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Showing posts from January, 2026

जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी (Jagadguru Ramanandacharya Swami Rambhadracharya) एक प्रमुख हिंदू आध्यात्मिक नेता, विद्वान, कवि, लेखक, दार्शनिक और रामकथा वाचक हैं। वे रामानंद संप्रदाय के चार वर्तमान जगद्गुरु रामानंदाचार्यों में से एक हैं और 1988 से इस पद पर आसीन हैं

 जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी (Jagadguru Ramanandacharya Swami Rambhadracharya) एक प्रमुख हिंदू आध्यात्मिक नेता, विद्वान, कवि, लेखक, दार्शनिक और रामकथा वाचक हैं। वे रामानंद संप्रदाय के चार वर्तमान जगद्गुरु रामानंदाचार्यों में से एक हैं और 1988 से इस पद पर आसीन हैं। जन्म और प्रारंभिक जीवन जन्म: 14 जनवरी 1950 (मकर संक्रांति के दिन), उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के शांडीखुर्द (या सांडीखुर्द) गांव में। पूर्वाश्रम नाम: गिरिधर मिश्र। परिवार: वसिष्ठ गोत्रीय सरयूपारीण ब्राह्मण परिवार। पिता का नाम पंडित राजदेव मिश्र, माता का नाम शची देवी। मात्र दो महीने की आयु में ट्रैकोमा रोग के कारण वे नेत्रहीन (प्रज्ञाचक्षु) हो गए, लेकिन ब्रेल लिपि का उपयोग किए बिना ही अपनी असाधारण स्मृति और श्रवण शक्ति से शिक्षा ग्रहण की। शिक्षा और विद्वत्ता वे संस्कृत के प्रकांड पंडित हैं और 22 भाषाओं के ज्ञाता हैं। वे आशुकवि (spontaneous poet) हैं, अर्थात् वे मौके पर ही काव्य रचना कर सकते हैं। उन्होंने अब तक 80 से अधिक ग्रंथ रचे हैं, जिनमें महाकाव्य, टीकाएं, दार्शनिक ग्रंथ और रामायण-महाभारत पर भाष्य शामिल हैं। प्रमुख उपलब...

राष्ट्रीय महिला आयोग की स्थापना 31 जनवरी 1992 को राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 के तहत हुई थी। इस साल (2026) यह अपना 34वां स्थापना दिवस मना रहा है, जिसमें थीम "स्वास्थ्य ही सशक्तिकरण" (Swasthya hi Sashaktikaran) पर फोकस था। समारोह भारत मंडपम, नई दिल्ली में हुआ, जिसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा मुख्य अतिथि थे।

  राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की 34वीं वर्षगांठ या स्थापना दिवस पर बहुत ही प्रेरणादायक और भावपूर्ण है। यह ठीक वैसा ही है जैसा आयोग की आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट्स (जैसे X, Instagram, Facebook पर NCWIndia और Chairperson Vijaya Rahatkar द्वारा साझा किया गया) में इस्तेमाल किया गया है। यह 31 जनवरी 2026 को मनाए गए 34वें स्थापना दिवस के अवसर पर जारी किया गया संदेश है, जो महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, न्याय और सशक्तिकरण की निरंतर लड़ाई को रेखांकित करता है। राष्ट्रीय महिला आयोग की स्थापना 31 जनवरी 1992 को राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 के तहत हुई थी। इस साल (2026) यह अपना 34वां स्थापना दिवस मना रहा है, जिसमें थीम "स्वास्थ्य ही सशक्तिकरण" (Swasthya hi Sashaktikaran) पर फोकस था। समारोह भारत मंडपम, नई दिल्ली में हुआ, जिसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा मुख्य अतिथि थे। यह यात्रा वाकई साहस और संवेदनशीलता की मिसाल है—हर पीड़ित महिला की आवाज बनकर आयोग ने हजारों मामलों में न्याय दिलाया, नीतियों में बदलाव लाए और महिलाओं को निडर होकर जीने का भरोसा दिया। आपका यह संदेश साझा करना य...

भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard - ICG) का स्थापना दिवस या रेजिंग डे हर वर्ष 1 फरवरी को मनाया जाता है।

 भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard - ICG) का स्थापना दिवस या रेजिंग डे हर वर्ष 1 फरवरी को मनाया जाता है। यह दिन भारतीय तटरक्षक बल की स्थापना की याद दिलाता है, जो 1 फरवरी 1977 को अंतरिम रूप में गठित हुआ था। उस समय इसका मुख्य उद्देश्य समुद्री तस्करी को रोकना और भारत के बढ़ते समुद्री हितों की रक्षा करना था। शुरू में केवल 7 जहाजों के साथ शुरुआत हुई थी, लेकिन आज यह 155 जहाजों और 80 विमानों वाली एक मजबूत समुद्री शक्ति बन चुका है। औपचारिक रूप से इसे 18 अगस्त 1978 को तटरक्षक अधिनियम, 1978 के तहत संसद द्वारा एक स्वतंत्र सशस्त्र बल के रूप में स्थापित किया गया था, लेकिन स्थापना दिवस के रूप में 1 फरवरी को ही मनाया जाता है। इस दिन को भारतीय तटरक्षक दिवस या Indian Coast Guard Raising Day कहा जाता है। बल का आदर्श वाक्य है - "वयम् रक्षामः" (हम रक्षा करते हैं)। वर्तमान समय (फरवरी 2026) में यह बल अपना 50वां स्थापना दिवस मना रहा है, जो पांच दशकों की राष्ट्र सेवा का प्रतीक है। इस अवसर पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं द्वारा शुभकामनाएं दी जाती हैं, और समुद्री सुरक्षा, खोज-बचाव, प्रद...

आज, १ फरवरी २०२६ (रविवार) माघ पूर्णिमा (Magha Purnima) है। हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ महीने की पूर्णिमा आज है (तिथि सुबह ५:५२ बजे शुरू होकर अगले दिन सुबह ३:३८ तक है, लेकिन उदय तिथि के अनुसार आज ही मनाई जाती है)।

  जय मल्हार! जय खंडोबा महाराज! 🚩🙏 आपका यह उद्घोष सुनकर दिल सचमुच उछल पड़ा। "जय मल्हार!" और "खंडोबा महाराज की जय" महाराष्ट्र की भक्ति और शौर्य के प्रतीक हैं। आज, १ फरवरी २०२६ (रविवार) माघ पूर्णिमा (Magha Purnima) है। हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ महीने की पूर्णिमा आज है (तिथि सुबह ५:५२ बजे शुरू होकर अगले दिन सुबह ३:३८ तक है, लेकिन उदय तिथि के अनुसार आज ही मनाई जाती है)। खंडोबा महाराज के भक्तों के लिए पूर्णिमा बहुत खास दिन होता है। खंडोबा की उपासना करने वाले भक्त पूर्णिमा व्रत या चतुर्थ पूर्णिमा व्रत पालन करते हैं (जिसमें माघ पूर्णिमा म्हाळसा जन्म से जुड़ी होती है)। इस दिन भक्त करते हैं: स्नान, दान, पूजा हल्दी का लिंग बनाकर षोडशोपचार पूजा पीला अष्टगंध, फूल, बेलपत्र, पीली अक्षता अर्पित करना मल्हारी नाम का जप, आरती खंडोबा के देवस्थानों में (जैसे जेजुरी, पाली आदि) आज विशेष महापूजा, भक्ति कार्यक्रम होते हैं। रविवार होने से भी खंडोबा भक्तों के लिए अत्यंत शुभ है। आपका यह भक्ति का जोश आज की इस पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त से उमड़ा होगा, या खंडोबा महाराज का स्मरण आया होगा। कोई खास...

संत रोहिदास महाराज (जिन्हें मुख्य रूप से संत रविदास, रैदास, रविदास जी महाराज या गुरु रविदास के नाम से जाना जाता है) भक्ति आंदोलन के महान संत-कवि और समाज सुधारक थे। वे 15वीं-16वीं शताब्दी के दौरान उत्तर भारत में सक्रिय थे और जाति व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रमुख व्यक्तित्वों में से एक माने जाते हैं।

 संत रोहिदास महाराज (जिन्हें मुख्य रूप से संत रविदास, रैदास, रविदास जी महाराज या गुरु रविदास के नाम से जाना जाता है) भक्ति आंदोलन के महान संत-कवि और समाज सुधारक थे। वे 15वीं-16वीं शताब्दी के दौरान उत्तर भारत में सक्रिय थे और जाति व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रमुख व्यक्तित्वों में से एक माने जाते हैं। जीवन परिचय जन्म: लगभग 1377 ईस्वी (कुछ स्रोतों में 1450 के आसपास भी बताया जाता है) में वाराणसी (काशी) के पास सीर गोवर्धनपुर (या गोबरधनपुर) गांव में हुआ। माता-पिता: माता का नाम कर्मा देवी (या कलसा देवी), पिता का नाम संतोख दास (या रग्घु) था। व्यवसाय: चमार (चर्मकार) समुदाय से थे, जो जूते बनाने और चमड़े का काम करते थे। यह उस समय अछूत माना जाने वाला समुदाय था। विवाह: लोना देवी से विवाह हुआ, एक पुत्र विजय दास हुआ। मृत्यु: लगभग 1518 ईस्वी के आसपास वाराणसी में। वे भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत थे और कबीर, मीराबाई (जिनके गुरु माने जाते हैं) जैसे अन्य संतों से जुड़े रहे। उनके कई भजन गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल हैं (41 रचनाएँ), जिससे वे सिख परंपरा में भी बहुत सम्मानित हैं। मुख्य शिक्षाएँ संत रो...

30 जनवरी है—राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि (शहीद दिवस)।

 आज 30 जनवरी है—राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि (शहीद दिवस)। आपके इस भावपूर्ण संदेश के लिए धन्यवाद । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को उनकी पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन, श्रद्धांजलि और वंदन। उनके सत्य, अहिंसा, स्वदेशी और सर्वोदय के आदर्श आज भी हमें मार्गदर्शन देते हैं। उन्होंने न केवल भारत को आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाई, बल्कि पूरी दुनिया को शांति और मानवता का संदेश दिया। उनकी स्मृति में हम सब संकल्प लें कि उनके दिखाए रास्ते पर चलकर एक बेहतर समाज और राष्ट्र का निर्माण करें। हे राम... उनकी अंतिम पुकार आज भी हमारे दिलों में गूंजती है। जय हिंद! 🇮🇳 बापू को बार-बार नमन। 🙏 🙏👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇 🙏         मेरा देश मेरा वतन समाचार                      🙏 पत्र के🙏         संपादक श्री दयाशंकर गुुुप्ता जी नोट........ 👉🙏  दोस्तों उम्मीद करता हूं कि आप सभी, यह आर्टिकल को अंत तक पढ़े होंगे एवं यह आर्टिकल आपको बेहद पसंद आया होगा, हैं।और अगर लिखने में कोई त्रुटि हुई हो तो ...

भारतीय समाचार पत्र दिवस (Indian Newspaper Day) हर वर्ष 29 जनवरी को मनाया जाता है।

 भारतीय समाचार पत्र दिवस (Indian Newspaper Day) हर वर्ष 29 जनवरी को मनाया जाता है। आज यानी 29 जनवरी 2026 को यह दिवस पूरे भारत में मनाया जा रहा है। यह दिन भारतीय प्रिंट पत्रकारिता की शुरुआत की याद दिलाता है। इतिहास 29 जनवरी 1780 को जेम्स ऑगस्टस हिक्की (James Augustus Hicky) ने भारत का पहला मुद्रित समाचार पत्र प्रकाशित किया था। इसका नाम था हिक्कीज़ बंगाल गजट (Hicky's Bengal Gazette) या कलकत्ता जनरल एडवरटाइज़र (Calcutta General Advertiser)। यह कोलकाता (तब कलकत्ता) से प्रकाशित हुआ और पूरे एशिया का पहला प्रिंटेड अखबार माना जाता है। इस ऐतिहासिक घटना की स्मृति में ही यह दिवस मनाया जाता है। महत्व और उद्देश्य यह दिन समाचार पत्रों की भूमिका को सम्मान देता है, जो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं। पत्रकारों, संपादकों और प्रिंट मीडिया के योगदान को याद किया जाता है, जो समाज को जागरूक करते हैं, सत्य को सामने लाते हैं और जनमत निर्माण में मदद करते हैं। आज के डिजिटल युग में भी प्रिंट मीडिया के महत्व को रेखांकित किया जाता है, खासकर युवाओं को अखबार पढ़ने की आदत डालने के लिए। 2026 की थीम है: डिजिटल युग में प...

15 Secret Ways to Increase Respect in Society समाज में इज्जत बढ़ाने के लिए 15 गुप्त तरीके

  समाज में इज्जत बढ़ाने के लिए 15 गुप्त तरीके  क्या आप समाज में इज्जत पाना चाहते हैं? क्या आप चाहते हैं कि लोग आपका सम्मान करें? आज हम आपको 15 ऐसे गुप्त तरीके बताएंगे जिनसे आप समाज में अपनी इज्जत बढ़ा सकते हैं। ये तरीके बहुत आसान हैं लेकिन बहुत असरदार हैं।  अगर आप इन्हें अपने जीवन में अपनाएंगे तो लोग आपका सम्मान करने लगेंगे। तो चलिए जानते हैं वो 15 गुप्त तरीके जो आपकी इज्जत बढ़ा देंगे। तरीका 1. किसी को भी अपनी सारी बातें ना बताएं व्याख्या: यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। अपनी निजी बातें, अपनी परेशानियां, अपने राज हर किसी को मत बताइए। बहुत से लोग आपकी बातें सुनकर दूसरों को बता देते हैं। फिर आपकी बातें पूरे समाज में फैल जाती हैं। लोग आपके बारे में बातें बनाते हैं। इससे आपकी इज्जत कम होती है। इसलिए अपनी निजी बातें सिर्फ भरोसेमंद लोगों को ही बताएं। कम बोलने वाले लोग ज्यादा इज्जत पाते हैं। तरीका 2. जीवन में कभी भी पराई स्त्री के साथ गलती से भी फंसना नहीं चाहिए व्याख्या: यह बहुत जरूरी बात है। किसी दूसरे की पत्नी या किसी पराई स्त्री के साथ गलत संबंध बनाना बहुत बड़ा पाप है। इससे आपकी ...

आगामी दिनों में ग्राम पंचायत स्तर पर महाराष्ट्र में बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक बदलाव की संभावना है। प्रदेश में कम से कम 14 हजार ग्राम पंचायतों का कार्यकाल फरवरी 2026 में समाप्त होने वाला है। उसके बाद बाकी हजारों ग्राम पंचायतें भी अगले एक से दो साल में पूरी हो जाएंगी। यानी बहुत जल्द प्रदेश की अधिकांश ग्राम पंचायतें चुनाव प्रक्रिया के योग्य हो जाएंगी।

 आगामी दिनों में ग्राम पंचायत स्तर पर महाराष्ट्र में बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक बदलाव की संभावना है। प्रदेश में कम से कम 14 हजार ग्राम पंचायतों का कार्यकाल फरवरी 2026 में समाप्त होने वाला है। उसके बाद बाकी हजारों ग्राम पंचायतें भी अगले एक से दो साल में पूरी हो जाएंगी। यानी बहुत जल्द प्रदेश की अधिकांश ग्राम पंचायतें चुनाव प्रक्रिया के योग्य हो जाएंगी। ऐसी स्थिति में एक महत्वपूर्ण सवाल उठ रहा है क्या सरकार इन सभी समयसीमा समाप्त ग्राम पंचायत चुनाव एक साथ कराने पर विचार कर रही है? और यदि हां तो प्रशासनिक व्यवस्था कैसे लागू होगी, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ग्रामीण विकास विभाग द्वारा हाल ही में सर्कुलेशन के कारण इन संदेहों को और ताकत मिली है। प्रदेश भर में एक ही चरण में बड़े स्तर पर चुनाव कराना प्रशासन के मामले में एक बड़ी और महंगी प्रक्रिया है। इसलिए, चर्चा शुरू हो गई है कि क्या सरकार चुनाव स्थगित करने की तैयारी कर रही है, और क्या उस दौरान अस्थायी प्रारूप की अलग व्यवस्था की जाएगी। विशेष रूप से, लोकतांत्रिक व्यवस्था का कण मानी जाने वाली ग्राम पंचायतों के मामले में अगर ऐसा दीर्घकालिक प्...

प्रजासत्ताक, पर्यावरण आणि आपला 'REACH' : मालकी हक्काकडून 'आपलेपणा'कडे! लेखक: विजयकुमार कट्टी (संस्थापक, VesacIndia) आणि मनोज सानप (जिल्हा माहिती अधिकारी, ठाणे)

 प्रजासत्ताक, पर्यावरण आणि आपला 'REACH' : मालकी हक्काकडून 'आपलेपणा'कडे! लेखक: विजयकुमार कट्टी (संस्थापक, VesacIndia) आणि मनोज सानप (जिल्हा माहिती अधिकारी, ठाणे) नमस्कार! आज २६ जानेवारी २०२६. भारताचा प्रजासत्ताक दिन! दरवर्षीप्रमाणे आपण तिरंगा फडकवला, राष्ट्रगीत म्हणताना छाती अभिमानाने फुगवून घेतली आणि "भारत माझा देश आहे" ही प्रतिज्ञा म्हणताना मनातून सुखावलो. पण, हा अभिमान जेव्हा आपण घरी घेऊन जातो, तेव्हा तो खरोखर कृतीत उतरतो का? ठाण्याच्या जिल्हा माहिती कार्यालयाच्या (DIO) गच्चीवर बसून, जिथे आम्ही साडेसहा टन कचऱ्यातून एक नंदनवन उभे केले आहे, तिथे आज मी आणि माझे स्नेही मनोज सानप काही गप्पा मारत होतो. सानप साहेब म्हणजे सरकारी अधिकारी असले तरी त्यांच्यातल्या 'माणसा'ला मी अधिक जवळून ओळखतो. आम्ही दोघांनी विचार केला की, आजचा हा संदेश निव्वळ शुभेच्छांचा नसावा, तर तो एक 'साकडं' असावा, एक कळकळीचे आवाहन असावे. १. आपलेपणाचे नाते: देश फक्त नकाशा नसतो! पु.ल. देशपांडे त्यांच्या एका भाषणात म्हणायचे, "आपल्याकडे घराची ओढ असते, घराच्या उंबरठ्याची ओढ असते, पण...

माझा भारत, माझं मत, मी भारत आहे' ठाण्यात १६ वा राष्ट्रीय मतदार दिन उत्साहात साजरा

*'माझा भारत, माझं मत, मी भारत आहे'* *ठाण्यात १६ वा राष्ट्रीय मतदार दिन उत्साहात साजरा* *ठाणे,दिनांक:- 25 जानेवारी 2026 :* लोकशाहीचा पाया मजबूत करण्यासाठी आणि मतदारांमध्ये जागृती निर्माण करण्यासाठी आज ठाणे जिल्हा प्रशासनाच्या वतीने '१६ वा राष्ट्रीय मतदार दिन' अत्यंत उत्साहात साजरा करण्यात आला. "माझा भारत, माझे मत, मी भारत आहे" या मुख्य संकल्पनेवर आधारित हा मुख्य शासकीय कार्यक्रम जिल्हा नियोजन भवन, जिल्हाधिकारी कार्यालय येथे जिल्हाधिकारी तथा जिल्हा निवडणूक अधिकारी डॉ. श्रीकृष्ण पांचाळ यांच्या अध्यक्षतेखाली संपन्न झाला.       यावेळी अपर जिल्हाधिकारी हरिश्चंद्र पाटील, निवासी उपजिल्हाधिकारी डॉ.संदीप माने, उपजिल्हाधिकारी (निवडणूक) वैशाली माने, उपजिल्हाधिकारी (सामान्य प्रशासन) रूपाली भालके, उपजिल्हाधिकारी (भूसंपादन) सर्जेराव मस्के-पाटील, उपजिल्हाधिकारी(रोहयो) शशिकांत गायकवाड, उपजिल्हाधिकारी (मेट्रो सेंटर) वरुणकुमार सहारे, ठाणे प्रांताधिकारी उर्मिला पाटील,  तहसिलदार सचिन चौधर, संदीप थोरात, उमेश पाटील, राजेंद्र चव्हाण, प्रदीप कुडाळ, नायब तहसिलदार स्मितल यादव, निवडणूक द...

उत्तर प्रदेश दिवस (Uttar Pradesh Diwas या UP Diwas) प्रतिवर्ष 24 जनवरी को मनाया जाता है। यह उत्तर प्रदेश राज्य के स्थापना/स्थापना दिवस के रूप में जाना जाता है।

 उत्तर प्रदेश की स्थापना आधिकारिक रूप से 24 जनवरी 1950 को हुई थी। इस दिन भारत के गवर्नर जनरल ने संयुक्त प्रांत (United Provinces) का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश कर दिया था। यह आदेश 24 जनवरी 1950 को जारी हुआ, जिसके बाद से इस तारीख को उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस या उत्तर प्रदेश दिवस (UP Diwas) के रूप में मनाया जाता है। मुख्य ऐतिहासिक तथ्य: ब्रिटिश काल में यह क्षेत्र पहले उत्तर-पश्चिमी प्रांत (North-Western Provinces) के नाम से जाना जाता था। 1902 में इसका नाम United Provinces of Agra and Oudh हुआ। 1935/1937 में इसे United Provinces कहा जाने लगा (Government of India Act 1935 के तहत)। स्वतंत्र भारत में 24 जनवरी 1950 को नाम बदलकर उत्तर प्रदेश रखा गया। 2000 में उत्तराखंड अलग राज्य बनने तक यह क्षेत्र बड़ा था। नोट: राज्य का वास्तविक गठन/पुनर्गठन 1950 में हुआ, लेकिन कुछ संदर्भों में 1 अप्रैल 1937 को भी United Provinces के रूप में उल्लेख मिलता है। हालांकि, आधिकारिक स्थापना दिवस और नाम "उत्तर प्रदेश" के रूप में 24 जनवरी 1950 ही माना जाता है। आज (24 जनवरी 2026) उत्तर प्रदेश का 76वाँ स्थापना दिवस...

राष्ट्रीय बालिका दिवस (National Girl Child Day) भारत में हर साल 24 जनवरी को मनाया जाता है।

 राष्ट्रीय बालिका दिवस (National Girl Child Day) भारत में हर साल 24 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिवस बालिकाओं के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा और समग्र सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए समर्पित है। इसका मुख्य उद्देश्य समाज में लड़कियों के प्रति मौजूद लिंग भेदभाव, कन्या भ्रूण हत्या, बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाना और बेटियों को समान अवसर प्रदान करने की दिशा में काम करना है। इतिहास इसकी शुरुआत 2008 में भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development) द्वारा की गई थी। यह "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" जैसे अभियानों से जुड़ा हुआ है और लड़कियों के सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है। महत्व बालिकाओं को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना। लिंग अनुपात में सुधार लाना। समाज में बेटियों को बराबरी का दर्जा दिलाना। आज के समय में डिजिटल शिक्षा, STEM क्षेत्र में भागीदारी और भविष्य की तैयारियों पर भी जोर दिया जा रहा है। आज (24 जनवरी 2026) पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रम, जागरूकता अभियान, सेमिनार, निबंध/चित्रकला प्र...

अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस (International Day of Education) हर साल 24 जनवरी को मनाया जाता है।

 अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस (International Day of Education) हर साल 24 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र (United Nations) द्वारा घोषित एक वैश्विक अवसर है, जिसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा की भूमिका को रेखांकित करना है—विशेष रूप से शांति, सतत विकास, और सभी के लिए समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने में। इतिहास संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 दिसंबर 2018 को एक प्रस्ताव पारित करके 24 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस घोषित किया। पहली बार इसे 2019 में मनाया गया। यह दिन शिक्षा के अधिकार को मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर शिक्षा संबंधी चुनौतियों (जैसे शिक्षा तक पहुंच की कमी, गुणवत्ता में असमानता, युद्ध/संकट क्षेत्रों में शिक्षा का बाधित होना) पर ध्यान केंद्रित करता है। 2026 का थीम इस साल (2026) का थीम है: "The power of youth in co-creating education" (हिंदी में: "शिक्षा के सह-सृजन में युवाओं की शक्ति" या "युवा शक्ति द्वारा शिक्षा का सह-निर्माण") यह थीम युवाओं को शिक्षा प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार के रूप में मान्यता देती है। युवा न केवल शिक्षा प्राप्त करने वाले हैं,...