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भारत के महारजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त ने आज नई दिल्ली में जनगणना-2027 पर संवाददाता सम्मलेन को संबोधित किया दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी, पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा

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महाराष्ट्रात केरोसीन वितरणाबाबत नवीन शासन निर्णय* *सर्वसामान्यांसाठी दिलासादायक पाऊल*

दिनांक: 27 मार्च 2026 *महाराष्ट्रात केरोसीन वितरणाबाबत नवीन शासन निर्णय* *सर्वसामान्यांसाठी दिलासादायक पाऊल*      जागतिक भू-राजकीय परिस्थितीमुळे सध्या एलपीजी (LPG) गॅसचा तुटवडा भासत आहे. या पार्श्वभूमीवर, केंद्र आणि राज्य सरकारने सर्वसामान्य नागरिकांच्या इंधनाची गरज ओळखून एक महत्त्वपूर्ण निर्णय घेतला आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या अन्न, नागरी पुरवठा व ग्राहक संरक्षण विभागाने 25मार्च 2026 रोजी काढलेल्या आदेशानुसार, राज्यात तात्पुरत्या स्वरूपात केरोसीनचे वितरण करण्यास मंजूरी देण्यात आली आहे. *1. केरोसीन वाटपाचे स्वरूप आणि प्रमाण*     केंद्र शासनाने महाराष्ट्र राज्यासाठी एकूण 3 हजार 744 कि.ली. (37 लाख,44 हजार लिटर) केरोसीनचा कोटा मंजूर केला आहे.      *या वाटपाचे मुख्य नियम खालीलप्रमाणे आहेत.* • प्रति कुटुंब मर्यादा : प्रत्येक पात्र शिधापत्रिकाधारकास किंवा कुटुंबाला 3 लिटर केरोसीन दिले जाईल. • वितरण कालावधी : हे वितरण प्रामुख्याने मार्च 2026 मध्ये केले जाणार आहे. • उचल बंधनकारक : वाटपाच्या तारखेपासून 45 दिवसांच्या आत संपूर्ण केरोसीनची उचल करणे आवश्यक आहे, ...

ठाणे जिल्ह्यात बाटली किंवा कॅनमध्ये पेट्रोल-डिझेल विक्रीवर बंदी *जिल्हाधिकाऱ्यांचे कडक आदेश*

 *ठाणे जिल्ह्यात बाटली किंवा कॅनमध्ये पेट्रोल-डिझेल विक्रीवर बंदी* *जिल्हाधिकाऱ्यांचे कडक आदेश* ठाणे,दि.27 मार्च 2026: समाजमाध्यमांवर पेट्रोल आणि डिझेलचा तुटवडा निर्माण होणार असल्याच्या अफवा आणि बातम्या पसरत असल्याच्या पार्श्वभूमीवर ठाणे जिल्हा प्रशासनाने मोठा निर्णय घेतला आहे. जिल्ह्यात कायदा व सुव्यवस्था अबाधित राखण्यासाठी आणि सार्वजनिक सुरक्षिततेच्या दृष्टीने पेट्रोलसारख्या ज्वलनशील पदार्थांच्या मुक्त विक्रीमुळे कोणतीही अनुचित घटना घडू नये, यासाठी प्रतिबंधात्मक उपाययोजना लागू करण्यात आल्या आहेत.       ठाण्याचे जिल्हाधिकारी डॉ. श्रीकृष्ण पांचाळ यांनी पेट्रोलियम नियम २००२ मधील तरतुदींनुसार जिल्ह्यातील सर्व पेट्रोल पंपांवरून खुल्या स्वरूपात इंधन विक्री करण्यास तातडीने मनाई केली आहे.      जिल्हाधिकाऱ्यांनी निर्गमित केलेल्या या आदेशानुसार, आता जिल्ह्यातील सर्व पेट्रोल पंप चालकांना पेट्रोल किंवा डिझेल केवळ वाहनांच्या इंधन टाकीमध्येच वितरित करण्याचे निर्देश देण्यात आले आहेत. कोणत्याही परिस्थितीत ग्राहकांना प्लास्टिकच्या बाटल्या, कॅन, डबे किंवा अन्य को...

आरटीई २५ टक्के प्रवेश प्रक्रियेसाठी ऑनलाईन अर्जास ३१ मार्चपर्यंत मुदतवाढ ३ ते ५ किमी अंतरावरील शाळांचे पर्याय निवडण्याची संधी कायम

*आरटीई २५ टक्के प्रवेश प्रक्रियेसाठी ऑनलाईन अर्जास ३१ मार्चपर्यंत मुदतवाढ* *३ ते ५ किमी अंतरावरील शाळांचे पर्याय निवडण्याची संधी कायम* ठाणे, दिनांक : २७ मार्च २०२६ (जिल्हा परिषद ठाणे) : शिक्षणाचा हक्क कायद्याअंतर्गत ( आरटीई ) खासगी विनाअनुदानित शाळांमधील २५ टक्के राखीव प्रवेश प्रक्रियेसाठी ऑनलाईन अर्ज भरण्याची मुदत आता दि. ३१ मार्च, २०२६ पर्यंत वाढविण्यात आली आहे. पालकांना अर्ज सादर करण्यासाठी तसेच आवश्यक दुरुस्ती करण्यासाठी अतिरिक्त वेळ उपलब्ध करून देण्याच्या उद्देशाने ही मुदतवाढ देण्यात आली आहे. यापूर्वी जाहीर केल्यानुसार, पालकांना ३ ते ५ किलोमीटर अंतरावरील शाळांचे पर्याय निवडण्याची सुविधा कायम ठेवण्यात आली आहे. मुंबई उच्च न्यायालयाच्या नागपूर खंडपीठाच्या निर्देशानुसार शाळेच्या अंतरासंबंधीची १ किलोमीटरची अट शिथिल करण्यात आल्यामुळे पालकांना अधिक शाळांचे पर्याय उपलब्ध झाले आहेत. या निर्णयामुळे अधिकाधिक पात्र विद्यार्थ्यांना त्यांच्या पसंतीच्या शाळांमध्ये प्रवेश मिळण्यास मदत होणार आहे. तसेच, ज्या पालकांनी यापूर्वी ऑनलाईन अर्ज सादर केले आहेत, त्यांना अर्जामध्ये आवश्यक दुरुस्ती करण्यासा...

आज चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी (26 मार्च 2026) के इस पावन अवसर पर आपकी शुभकामनाएँ बहुत ही सुंदर और हृदयस्पर्शी हैं। माँ महागौरी की आराधना, कन्या पूजन और हवन अवश्य करें—माँ की कृपा से सभी कष्ट दूर हों, घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे।

  आज चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी (26 मार्च 2026) के इस पावन अवसर पर आपकी शुभकामनाएँ बहुत ही सुंदर और हृदयस्पर्शी हैं। माँ महागौरी की आराधना, कन्या पूजन और हवन अवश्य करें—माँ की कृपा से सभी कष्ट दूर हों, घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे। माँ महागौरी का स्वरूप और महत्व माँ दुर्गा का आठवाँ स्वरूप महागौरी अत्यंत शांत, पवित्र और गौर वर्ण का है। इनका वाहन बैल (वृषभ) है, वस्त्र और आभूषण श्वेत हैं। इनकी पूजा से पापों का नाश होता है, मानसिक शांति मिलती है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। बीज मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः (इसे जितना हो सके जपें, खासकर 108 बार) ध्यान मंत्र: श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥ सरल पूजा विधि (आज के लिए) सुबह स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र (सफेद या हल्के रंग) धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें, लाल या सफेद कपड़ा बिछाकर माँ महागौरी की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें। दीपक जलाएँ, सफेद या रात की रानी के फूल चढ़ाएँ। भोग: नारियल, दूध से बनी मिठाई, मिश्री या सफेद मिठाई अर्पित करें। आरती करें और हवन में माँ के मंत्रों का जाप कर...

1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1857 की क्रांति) में रानी लक्ष्मीबाई के साथ कई वीर साथी थे, जिनमें से बलदेव तेली, परम तेली और चतरे तेली तीनों तेली समाज के बहादुर योद्धा थे। ये झांसी की रानी के अटूट वफादार थे और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1857 की क्रांति) में रानी लक्ष्मीबाई के साथ कई वीर साथी थे, जिनमें से बलदेव तेली, परम तेली और चतरे तेली तीनों तेली समाज के बहादुर योद्धा थे। ये झांसी की रानी के अटूट वफादार थे और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी भूमिका और बलिदान जब अंग्रेजों ने झांसी के किले को घेर लिया, तो इन तीनों वीरों ने रानी लक्ष्मीबाई के लिए रसद (राशन/आपूर्ति), हथियार और अन्य सहायता पहुंचाने का काम किया। वे रानी की सेना में शामिल होकर अंग्रेजों से सीधे युद्ध लड़े और अपनी वफादारी से मातृभूमि की रक्षा के लिए प्रेरित रहे। 23 मार्च 1858 को अंग्रेजों ने इन्हें पकड़ लिया। अंग्रेजों ने इन्हें डराने-धमकाने की बहुत कोशिश की, लेकिन ये तीनों वीर नहीं झुके। उन्होंने हंसते-हंसते फांसी को गले लगाया और देश के लिए शहीद हो गए। यह तारीख उनकी अमर शहादत का प्रतीक है। ये तीनों क्रांतिकारी तेली समाज के उन गुमनाम नायकों में से हैं, जिन्होंने रानी लक्ष्मीबाई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी। मुख्यधारा के इतिहास में रानी लक्ष्मीबाई की वीरता बहुत चर्चि...

शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु तीनों ने महज 23-24 साल की छोटी-सी उम्र में देश की आजादी के लिए फाँसी का फंदा चूम लिया। ये वो उम्र थी जब ज्यादातर लोग जीवन की शुरुआत करते हैं, लेकिन इन वीरों ने मौत को गले लगाकर अमरता प्राप्त की।

 शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु तीनों ने महज 23-24 साल की छोटी-सी उम्र में देश की आजादी के लिए फाँसी का फंदा चूम लिया। ये वो उम्र थी जब ज्यादातर लोग जीवन की शुरुआत करते हैं, लेकिन इन वीरों ने मौत को गले लगाकर अमरता प्राप्त की। भगत सिंह (जन्म: 27/28 सितंबर 1907) — फाँसी के समय 23 वर्ष की उम्र में (23 मार्च 1931 को)। सुखदेव थापर — फाँसी के समय 23 वर्ष की उम्र में। शिवराम राजगुरु — फाँसी के समय 23 वर्ष की उम्र में (कुछ स्रोतों में थोड़ा अंतर, लेकिन सामान्यतः 23)। कुछ जगहों पर भगत सिंह को 24 साल बताया जाता है, लेकिन ज्यादातर विश्वसनीय स्रोत (जैसे विकिपीडिया और ऐतिहासिक रिकॉर्ड) उनकी उम्र 23 ही मानते हैं। 23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में अंग्रेजों ने तय समय से 11 घंटे पहले (शाम करीब 7:33 बजे) इन्हें फाँसी दे दी—क्योंकि वे इनके बढ़ते प्रभाव और जन-आंदोलन से डरते थे। तीनों हंसते-हंसते, "इंकलाब जिंदाबाद" के नारे लगाते हुए फाँसी पर चढ़े। इनके बलिदान ने युवा पीढ़ी को आज भी प्रेरित किया कि उम्र कभी बाधा नहीं होती—जज्बा और विचार ही असली ताकत होते हैं। शहीद दिवस पर इन महा...