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विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस (World Press Freedom Day) हर साल 3 मई को मनाया जाता है।

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१ मे महाराष्ट्र दिवस (Maharashtra Day / Maharashtra Din) महाराष्ट्र राज्याच्या स्थापना दिवस म्हणून साजरा केला जातो. हा दिवस १ मे १९६० रोजी महाराष्ट्र राज्याच्या औपचारिक निर्मितीची आठवण करून देतो

 १ मे महाराष्ट्र दिवस (Maharashtra Day / Maharashtra Din) महाराष्ट्र राज्याच्या स्थापना दिवस म्हणून साजरा केला जातो. हा दिवस १ मे १९६० रोजी महाराष्ट्र राज्याच्या औपचारिक निर्मितीची आठवण करून देतो.  का १ मे रोजी? स्वातंत्र्यानंतर भारतात राज्यांचे पुनर्गठन भाषिक आधारावर करण्यात आले. तत्कालीन बॉम्बे राज्य (Bombay State) द्विभाषिक होते (मराठी आणि गुजराती भाषिक भाग). मराठी भाषिक लोकांसाठी स्वतंत्र राज्याची मागणी सयुक्त महाराष्ट्र चळवळ (Samyukta Maharashtra Movement) द्वारे जोरदार झाली. या चळवळीत अनेक नेते आणि कार्यकर्ते सहभागी होते. बॉम्बे पुनर्गठन अधिनियम १९६० (Bombay Reorganisation Act, 1960) अंतर्गत १ मे १९६० रोजी बॉम्बे राज्याचे विभाजन झाले: महाराष्ट्र (मराठी भाषिक, मुंबई राजधानीसह) गुजरात (गुजराती भाषिक) याच दिवशी महाराष्ट्र राज्य अस्तित्वात आला. त्यामुळे हा दिवस महाराष्ट्र दिवस म्हणून राज्य सुट्टीचा दिवस आहे. साजरा कसा केला जातो? मुंबईतील शिवाजी पार्कसारख्या ठिकाणी मुख्य कार्यक्रम, ध्वजारोहण, परेड आणि सांस्कृतिक कार्यक्रम. राज्यभरात सांस्कृतिक कार्यक्रम, मराठी अस्मिता आणि अभि...

1 मई को गुजरात दिवस (Gujarat Day या Gujarat Sthapana Divas / गुजरात गौरव दिन) मनाया जाता है।

 1 मई को गुजरात दिवस (Gujarat Day या Gujarat Sthapana Divas / गुजरात गौरव दिन) मनाया जाता है।  यह दिन 1 मई 1960 को गुजरात राज्य की स्थापना की याद में मनाया जाता है। उस दिन बॉम्बे रीऑर्गनाइजेशन एक्ट के तहत द्विभाषी बॉम्बे राज्य को दो भागों में बाँटा गया: मराठी भाषी क्षेत्र → महाराष्ट्र गुजराती भाषी क्षेत्र → गुजरात इस तरह गुजरात एक अलग राज्य बना, और उसी दिन महाराष्ट्र दिवस भी मनाया जाता है।8cac9c इतिहास का संक्षिप्त विवरण स्वतंत्रता के बाद गुजरात और महाराष्ट्र दोनों बॉम्बे राज्य का हिस्सा थे। भाषाई आधार पर अलग राज्य बनाने की माँग (महागुजरात आंदोलन और समान मराठी आंदोलन) के बाद संसद ने 1960 में कानून पास किया। 1 मई 1960 को कानून लागू हुआ और दोनों नए राज्य अस्तित्व में आए। गुजरात की पहली राजधानी अहमदाबाद थी (बाद में गांधीनगर बनी)। कैसे मनाया जाता है? गुजरात में सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक नृत्य (गरबा, रास), संगीत, प्रदर्शनियाँ और सरकारी आयोजन होते हैं। अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट जैसे स्थानों पर मुख्य कार्यक्रम होते हैं। लोग राज्य की उपलब्धियों, संस्कृति, उद्यमशीलता और गौरव पर चर्...

भिवंडी निजामपूर शहर महानगरपालिका, भिवंडी जिल्हा - ठाणे. दिनांक:- 01/05/2026. महानगरपालिकेतर्फे महाराष्ट्र राज्याच्या ६७ वा स्थापाना दिन व आंतरराष्ट्रीय कामगार दिन साजरा.

 भिवंडी निजामपूर शहर महानगरपालिका, भिवंडी जिल्हा - ठाणे. दिनांक:- 01/05/2026. महानगरपालिकेतर्फे महाराष्ट्र राज्याच्या ६७ वा स्थापाना दिन व आंतरराष्ट्रीय कामगार दिन साजरा.    आज दि. 01-05-2026 रोजी महाराष्ट्र राज्याचा ६७ स्थापना दिन व आंतरराष्ट्रीय कामगार दिनानिमित्त मा. महापौर श्री. नारायण रतन चौधरी, यांचे शुभहस्ते राष्ट्र ध्वजवंदन करण्यात आले.   तदनंतर महानगरपालिकेच्या प्रांगणातील डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांच्या पुर्णाकृती पुतळ्यास मा. महापौर श्री. नारायण रतन चौधरी व मा. आयुक्त श्री अनमोल सागर (भा.प्र.से.) यांचे शुभहस्ते पुष्पहार अर्पण करुन त्यांना अभिवादन करण्यात आले. तसेच जुनी प्रशासकीय इमारती समोरील डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांच्या अर्धपुतळ्यास मा. उप-महापौर तारीक अब्दुल बारी मोमीन व मा नगरसेवक फराज (बाबा) बहाउद्दीन यांच्या शुभहस्ते पुष्पहार अर्पण करुन त्यांना अभिवादन करण्यात आले.     तसेच जनगणना २०२६ या कार्यक्रमाअंतर्गत स्वगणना चे शुभारंभ मा. महापौर, उप- महापौर, मा आयुक्त, यांच्या शुभहस्ते करण्यात आला. तसेच याप्रसंगी मा नगरसेवक श्री. प्रशांत लाड, फराज...

एक बार गणेशजी ने भगवान शिवजी से कहा,

 एक बार गणेशजी ने भगवान शिवजी से कहा, पिताजी ! आप यह चिताभस्म लगाकर, मुण्डमाला धारणकर अच्छे नहीं लगते, मेरी माता गौरी अपूर्व सुंदरी और आप उनके साथ इस भयंकर रूप में ! पिताजी आप एक बार कृपा करके अपने सुंदर रूप में माता के सम्मुख आएं, जिससे हम आपका असली स्वरूप देख सकें ! भगवान शिवजी ने गणेशजी की बात मान ली ! कुछ समय बाद जब शिवजी स्नान करके लौटे तो उनके शरीर पर भस्म नहीं थी , बिखरी जटाएं सँवरी हुई, मुण्डमाला उतरी हुई थी ! सभी देवता, यक्ष, गंधर्व, शिवगण उन्हें अपलक देखते रह गये, वो ऐसा रूप था कि मोहिनी अवतार रूप भी फीका पड़ जाये ! भगवान शिव ने अपना यह रूप कभी प्रकट नहीं किया था ! शिवजी का ऐसा अतुलनीय रूप कि करोड़ों कामदेव को भी मलिन कर रहा था ! गणेशजी अपने पिता की इस मनमोहक छवि को देखकर स्तब्ध रह गए और मस्तक झुकाकर बोले -* *मुझे क्षमा करें पिताजी, परन्तु अब आप अपने पूर्व स्वरूप को धारण कर लीजिए ! भगवान शिव ने पूछा - क्यों पुत्र अभी तो तुमने ही मुझे इस रूप में देखने की इच्छा प्रकट की थी, अब पुनः पूर्व स्वरूप में आने की बात क्यों ? गणेशजी ने मस्तक झुकाये हुए ही कहा - क्षमा करें पिताश्री मेर...

उड़ीसा के एक गाँव में बंधु मोहंती नाम के व्यक्ति रहते थे। वे बहुत ही गरीब थे और केवल भिक्षा माँग कर अपना व परिवार का पोषण करते थे।

 उड़ीसा के एक गाँव में बंधु मोहंती नाम के व्यक्ति रहते थे। वे बहुत ही गरीब थे और केवल भिक्षा माँग कर अपना व परिवार का पोषण करते थे।  ये नित्य सत्संग के लिए जाया करते थे और इस से इनके मन में संकल्प बना कि जीवन का एकमात्र उद्देश्य है भगवद् प्राप्ति करना। इसलिए ये भिक्षा को भी ज़्यादा महत्व नहीं देते थे।  बस पेट भरने के लिए दो-चार घरों से भिक्षा का प्रयास करते, यदि ना मिले तो उपवास कर लेते और एकांत में खूब नाम कीर्तन करते। उन्होंने अपनी पत्नी को भी जीवन का परम लाभ समझाते हुए अपने साथ नाम कीर्तन करने को कहा। अब दोनों पात पत्नी साथ में भजन करने लगे।  बंधु के हृदय में विकलता आने लगी कि अब मुझे भगवान ज़रूर मिलेंगे। अब उन्हें किसी परिवार, मित्र, संबंधी आदि से मिलना अच्छा नहीं लग रहा था। उनकी हालत बहुत ही दयनीय थी। उनके पास बिलकुल भी धन नहीं था और भिक्षा से भी अन्न कभी-कभी ही मिलता था। उनके पास पहनने को फटे, पुराने और गाँठ बंधे हुए कपड़े ही थे। जब कई दिनों तक भोजन नहीं मिला तो उन्होंने अपनी पत्नी से कहा कि यदि तुम साथ दो तो हम मेरे एक मित्र के पास जा सकते हैं। मेरा मित्र बहुत...

हिमालय की गोद में बसा एक छोटा सा गाँव था, जहाँ एक गरीब भक्त रहता था। उसका नाम था गोपाल। उसके पास न धन था, न साधन, लेकिन उसके हृदय में भगवान शिव के लिए अटूट प्रेम था।

 हिमालय की गोद में बसा एक छोटा सा गाँव था, जहाँ एक गरीब भक्त रहता था। उसका नाम था गोपाल। उसके पास न धन था, न साधन, लेकिन उसके हृदय में भगवान शिव के लिए अटूट प्रेम था। हर दिन वह शिवलिंग पर जल चढ़ाता और एक ही प्रार्थना करता—“हे भोलेनाथ, मुझे अपने चरणों तक पहुँचा दो।” एक दिन उसने निश्चय किया कि वह कैलाश पर्वत पर जाकर स्वयं महादेव के दर्शन करेगा। गाँव वालों ने उसे रोका—“यह मार्ग कठिन है, तुम वहाँ नहीं पहुँच पाओगे।” लेकिन गोपाल की भक्ति अडिग थी। वह नंगे पैर, बिना भोजन-पानी के, केवल “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हुए चल पड़ा। रास्ता बेहद कठिन था—बर्फीली हवाएँ, ऊँचे पहाड़, और खतरनाक रास्ते। कई बार वह गिरा, उसके पैर लहूलुहान हो गए, शरीर थक कर चूर हो गया। एक रात तो वह इतनी ठंड में गिर पड़ा कि लगा अब प्राण निकल जाएंगे। उसी क्षण उसने कमजोर आवाज़ में पुकारा—“हे शिव, अब मैं नहीं चल सकता… अगर सच्ची भक्ति है तो मुझे अपने पास बुला लो…” तभी एक दिव्य प्रकाश प्रकट हुआ। उसके सामने स्वयं भगवान शिव खड़े थे। उनके चेहरे पर करुणा और प्रेम था। उन्होंने गोपाल को उठाया और मुस्कुराकर कहा— “भक्त, तुम कैलाश नहीं आए… ...