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प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने जारी किए प्रदर्शनों की कवरेज के लिए पत्रकारों के दिशानिर्देश

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राशन में समस्या हो तो चुप न रहें: Anna Sahayata से घर बैठे शिकायत दर्ज कराएं

 राशन में समस्या हो तो चुप न रहें: Anna Sahayata से घर बैठे शिकायत दर्ज कराएं नई दिल्ली। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन से जुड़ी किसी भी समस्या को अब चुपचाप सहने की जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने लाभार्थियों के लिए Anna Sahayata नामक सुविधा उपलब्ध कराई है, जिसके जरिए आसानी से शिकायत दर्ज की जा सकती है और समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि राशन कार्ड धारकों को मिलने वाले मुफ्त या सब्सिडी वाले अनाज में कोई गड़बड़ी, कम मात्रा, खराब गुणवत्ता, दुकान का समय पर न खुलना या अन्य कोई समस्या हो तो तुरंत आवाज उठाएं। लगभग 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को ध्यान में रखकर यह सेवा शुरू की गई है। शिकायत दर्ज करने के दो आसान तरीके: WhatsApp के जरिए नंबर 9868200445 पर मैसेज भेजकर शिकायत दर्ज करें। बस “Hi” या “नमस्ते” लिखकर भेजें। चैटबॉट भाषा चुनने का विकल्प देगा (हिंदी, अंग्रेजी सहित कई क्षेत्रीय भाषाएं उपलब्ध)। इसके बाद राशन कार्ड नंबर और समस्या का विवरण देकर शिकायत दर्ज हो जाए...

जिल्हा परिषद, ठाणे सर्वकष प्राथमिक आरोग्य सेवा प्रशिक्षण कार्यक्रमांतर्गत दाभाड येथे आरोग्य कर्मचाऱ्यांना प्रशिक्षण प्राथमिक आरोग्य सेवा अधिक सक्षम, गुणवत्तापूर्ण व लोककेंद्रित करण्यासाठी प्रशिक्षणावर भर

  जिल्हा परिषद, ठाणे सर्वकष प्राथमिक आरोग्य सेवा प्रशिक्षण कार्यक्रमांतर्गत दाभाड येथे आरोग्य कर्मचाऱ्यांना प्रशिक्षण प्राथमिक आरोग्य सेवा अधिक सक्षम, गुणवत्तापूर्ण व लोककेंद्रित करण्यासाठी प्रशिक्षणावर भर ठाणे, दि. १५ ऑक्टोबर, २०२६ (जिल्हा परिषद, ठाणे) : महाराष्ट्र शासनाच्या सार्वजनिक आरोग्य विभागामार्फत राबविण्यात येत असलेल्या ‘सर्वकष प्राथमिक आरोग्य सेवा’ (Comprehensive Primary Health Care – CPHC) प्रशिक्षण कार्यक्रमांतर्गत प्राथमिक आरोग्य केंद्र, दाभाड, तालुका भिवंडी, जिल्हा ठाणे येथे आरोग्य विभागातील अधिकारी व कर्मचाऱ्यांसाठी प्रशिक्षण सत्र आयोजित करण्यात आले. ठाणे जिल्ह्यामध्ये हा प्रशिक्षण कार्यक्रम मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री. रणजीत यादव यांच्या मार्गदर्शनाखाली राबविण्यात येत असून, या कार्यक्रमाचे तांत्रिक पर्यवेक्षण जिल्हा आरोग्य अधिकारी डॉ. गंगाधर परगे करत आहेत. या प्रशिक्षणामध्ये आरोग्य सेवक, आरोग्य सेविका, समुदाय आरोग्य अधिकारी आणि आशा स्वयंसेविका यांनी बहुसंख्येने सहभाग घेतला. प्राथमिक आरोग्य सेवा अधिक प्रभावीपणे, गुणवत्तापूर्ण आणि नागरिककेंद्रित पद्धतीने उपलब्ध करून ...

शासकीय कार्यालय में वीडियो बनाना हमेशा अपराध नहीं होता; आधिकारिक गोप अधिनियम, १९२३ को समझें

शासकीय कार्यालय में वीडियो बनाना हमेशा अपराध नहीं होता; आधिकारिक गोप अधिनियम, १९२३ को समझें नागरिकों में अक्सर भ्रम रहता है कि सरकारी कार्यालय में वीडियो रिकॉर्डिंग करने से सीधे आधिकारिक गोप अधिनियम के तहत अपराध हो जाता है या नहीं? इस बारे में कानून की स्पष्ट जानकारी होना जरूरी है। आधिकारिक गोप अधिनियम, १९२३ (Official Secrets Act, 1923) राष्ट्रीय सुरक्षा और गोपनीय जानकारी की रक्षा के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। इस कानून के अनुसार प्रतिबंधित स्थानों की जानकारी प्राप्त करना, फोटोग्राफी या वीडियो रिकॉर्डिंग करना, गोपनीय जानकारी इकट्ठा करना या उसे अनधिकृत व्यक्ति तक पहुंचाना — ये कार्य कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में अपराध हो सकते हैं। हालांकि, यह महत्वपूर्ण बात ध्यान रखें – हर शासकीय कार्यालय में वीडियो बनाने मात्र से अपने आप आधिकारिक गोप अधिनियम का अपराध नहीं होता। संबंधित जगह का स्वरूप (क्या वह प्रतिबंधित क्षेत्र है), रिकॉर्डिंग का उद्देश्य, रिकॉर्ड की गई जानकारी गोपनीय है या नहीं, और कानून की कौन-सी धाराएं लागू होती हैं — इन सभी बातों पर विचार करना पड़ता है। नागरिकों को क्या ध्य...

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: चारागाह-खलिहान जैसी सार्वजनिक भूमि पर भूमिधरी अधिकार नहीं दे सकते SDO/SDM

 सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: चारागाह-खलिहान जैसी सार्वजनिक भूमि पर भूमिधरी अधिकार नहीं दे सकते SDO/SDM नई दिल्ली / लखनऊ। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 21 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट कर दिया है कि उपजिलाधिकारी (SDO) या उप-जिला मजिस्ट्रेट को चारागाह, खलिहान या अन्य सार्वजनिक उपयोग की भूमि की श्रेणी बदलकर निजी व्यक्तियों को भूमिधरी अधिकार देने का कोई अधिकार नहीं है। मामला बाबू सिंह बनाम चकबंदी अधिकारी एवं अन्य (2026 INSC 395) का है। सिविल अपील संख्या 4633/2026 में न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ ने अपील खारिज करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। क्या था मामला? उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की एक भूमि राजस्व अभिलेखों में श्रेणी-6 (सार्वजनिक उपयोग की भूमि) में दर्ज थी। वर्ष 1379 फसली के अभिलेखों में यह खलिहान और चारागाह के रूप में दर्ज थी। 31 अक्टूबर 1992 को SDO ने भूमि को श्रेणी-5 (कृषि योग्य भूमि) में बदल दिया और संबंधित व्यक्तियों को पट्टे जारी कर दिए। बाद में चकबंदी कार्यवाही के दौरान पता चला कि भूमि मूल रूप से सार्वज...

भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका पाणी पुरवठा विभाग दि.१४/१०/२०२६

भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका  पाणी पुरवठा विभाग भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका भिवंडी पाणी पुरवठा विभाग  दि.१४/१०/२०२६ दिनांक ०५/१०/२०२६ रोजी सकाळी ११:४५ वाजेचा सुमारस मौजे-नारपोली, ७२ गाला रोड, भंडारी कंपाऊंड, भिवंडी येथे श्री. शशीशेखर जयस्वाल यांचेकडे चौकशी केली असता त्यांचेकडे कोणताही अधिकृत परवाना मिळून आला नाही. तसेच त्यांनी मागील ०५ वर्षापूर्वी अर्धा इंच व्यासाचे ०१ नळ कनेक्शन घेतल्याचे सांगितले. त्यांनी मनपाची कोणतीही पूर्व परवागनी न घेता महानगरपालिकेच्या मुख्य जलवाहिनीला छिद्र पाडून अर्धा इंच व्यासाची ०१ नळ अनाधिकृत जोडणी घेऊन त्याचा वापर भोजनालय (भिशी) करिता (व्यापारी) करीत असल्यामुळे महानगरपालिकेच्या पाण्याची चोरी अर्धा इंच प्रती व्यापारी कनेक्शन रु.१२,०००/- प्रमाणे ५ वर्षाचे (रु.१२,०००/-x ५ वर्षाचे) = रु.६०,०००/-,  खड्डा पावती रु.१,४००/-,  अनामत रक्कम रु.२००/-  पाण्याची चोरी रु.६०,०००/- असे एकूण *रु.१,२१,६००/- (अक्षरी रु एक लाख एकवीस हजार सहाशे रु. मात्र*) नुकसान झाल्याने श्री. शशीशेखर जयस्वाल यांचे विरोधात नारपोली पोलिस स्टेशन येथे भारतीय न्याय...

लोकायुक्तांकडे तक्रार दफ्तरी दाखल; नागरिकांना कागदपत्रांची संधी नाकारल्याचा प्रश्न

 लोकायुक्तांकडे तक्रार दफ्तरी दाखल; नागरिकांना कागदपत्रांची संधी नाकारल्याचा प्रश्न चिपळूण – महाराष्ट्रातील चिपळूण तहसीलदार कार्यालयातील वातानुकूलन यंत्राबाबत सार्वजनिक निधीच्या वापरासंबंधी एका नागरिकाने लोकायुक्तांकडे तक्रार केली होती. मात्र, दिनांक ०७ ऑक्टोबर २०२६ रोजीच्या पत्राद्वारे संबंधित शासन आदेश, शासन निर्णय किंवा परिपत्रकाची प्रत तक्रारीसोबत जोडलेली नसल्याचे कारण देत ही तक्रार चौकशीस पात्र नसल्याचे सांगून दफ्तरी दाखल करण्यात आली आहे. तक्रारदाराने या निर्णयावर प्रश्नचिन्ह उपस्थित केले आहे. त्यांच्या म्हणण्यानुसार, एखाद्या नागरिकाकडून तक्रार करताना काही दस्तऐवजाची प्रत जोडण्यात त्रुटी राहिली असेल, तर ती प्रत मागवून किंवा त्रुटी दूर करण्याची संधी देऊन प्रकरणाची चौकशी करता आली नसती का? आवश्यक कागदपत्रे सादर करण्याची संधी न देता तक्रारच दफ्तरी दाखल करणे, हा सामान्य नागरिकाला न्याय मिळवून देण्याचा योग्य मार्ग आहे का, असा प्रश्न त्यांनी उपस्थित केला आहे. तक्रारदाराचे म्हणणे आहे की, आज राज्यात दुष्काळसदृश परिस्थिती, शेतकऱ्यांच्या अडचणी, शाळा व रुग्णालयांतील सुविधांची गरज आणि पोषण...