Skip to main content

Posts

Showing posts from January, 2026

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने एआई प्रमाणपत्र प्रदान किए; समावेशी और भविष्य के लिए तैयार एआई इकोसिस्टम का आह्वान किया

 राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने एआई प्रमाणपत्र प्रदान किए; समावेशी और भविष्य के लिए तैयार एआई इकोसिस्टम का आह्वान किया दिल्ली.....  राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में विद्यार्थियों और सांसदों सहित शिक्षार्थियों को एसओएआर (एआई तत्परता के लिए कौशल विकास) प्रमाणपत्र प्रदान किए और '#SkillTheNation Challenge' की घोषणा करते हुए डिजिटल रूप से कुशल, भविष्य के लिए तैयार और समावेशी राष्ट्र के निर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। इस अवसर पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के पीएम श्री स्कूलों, केंद्रीय विद्यालयों और जवाहर नवोदय विद्यालयों के 17 चयनित छात्रों के साथ-साथ देश भर के 15 सांसदों को एआई पाठ्यक्रम के प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। यह गति आगामी इंडियाएआई शिखर सम्मेलन में सार्थक रूप से आगे बढ़ेगी, जहां वैश्विक एआई भविष्य को आकार देने के लिए भारत के विजन, तैयारी और सामूहिक संकल्प को सशक्त रूप से व्यक्त किया जाएगा। राष्ट्रपति ने वर्चुअली ओडिशा के रायरांगपुर में इग्नू क्षेत्र...

प्रयागराज में माघ मेला 2026 आज 3 जनवरी 2026 से शुरू हो रहा है। यह पौष पूर्णिमा के पवित्र स्नान के साथ आरंभ होगा और 15 फरवरी 2026 (महाशिवरात्रि) तक चलेगा।

 प्रयागराज में माघ मेला 2026 आज 3 जनवरी 2026 से शुरू हो रहा है। यह पौष पूर्णिमा के पवित्र स्नान के साथ आरंभ होगा और 15 फरवरी 2026 (महाशिवरात्रि) तक चलेगा।  प्रमुख स्नान तिथियां (मुख्य पवित्र स्नान पर्व): 3 जनवरी 2026: पौष पूर्णिमा (प्रथम स्नान, मेला प्रारंभ और कल्पवास की शुरुआत) 14 जनवरी 2026: मकर संक्रांति (दूसरा मुख्य स्नान) 18 जनवरी 2026: मौनी अमावस्या (तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण मुख्य स्नान, सबसे अधिक भीड़) 23 जनवरी 2026: बसंत पंचमी (चौथा मुख्य स्नान) 1 फरवरी 2026: माघी पूर्णिमा (पांचवां मुख्य स्नान) 15 फरवरी 2026: महाशिवरात्रि (छठा और अंतिम स्नान, मेला समापन) यह मेला त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम) पर आयोजित होता है। लाखों श्रद्धालु यहां आस्था की डुबकी लगाते हैं, कल्पवास करते हैं और पुण्य प्राप्त करते हैं। माघ मास में संगम स्नान को विशेष पुण्यकारी माना जाता है। यदि आप जाने की योजना बना रहे हैं, तो मुख्य स्नान दिवसों पर विशेष सावधानी बरतें, क्योंकि भीड़ बहुत होती है। सुरक्षित यात्रा और आध्यात्मिक लाभ की शुभकामनाएं! 🙏  तीर्थराज प्रयागराज (पूर्व में...

सावित्रीबाई फुले (3 जनवरी 1831 – 10 मार्च 1897) भारत की पहली महिला शिक्षिका, समाज सुधारिका, कवयित्री और महिलाओं के अधिकारों की अग्रदूत थीं। वे अपने पति महात्मा ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर महिलाओं की शिक्षा, जाति व्यवस्था के खिलाफ और सामाजिक समानता के लिए जीवनभर संघर्ष करती रहीं। आज, 3 जनवरी को उनकी जयंती मनाई जाती है, जो बालिका शिक्षा दिवस के रूप में भी जानी जाती है

 सावित्रीबाई फुले (3 जनवरी 1831 – 10 मार्च 1897) भारत की पहली महिला शिक्षिका, समाज सुधारिका, कवयित्री और महिलाओं के अधिकारों की अग्रदूत थीं। वे अपने पति महात्मा ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर महिलाओं की शिक्षा, जाति व्यवस्था के खिलाफ और सामाजिक समानता के लिए जीवनभर संघर्ष करती रहीं। आज, 3 जनवरी को उनकी जयंती मनाई जाती है, जो बालिका शिक्षा दिवस के रूप में भी जानी जाती है। प्रारंभिक जीवन सावित्रीबाई का जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव गांव में माली समुदाय (जो उस समय हाशिए पर था) में हुआ था। उनके पिता खंडोजी नेवसे पाटिल और माता लक्ष्मीबाई थे। मात्र 9-10 वर्ष की आयु में उनका विवाह 13 वर्षीय ज्योतिराव फुले से हो गया। विवाह के समय वे निरक्षर थीं, लेकिन ज्योतिराव ने उन्हें घर पर पढ़ाना शुरू किया और बाद में पुणे व अहमदनगर में शिक्षक प्रशिक्षण दिलाया। प्रमुख योगदान महिला शिक्षा की शुरुआत: 1848 में पुणे के भिड़ेवाड़ा में ज्योतिराव और सावित्रीबाई ने भारत का पहला बालिका विद्यालय खोला। सावित्रीबाई स्वयं उसकी पहली शिक्षिका बनीं। इसके बाद उन्होंने 18 स्कूल खोले, जिनमें सभी जातियों और वर्गों ...

श्री पूर्णचन्द्र गुप्ता जी (जिन्हें अक्सर पुराण चन्द्र गुप्ता भी लिखा जाता है) दैनिक जागरण के संस्थापक थे। वे एक प्रमुख पत्रकार, प्रकाशक और स्वतंत्रता सेनानी थे।

 श्री पूर्णचन्द्र गुप्ता जी (जिन्हें अक्सर पुराण चन्द्र गुप्ता भी लिखा जाता है) दैनिक जागरण के संस्थापक थे। वे एक प्रमुख पत्रकार, प्रकाशक और स्वतंत्रता सेनानी थे। मुख्य जानकारी: जन्म: 2 जनवरी 1912 (कानपुर के निकट कालपी में)। मृत्यु: 16 सितंबर 1986। दैनिक जागरण की स्थापना: 1942 में झाँसी से शुरू किया गया, जब भारत छोड़ो आंदोलन चरम पर था। उद्देश्य था जनता की मुक्त आवाज को प्रतिबिंबित करना। शुरू में नाम "जागरण" था, 1947 में "दैनिक जागरण" हो गया और मुख्यालय कानपुर स्थानांतरित हुआ। पृष्ठभूमि: वे राष्ट्रवादी थे। 1940 में कानपुर में साप्ताहिक "स्वतंत्र" शुरू किया, जो ब्रिटिश प्रशासन ने बंद करवा दिया। इसके बाद दैनिक जागरण शुरू किया। योगदान: प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) के अध्यक्ष (1975) रहे और इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी के कार्यकारी सदस्य 15 वर्षों तक। दैनिक जागरण आज भारत का सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला हिंदी दैनिक है। सम्मान: 2012 में भारत सरकार ने उनकी स्मृति में डाक टिकट जारी किया। उनकी विरासत आज भी जागरण प्रकाशन लिमिटेड के माध्यम से जारी है, जो उनके परिवार द्वारा संच...