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तेली समाज के गौरव, राष्ट्र के गौरव, दानवीर भामाशाह जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन! 🙏

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विश्व धरोहर दिवस (World Heritage Day) आज 18 अप्रैल 2026 को मनाया जा रहा है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस (International Day for Monuments and Sites) भी कहते हैं।

विश्व धरोहर दिवस (World Heritage Day) आज 18 अप्रैल 2026 को मनाया जा रहा है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस (International Day for Monuments and Sites) भी कहते हैं। 2026 की थीम (Theme): "Emergency Response for Living Heritage in contexts of Conflicts and Disasters" (हिंदी में: संघर्षों और आपदाओं के संदर्भ में जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया) इस थीम का मतलब है कि युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं (जैसे भूकंप, बाढ़) या अन्य संकटों के समय हमारी जीवित सांस्कृतिक विरासत (living heritage) — जैसे परंपराएं, लोक कला, त्योहार, मौखिक इतिहास और समुदायों से जुड़ी सांस्कृतिक प्रथाएं — को कैसे तुरंत बचाया जाए और संरक्षित किया जाए। यह दिवस क्यों मनाया जाता है? 1982 में ICOMOS (International Council on Monuments and Sites) ने इसकी शुरुआत की। 1983 में UNESCO ने इसे आधिकारिक रूप से मंजूरी दी। उद्देश्य: दुनिया भर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के बारे में जागरूकता फैलाना, उनकी कमजोरियों को समझना और संरक्षण के प्रयासों को बढ़ावा देना। भारत में कई यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं, जैसे ताज...

17 अप्रैल — डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की पुण्यतिथि “शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण होना चाहिए”

 17 अप्रैल — डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की पुण्यतिथि “शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण होना चाहिए” यह विचार भारत के महान दार्शनिक, शिक्षाविद्, पूर्व राष्ट्रपति और भारतरत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का है। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम उन्हें कोटि-कोटि श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। डॉ. राधाकृष्णन का योगदान डॉ. राधाकृष्णन एक प्रख्यात दार्शनिक थे, जिन्होंने भारतीय दर्शन और पाश्चात्य दर्शन दोनों को गहराई से समझा और जोड़ा। वे शिक्षक के सम्मान के प्रतीक बने, यही कारण है कि उनका जन्मदिन 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनका मानना था कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान या डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं है। सच्ची शिक्षा वह है जो व्यक्ति के चरित्र, नैतिकता, मूल्यों और व्यक्तित्व का निर्माण करती है। बिना चरित्र के ज्ञान अधूरा और कभी-कभी खतरनाक भी हो सकता है। उनके प्रमुख विचार शिक्षा का मुख्य लक्ष्य मनुष्य को अच्छा इंसान बनाना है, न कि सिर्फ नौकरी या धन कमाने का साधन। शिक्षक को केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि छात्रों के जीवन का मार्गदर्शक होना चाहिए। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता को...

बाबासाहेब डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर जी (14 अप्रैल 1891 – 6 दिसंबर 1956) भारत के महानतम समाज सुधारक, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और भारतीय संविधान के मुख्य निर्माता थे। उन्हें प्यार से बाबासाहेब कहा जाता है। वे दलितों (तत्कालीन अछूतों) के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले नेता, समानता, स्वतंत्रता और न्याय के प्रतीक थे।

 बाबासाहेब डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर जी (14 अप्रैल 1891 – 6 दिसंबर 1956) भारत के महानतम समाज सुधारक, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और भारतीय संविधान के मुख्य निर्माता थे। उन्हें प्यार से बाबासाहेब कहा जाता है। वे दलितों (तत्कालीन अछूतों) के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले नेता, समानता, स्वतंत्रता और न्याय के प्रतीक थे। प्रारंभिक जीवन डॉ. आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू (अब डॉ. अंबेडकर नगर) में हुआ था। वे महार जाति (दलित समुदाय) से थे और अपने माता-पिता रामजी मालोजी सकपाल (सूबेदार, भारतीय सेना) तथा भीमाबाई की 14वीं संतान थे। बचपन में उन्हें जातिगत भेदभाव का कड़ा सामना करना पड़ा—स्कूल में अलग बैठना, पानी न पीने देना आदि। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और शिक्षा पर जोर दिया। शिक्षा और विदेश यात्रा 1912-13 में बॉम्बे विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में स्नातक। बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ की छात्रवृत्ति से कोलंबिया विश्वविद्यालय (अमेरिका) गए, जहां 1915 में एम.ए. और 1917 में पीएचडी (अर्थशास्त्र) पूरी की। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स ...

आज 8 अप्रैल को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जी की पुण्यतिथि (स्मृतिदिन) है।

 आज 8 अप्रैल को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जी की पुण्यतिथि (स्मृतिदिन) है। संक्षिप्त जीवन परिचय जन्म: 26/27 जून 1838, नैहाटी (या कांठलपाड़ा), बंगाल प्रेसिडेंसी (वर्तमान पश्चिम बंगाल)। निधन: 8 अप्रैल 1894, कोलकाता में 55 वर्ष की आयु में (मधुमेह की जटिलताओं के कारण)। वे बांग्ला साहित्य के महान उपन्यासकार, कवि, निबंधकार और पत्रकार थे। उन्हें बांग्ला साहित्य का “साहित्य सम्राट” भी कहा जाता है। प्रमुख योगदान उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना “आनंदमठ” (1882) उपन्यास है, जिसमें “वंदे मातरम्” गान शामिल है। यह गान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणास्रोत बना और आज भारत का राष्ट्रीय गीत है। अन्य प्रमुख रचनाएँ: दुर्गेशनंदिनी कपालकुंडला विषबृक्ष कृष्णकांतेर विल राजसिंह देवी चौधुरानी रजनी उनके उपन्यासों में राष्ट्रवाद, सामाजिक सुधार और बंगाल के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की भावना प्रमुख रूप से दिखती है। वे आधुनिक बांग्ला उपन्यास के जनक माने जाते हैं। आज की याद आज उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। उनकी लेखनी ने न केवल बांग्ला साहित्य को समृद्ध किया, बल्कि स्वाधीनता आंदोलन में लाखों भार...

6 अप्रैल को विकास और शांति के लिए अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस (International Day of Sport for Development and Peace - IDSDP) मनाया जाता है।

6 अप्रैल को विकास और शांति के लिए अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस (International Day of Sport for Development and Peace - IDSDP) मनाया जाता है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 2013 में घोषित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य खेल की शक्ति को उजागर करना है, जो सामाजिक विकास, शांति, एकता, सहिष्णुता और समावेश को बढ़ावा देती है। यह दिन 6 अप्रैल 1896 को एथेंस में पहले आधुनिक ओलंपिक खेलों के उद्घाटन की याद में मनाया जाता है। 2026 का विषय (Theme): “खेल: पुल बनाना, बाधाओं को तोड़ना” (Sport: Bridging Bridges, Breaking Barriers) यह विषय खेल के माध्यम से सामाजिक बाधाओं को दूर करने, पुल बनाने और अधिक समावेशी तथा समान विश्व बनाने पर जोर देता है। खेल न केवल स्वास्थ्य और अनुशासन सिखाता है, बल्कि लोगों को जोड़ता है, भेदभाव मिटाता है और सकारात्मक परिवर्तन लाता है। आप सभी देशवासियों को अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🏅🌍 आइए, हम सब खेल को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, स्वस्थ रहें और एक बेहतर समाज का निर्माण करें। खेलो इंडिया! जय हिंद! 🇮🇳 🙏👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇 🙏      ...

भाजपा स्थापना दिवस 6 अप्रैल को मनाया जाता है।

 भाजपा स्थापना दिवस 6 अप्रैल को मनाया जाता है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को नई दिल्ली के कोटला मैदान (अब डॉ. अंबेडकर स्टेडियम के पास) में एक कार्यकर्ता अधिवेशन के दौरान हुई थी। पार्टी के पहले अध्यक्ष श्री अटल बिहारी वाजपेयी चुने गए थे। आज (6 अप्रैल 2026) को भाजपा अपना 47वां स्थापना दिवस मना रही है। पृष्ठभूमि और इतिहास भाजपा का इतिहास भारतीय जनसंघ (1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित) से जुड़ा है। 1977 में जनसंघ ने जनता पार्टी में विलय कर लिया और मोरारजी देसाई सरकार में शामिल हुआ। जनता पार्टी के विघटन के बाद पूर्व जनसंघ के सदस्यों ने अलग होकर 6 अप्रैल 1980 को नई पार्टी का गठन किया, जिसका नाम भारतीय जनता पार्टी रखा गया। पार्टी की स्थापना पांच निष्ठाओं (राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, गांधीवादी समाजवाद, पॉजिटिव सेकुलरिज्म और मूल्यों पर आधारित राजनीति) के आधार पर हुई। आरंभ में 1984 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को सिर्फ 2 सीटें मिलीं, लेकिन समय के साथ यह दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई है। 2014 से यह केंद्र में सत्तारूढ़ है और कई राज्यों में सरकार चला रही ...