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गुरु प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। जब प्रदोष व्रत (त्रयोदशी तिथि) गुरुवार को पड़ता है, तो उसे गुरु प्रदोष या बृहस्पति प्रदोष कहा जाता है।

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झिरो पेंडेंसी एंड डेली डिस्पोज़ल

झिरो पेंडेंसी एंड डेली डिस्पोज़ल शासकीय एवं निमशासकीय कार्यालयों के लिए कार्यालयीन कामकाज की कार्यपद्धति महाराष्ट्र शासन सामान्य प्रशासन विभाग शासन निर्णय क्रमांकः संकीर्ण-२०१८/प्र.क्र.९/१८ (र. व का.) मंत्रालय, मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरु चौक, मुंबई- ४०० ०३२. दिनांक : १५ फरवरी, २०१८ वाचा : १) सामान्य प्रशासन विभाग, परिपत्रक क्रमांक: निरिक्ष १०८५/५७/१८ (र. व का.) दिनांक २६ अप्रैल, १९८५, २) सामान्य प्रशासन विभाग, परिपत्रक क्रमांक: शाकाप १०८५/५३/१८ (र. व का.) दिनांक २० अप्रैल, १९८५, ३) सामान्य प्रशासन विभाग, परिपत्रक क्रमांक: शाकाप १०८५/५०/१८ (र. व का.) दिनांक २३ अगस्त, १९८५, ४) सामान्य प्रशासन विभाग, परिपत्रक क्रमांक: शमपा १०८५/९१/१८ (र. व का.) दिनांक ११ जून, १९८५, ५) सामान्य प्रशासन विभाग, अर्धशासकीय पत्र क्रमांक: एआरसी १०८५/प्र. क्र. २५/१८ अ, दिनांक १४ जून, १९८५, ६) सामान्य प्रशासन विभाग, परिपत्रक क्रमांक संकीर्ण १०००/ प्र.क्र. ३० / २००० / १८, दिनांक २३ नवंबर, २०००, ७) सामान्य प्रशासन विभाग, परिपत्रक क्रमांक संकीर्ण २०१३ / प्र. क्र. २४/१८ (र. व का.), दिनांक २७ मई, २०१३, ८) महारा...

महाराष्ट्र शासन का सख्त निर्देश: सरकारी पत्रों पर नाम और पदनाम अनिवार्य,

महाराष्ट्र शासन का सख्त निर्देश: सरकारी पत्रों पर नाम और पदनाम अनिवार्य,  मुंबई, 30 मई 2018 महाराष्ट्र शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने कार्यालयीन कामकाज नियमपुस्तिका के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने के लिए नया परिपत्रक जारी किया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि शासकीय पत्रों, आदेशों, पावतियों और किसी भी दस्तऐवज पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी या कर्मचारी को अपने नाम, पदनाम और कार्यालय का स्पष्ट उल्लेख करना होगा। परिपत्रक में कहा गया है कि नियमपुस्तिका की धारा 53 (8) के अनुसार हस्ताक्षर के नीचे कोष्ठक में नाम और उसके नीचे पदनाम लिखना जरूरी है। इस संबंध में पहले भी 16 जून 2005 और 10 फरवरी 2016 को निर्देश जारी किए जा चुके हैं। राज्य सूचना आयोग, कोंकण खंडपीठ के समक्ष दायर एक द्वितीय अपील (के.आर. 4324/2017) की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि आरटीआई के तहत दी गई दस्तावेजों में संबंधित तलाठी का नाम नहीं लिखा गया था। इससे जिम्मेदार अधिकारियों का पता लगाने में दिक्कत हुई। इसके मद्देनजर सभी मंत्रालयीन विभागों और उनके अधीनस्थ कार्यालयों को दोबारा निर्देश दिए गए हैं कि: हर पत्र, आदेश या द...

अब परिवार के सदस्य अलग-अलग जगह से भी अपना राशन ले सकते हैं

  अब परिवार के सदस्य अलग-अलग जगह से भी अपना राशन ले सकते हैं भारत सरकार की वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC) योजना के तहत अब परिवार के सदस्यों को एक ही राशन की दुकान पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। क्या है खास बात? अगर आपके परिवार के सदस्य अलग-अलग गाँव, शहर या राज्य में रहते हैं, तो वे अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी राशन की दुकान (Fair Price Shop) से अपना निर्धारित राशन ले सकते हैं। उदाहरण: बेटी – गाँव 1 की राशन दुकान से अपना हिस्सा ले रही है माँ – गाँव 2 की राशन दुकान से भाई – गाँव 3 की राशन दुकान से छोटी बहन – गाँव 4 की राशन दुकान से सभी एक ही राशन कार्ड पर अपना-अपना हिस्सा आसानी से ले रहे हैं! कौन ले सकता है फायदा? अंत्योदय अन्न योजना (AAY) और प्राथमिकता वाले परिवार (PHH) के राशन कार्ड धारक जिनका राशन कार्ड आधार से जुड़ा हुआ हो प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के अंतर्गत मुफ्त राशन भी इसी सुविधा के साथ मिल रहा है कैसे काम करता है? आपको बस नजदीकी e-PoS मशीन वाली राशन दुकान पर जाना है, आधार बायोमेट्रिक या OTP से अपनी पहचान बतानी है और अपना निर्धारित राशन ले लेना है। परिवार...

एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड: अब देश में कहीं भी मिलेगा आपका राशन

  एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड: अब देश में कहीं भी मिलेगा आपका राशन काम की जगह बदल सकती है, घर बदल सकता है और शहर भी बदल सकता है, लेकिन आपके राशन का अधिकार कभी नहीं बदलेगा। सरकार की वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC) योजना इसी सिद्धांत पर आधारित है। इस सुविधा के तहत अब देश का कोई भी लाभार्थी अपनी पहचान और राशन कार्ड के साथ भारत की किसी भी राशन दुकान से अपना राशन आसानी से प्राप्त कर सकता है। चाहे आप नौकरी के सिलसिले में किसी दूसरे शहर चले गए हों या परिवार के साथ नया घर बसाया हो—आपका राशन का हक बरकरार रहेगा। ONORC ने पूरे देश को एक सूत्र में बांध दिया है। अब “एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड” का सपना हकीकत बन चुका है। राशन की दुकान अब सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए खुली है। किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में जाकर आप अपना निर्धारित राशन ले सकते हैं। यह सुविधा खासकर प्रवासी मजदूरों, नौकरीपेशा लोगों और उन परिवारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित होते रहते हैं। सरकार का स्पष्ट संदेश है—आपका राशन का अधिकार सुरक्षित है और पूरे देश में उपलब्ध रहेगा। एक राष्ट्...

महाराष्ट्र शासन का महत्वपूर्ण निर्णय: दिव्यांग बच्चों के लिए कुटुंब निवृत्तिवेतन में बड़ी राहत

 महाराष्ट्र शासन का महत्वपूर्ण निर्णय: दिव्यांग बच्चों के लिए कुटुंब निवृत्तिवेतन में बड़ी राहत मुंबई, २३ सप्टेंबर २०२६ महाराष्ट्र सरकार के वित्त विभाग ने २२ सप्टेंबर २०२६ को एक महत्वपूर्ण शासन निर्णय जारी किया है, जिससे दिव्यांग बच्चों वाले कुटुंब निवृत्तिवेतनधारकों को बड़ा दिलासा मिला है। इस निर्णय के अनुसार, मनोविकृति या मानसिक दुर्बलता से ग्रस्त तथा शारीरिक अपंगता/विकलांगता वाले पुत्र या पुत्री के मामले में वैद्यकीय प्रमाणपत्र संबंधी शर्तों में सुधार किया गया है। मुख्य बदलाव: यदि संबंधित पुत्र/पुत्री स्थायी रूप से दिव्यांग है और यह वैद्यकीय प्रमाणपत्र से साबित हो जाता है, तो प्रमाणपत्र केवल एक बार जमा करना होगा। यदि अपंगता अस्थायी है, तो हर ५ वर्ष में नया वैद्यकीय प्रमाणपत्र जमा करना आवश्यक होगा। वैद्यकीय प्रमाणपत्र जिला शल्यचिकित्सक से कम रैंक के नहीं, बल्कि उनके बराबर या उससे ऊंचे स्तर के वैद्यकीय अधिकारी द्वारा जारी होना चाहिए। यह निर्णय महाराष्ट्र सिविल सेवा (निवृत्तिवेतन) नियम, १९८२ में संबंधित प्रावधानों में संशोधन के अनुरूप लिया गया है। यह निर्णय किन पर लागू होगा? निवृत्...

मुंबई उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण फैसला: स्कूल छोड़ने के बाद भी LC और जनरल रजिस्टर में सुधार संभव

 मुंबई उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण फैसला: स्कूल छोड़ने के बाद भी LC और जनरल रजिस्टर में सुधार संभव शिक्षा अधिकारी (EO) के पास ही सुधार का अधिकार, मुख्याध्यापक खुद बदलाव नहीं कर सकते औरंगाबाद | मुंबई उच्च न्यायालय के औरंगाबाद खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि स्कूल छोड़ने या शिक्षा पूरी होने के बाद भी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (Leaving Certificate) और जनरल रजिस्टर में जन्म तारीख, नाम, पिता का नाम या उपनाम जैसी साफ दिखने वाली गलतियों का सुधार किया जा सकता है। यह अधिकार शिक्षा अधिकारी (Education Officer – EO) के पास ही है। यह आदेश Writ Petition No. 8739 of 2026 (सैय्यद सुहाना मुबीन बनाम महाराष्ट्र शासन) में 4 अगस्त 2026 को दिया गया। फैसले की मुख्य बातें सुधार का अधिकार किसके पास? स्कूल छोड़ने के बाद भी जनरल रजिस्टर या सर्टिफिकेट में सुधार करने का अधिकार शिक्षा अधिकारी (EO) के पास है। मुख्याध्यापक (HM) खुद से कोई बदलाव नहीं कर सकते। जरूरी दस्तावेजों के साथ प्रस्ताव तैयार कर शिक्षा अधिकारी के पास भेजना होता है। शिक्षा अधिकारी के लिखित आदेश के बाद ही रजिस्टर में ए...