विश्व तेली दिवस (Vishwa Teli Diwas या International Teli Day) मुख्य रूप से गणेश चतुर्थी के दिन ही मनाया जाता है। तेली (साहू) समाज इसे अपने गौरवशाली इतिहास, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर मनाता है।
विश्व तेली दिवस: गणेश चतुर्थी पर तेली-साहू समाज अपनी गौरवशाली परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का उत्सव मनाता है हर साल गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर तेली (साहू) समाज विश्व तेली दिवस या अंतर्राष्ट्रीय तेली दिवस मनाता है। यह दिन सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि समाज के गौरवशाली इतिहास, प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। पौराणिक कथा और उत्पत्ति पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने अपने दिव्य बल से बालक गणेश का निर्माण कर द्वारपाल बनाया। भगवान शिव के आने पर गणेश ने उन्हें रोक दिया, जिससे क्रोधित शिव ने उनका सिर काट दिया। माता पार्वती के विलाप पर शिव ने दक्षिण दिशा की ओर मुंह किए किसी प्राणी का सिर लगाने का आदेश दिया। संयोग से एक व्यापारी (साहू) का हाथी वहां बैठा था। उसी हाथी का सिर गणेश के धड़ पर लगाकर उन्हें पुनर्जीवित किया गया। हाथी की मृत्यु पर व्यापारी के दुख को देखकर भगवान शिव ने उसे मूसल और खरल (तेल निकालने का यंत्र) प्रदान किया और तिलहन से तेल निकालने की कला सिखाई। उसी व्यापारी को प्रथम तेली माना जाता है और वर्तमान तेली-साहू समाज उसे अपना पूर्वज मानता है। मूसल को शिव...