लखनऊ। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 21 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट कर दिया है कि उपजिलाधिकारी (SDO) या उप-जिला मजिस्ट्रेट को चारागाह, खलिहान या अन्य सार्वजनिक उपयोग की भूमि की श्रेणी बदलकर निजी व्यक्तियों को भूमिधरी अधिकार देने का कोई अधिकार नहीं है। मामला बाबू सिंह बनाम चकबंदी अधिकारी एवं अन्य (2026 INSC 395) का है। सिविल अपील संख्या 4633/2026 में न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ ने अपील खारिज करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। क्या था मामला? उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की एक भूमि राजस्व अभिलेखों में श्रेणी-6 (सार्वजनिक उपयोग की भूमि) में दर्ज थी। वर्ष 1379 फसली के अभिलेखों में यह खलिहान और चारागाह के रूप में दर्ज थी। 31 अक्टूबर 1992 को SDO ने भूमि को श्रेणी-5 (कृषि योग्य भूमि) में बदल दिया और संबंधित व्यक्तियों को पट्टे जारी कर दिए। बाद में चकबंदी कार्यवाही के दौरान पता चला कि भूमि मूल रूप से सार्वज...

भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका पाणी पुरवठा विभाग दि.१४/१०/२०२६

भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका  पाणी पुरवठा विभाग भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका भिवंडी पाणी पुरवठा विभाग  दि.१४/१०/२०२६ दिनांक ०५/१०/२०२६ रोजी सकाळी ११:४५ वाजेचा सुमारस मौजे-नारपोली, ७२ गाला रोड, भंडारी कंपाऊंड, भिवंडी येथे श्री. शशीशेखर जयस्वाल यांचेकडे चौकशी केली असता त्यांचेकडे कोणताही अधिकृत परवाना मिळून आला नाही. तसेच त्यांनी मागील ०५ वर्षापूर्वी अर्धा इंच व्यासाचे ०१ नळ कनेक्शन घेतल्याचे सांगितले. त्यांनी मनपाची कोणतीही पूर्व परवागनी न घेता महानगरपालिकेच्या मुख्य जलवाहिनीला छिद्र पाडून अर्धा इंच व्यासाची ०१ नळ अनाधिकृत जोडणी घेऊन त्याचा वापर भोजनालय (भिशी) करिता (व्यापारी) करीत असल्यामुळे महानगरपालिकेच्या पाण्याची चोरी अर्धा इंच प्रती व्यापारी कनेक्शन रु.१२,०००/- प्रमाणे ५ वर्षाचे (रु.१२,०००/-x ५ वर्षाचे) = रु.६०,०००/-,  खड्डा पावती रु.१,४००/-,  अनामत रक्कम रु.२००/-  पाण्याची चोरी रु.६०,०००/- असे एकूण *रु.१,२१,६००/- (अक्षरी रु एक लाख एकवीस हजार सहाशे रु. मात्र*) नुकसान झाल्याने श्री. शशीशेखर जयस्वाल यांचे विरोधात नारपोली पोलिस स्टेशन येथे भारतीय न्याय...

लोकायुक्तांकडे तक्रार दफ्तरी दाखल; नागरिकांना कागदपत्रांची संधी नाकारल्याचा प्रश्न

 लोकायुक्तांकडे तक्रार दफ्तरी दाखल; नागरिकांना कागदपत्रांची संधी नाकारल्याचा प्रश्न चिपळूण – महाराष्ट्रातील चिपळूण तहसीलदार कार्यालयातील वातानुकूलन यंत्राबाबत सार्वजनिक निधीच्या वापरासंबंधी एका नागरिकाने लोकायुक्तांकडे तक्रार केली होती. मात्र, दिनांक ०७ ऑक्टोबर २०२६ रोजीच्या पत्राद्वारे संबंधित शासन आदेश, शासन निर्णय किंवा परिपत्रकाची प्रत तक्रारीसोबत जोडलेली नसल्याचे कारण देत ही तक्रार चौकशीस पात्र नसल्याचे सांगून दफ्तरी दाखल करण्यात आली आहे. तक्रारदाराने या निर्णयावर प्रश्नचिन्ह उपस्थित केले आहे. त्यांच्या म्हणण्यानुसार, एखाद्या नागरिकाकडून तक्रार करताना काही दस्तऐवजाची प्रत जोडण्यात त्रुटी राहिली असेल, तर ती प्रत मागवून किंवा त्रुटी दूर करण्याची संधी देऊन प्रकरणाची चौकशी करता आली नसती का? आवश्यक कागदपत्रे सादर करण्याची संधी न देता तक्रारच दफ्तरी दाखल करणे, हा सामान्य नागरिकाला न्याय मिळवून देण्याचा योग्य मार्ग आहे का, असा प्रश्न त्यांनी उपस्थित केला आहे. तक्रारदाराचे म्हणणे आहे की, आज राज्यात दुष्काळसदृश परिस्थिती, शेतकऱ्यांच्या अडचणी, शाळा व रुग्णालयांतील सुविधांची गरज आणि पोषण...

जिल्हा परिषद, ठाणे *नूतन हिंदी विद्यालयात विद्यार्थ्यांनी दिला ‘नो ड्रग्स’चा नारा* *सेवा संकल्प अभियान तसेच ‘नशामुक्त भारत’ अभियानांतर्गत १७५ विद्यार्थ्यांचा व्यसनमुक्त जीवन जगण्याचा संकल्प*

जिल्हा परिषद, ठाणे *नूतन हिंदी विद्यालयात विद्यार्थ्यांनी दिला ‘नो ड्रग्स’चा नारा* *सेवा संकल्प अभियान तसेच ‘नशामुक्त भारत’ अभियानांतर्गत १७५ विद्यार्थ्यांचा व्यसनमुक्त जीवन जगण्याचा संकल्प* ठाणे, दि. १४ ऑक्टोबर २०२६ (जिल्हा परिषद, ठाणे) : सेवा संकल्प अभियान तसेच नशामुक्त भारत अभियानांतर्गत जिल्हा परिषद, ठाणे समाजकल्याण विभाग आणि नशाबंदी मंडळ, महाराष्ट्र राज्य यांच्या संयुक्त विद्यमाने कल्याण येथील कोळसेवाडी परिसरातील नूतन हिंदी विद्यालयात येथे दि. १३ ऑक्टोबर, २०२६ रोजी अंमली पदार्थविरोधी जनजागृती कार्यक्रमाचे आयोजन करण्यात आले. जिल्हा परिषद, ठाणे समाजकल्याण अधिकारी उज्ज्वला सपकाळे यांच्या मार्गदर्शनाखाली आयोजित या कार्यक्रमात १७५ विद्यार्थ्यांनी व्यसनमुक्त भारत घडविण्याचा संकल्प केला. कार्यक्रमात नशाबंदी मंडळ, महाराष्ट्र राज्याचे ठाणे जिल्हा संघटक मिलिंद रूपचंद पाटील यांनी ‘अंमली पदार्थांना नाही म्हणा आणि जीवनाला हो म्हणा’ या विषयावर विद्यार्थ्यांना मार्गदर्शन केले. युवकांमध्ये व्यसनांविषयी जागरूकता निर्माण करणे, अंमली पदार्थांच्या दुष्परिणामांची माहिती देणे आणि व्यसनमुक्त जीवनशैलीचा ...

अनाधिकृत निर्माण की फ्लैटों के दस्तावेज अब रजिस्टर्ड नहीं होंगे महाराष्ट्र सरकार का सख्त आदेश, सब-रजिस्ट्रारों को निर्देश

 अनाधिकृत निर्माण की फ्लैटों के दस्तावेज अब रजिस्टर्ड नहीं होंगे महाराष्ट्र सरकार का सख्त आदेश, सब-रजिस्ट्रारों को निर्देश मुंबई, 12 अक्टूबर 2026 महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में अनाधिकृत निर्माण की फ्लैटों की बिक्री और हस्तांतरण के दस्तावेजों को रजिस्टर न करने का सख्त आदेश जारी किया है। राजस्व विभाग के इस परिपत्रक में सब-रजिस्ट्रारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बिना उचित अनुमति के बने भवनों या मंजूर क्षेत्र से अधिक क्षेत्रफल वाली फ्लैटों के दस्तावेज अब दर्ज नहीं किए जाएंगे। राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में 22 सितंबर 2026 को हुई बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद यह परिपत्रक जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि राज्य के कुछ हिस्सों में सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना निर्माण परियोजनाएं खड़ी की जा रही हैं और उनमें फ्लैट बेचे जा रहे हैं। कुछ मामलों में मंजूर नक्शे से अधिक क्षेत्रफल वाली फ्लैटों की भी बिक्री हो रही है, जिससे खरीदारों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। अब क्या नहीं होगा रजिस्ट्रेशन परिपत्रक के अनुसार, किसी भी निर्माण परियोजना में फ्लैटों की पहली बिक्री के लिए समझौता, बिक्री ...