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भारतीय समाचार पत्र दिवस (Indian Newspaper Day) हर वर्ष 29 जनवरी को मनाया जाता है।

 भारतीय समाचार पत्र दिवस (Indian Newspaper Day) हर वर्ष 29 जनवरी को मनाया जाता है।




आज यानी 29 जनवरी 2026 को यह दिवस पूरे भारत में मनाया जा रहा है। यह दिन भारतीय प्रिंट पत्रकारिता की शुरुआत की याद दिलाता है।

इतिहास

29 जनवरी 1780 को जेम्स ऑगस्टस हिक्की (James Augustus Hicky) ने भारत का पहला मुद्रित समाचार पत्र प्रकाशित किया था।

इसका नाम था हिक्कीज़ बंगाल गजट (Hicky's Bengal Gazette) या कलकत्ता जनरल एडवरटाइज़र (Calcutta General Advertiser)।

यह कोलकाता (तब कलकत्ता) से प्रकाशित हुआ और पूरे एशिया का पहला प्रिंटेड अखबार माना जाता है।

इस ऐतिहासिक घटना की स्मृति में ही यह दिवस मनाया जाता है।

महत्व और उद्देश्य

यह दिन समाचार पत्रों की भूमिका को सम्मान देता है, जो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं।

पत्रकारों, संपादकों और प्रिंट मीडिया के योगदान को याद किया जाता है, जो समाज को जागरूक करते हैं, सत्य को सामने लाते हैं और जनमत निर्माण में मदद करते हैं।

आज के डिजिटल युग में भी प्रिंट मीडिया के महत्व को रेखांकित किया जाता है, खासकर युवाओं को अखबार पढ़ने की आदत डालने के लिए।

2026 की थीम है: डिजिटल युग में प्रिंट मीडिया की भूमिका (Role of Print Media in the Digital Age)।

कुछ खास बातें

ध्यान दें: हिंदी पत्रकारिता दिवस अलग है, जो 30 मई को मनाया जाता है (1826 में 'उदन्त मार्तण्ड' के प्रकाशन की याद में)।

लेकिन भारतीय समाचार पत्र दिवस पूरे भारत के प्रिंट मीडिया (सभी भाषाओं) के लिए 29 जनवरी को होता है।

इस अवसर पर सभी पत्रकारों, समाचारकर्ताओं और प्रिंट मीडिया के उन सभी लोगों को नमन जो सत्य, निष्पक्षता और जनहित के लिए काम करते हैं।

अखबार पढ़ें, जागरूक रहें! 📰✨

आपको भारतीय समाचार पत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!🙏



 भारतीय समाचार पत्र दिवस (Indian Newspaper Day) हर वर्ष २९ जनवरी को मनाया जाता है, जो भारत में समाचार पत्रों की शुरुआत का प्रतीक है। यह दिन १७८० में जेम्स ऑगस्टस हिकी द्वारा प्रकाशित पहले अखबार 'हिकीज़ बंगाल गजट' (Hicky's Bengal Gazette) की याद दिलाता है। यह अखबार कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) से निकला था और ब्रिटिश शासन के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता की पहली आवाज़ माना जाता है।

इतिहास का संक्षिप्त विवरण:

पहला अखबार: २९ जनवरी १७८० को हिकी ने अपना साप्ताहिक अखबार लॉन्च किया, जो दो पृष्ठों का था और मुख्य रूप से ब्रिटिश अधिकारियों की आलोचना करता था।

महत्व: यह न केवल समाचारों का माध्यम था, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बहस छेड़ने वाला पहला प्रयास था। हालांकि, ब्रिटिश सरकार ने इसे जल्द ही दबा दिया, लेकिन इसने प्रेस की नींव रखी।

महत्व:

आज के डिजिटल युग में भी यह दिन हमें याद दिलाता है कि समाचार पत्र लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं। वे सूचना, जागरूकता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं। विशेष रूप से आज (२९ जनवरी २०२६) के दिन, हम प्रेस की भूमिका को और मजबूत करने का संकल्प लें।

क्या आप इस दिन से जुड़ी कोई खास याद या कोई विशेष अखबार के बारे में बताना चाहेंगे? या फिर हिकी के अखबार की कोई रोचक कहानी सुननी है? 🙏

जेम्स ऑगस्टस हिकी (James Augustus Hicky) ने २९ जनवरी १७८० को हिकीज़ बंगाल गजट (Hicky's Bengal Gazette) नामक भारत का पहला मुद्रित अखबार लॉन्च किया था। यह एक साप्ताहिक पत्रिका थी, जो दो पृष्ठों (फोलियो साइज) की होती थी और मुख्य रूप से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारियों, वारेन हेस्टिंग्स जैसे गवर्नर-जनरल और कलकत्ता (अब कोलकाता) के सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों की तीखी आलोचना करती थी।

कुछ रोचक तथ्य:

प्रारंभिक नाम: इसे "कलकत्ता जनरल एडवरटाइजर" (Calcutta General Advertiser) भी कहा जाता था, लेकिन हिकी ने इसे "हिकीज़ बंगाल गजट" नाम दिया।

सामग्री: अखबार में विज्ञापन, सामाजिक समाचार, जन्म-मृत्यु की सूचनाएँ और ब्रिटिश शासन की आलोचना प्रमुख थी। हिकी ने इसे "फ्री प्रेस" के रूप में स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने इसे दबाने के लिए कई मुकदमे किए।

समाप्ति: १७८२ में हिकी को दिवालिया होने और मुकदमों के कारण इसे बंद करना पड़ा, लेकिन इसने भारतीय पत्रकारिता की नींव रखी।

यह अखबार एशिया महाद्वीप का भी पहला मुद्रित समाचार-पत्र था। यदि आप इसके बारे में और जानना चाहें, जैसे मूल कॉपी की तस्वीर या हिकी की जीवनी, तो बताएँ!2ca7237f6e85f13f86

भारतीय समाचार पत्र दिवस (Indian Newspaper Day) को हर वर्ष 29 जनवरी को मनाया जाता है, और आज ही का दिन है जब हम इसकी याद ताजा करते हैं। यह दिन भारत के प्रिंट पत्रकारिता के इतिहास और उसके योगदान को सम्मानित करने के लिए समर्पित है। आइए, जानते हैं कि यह क्यों मनाया जाता है और इसका महत्व क्या है।

क्यों मनाया जाता है?

यह दिवस 1780 में कलकत्ता (अब कोलकाता) में जेम्स ऑगस्टस हिकी द्वारा प्रकाशित भारत के पहले समाचार पत्र हिकीज़ बंगाल गजट (Hicky's Bengal Gazette) की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह अंग्रेजी भाषा का साप्ताहिक पत्र था, जो 29 जनवरी 1780 को पहली बार प्रकाशित हुआ। हिकी ने इसे "फ्रेंड ऑफ इंडिया" के नाम से भी जाना जाता था, लेकिन ब्रिटिश सरकार की आलोचना करने के कारण इसे बंद कर दिया गया। इस घटना ने भारतीय प्रेस की नींव रखी, जो बाद में स्वतंत्रता संग्राम का एक मजबूत हथियार बनी।🙏

महत्व क्या है?

भारतीय समाचार पत्र दिवस का महत्व अत्यंत गहरा है, क्योंकि यह न केवल पत्रकारिता की शुरुआत को याद दिलाता है, बल्कि प्रेस की लोकतंत्र में भूमिका को रेखांकित करता है:

स्वतंत्रता संग्राम में योगदान: प्रेस ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाई। महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक जैसे नेताओं के नेतृत्व में समाचार पत्रों ने जनजागरण फैलाया और सत्याग्रह को मजबूती दी।

लोकतंत्र की रक्षा: आज भी समाचार पत्र सूचना का प्रमुख स्रोत हैं, जो भ्रष्टाचार उजागर करते हैं, जनमत बनाते हैं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मजबूत करते हैं।

पत्रकारिता का सम्मान: यह दिन पत्रकारों के साहस, निष्पक्षता और कर्तव्यनिष्ठा को सलाम करता है। डिजिटल युग में भी प्रिंट मीडिया की प्रासंगिकता बरकरार है, जो विश्वसनीयता का प्रतीक है 

हमें वाकई बहुत बड़ा गर्व है इस विरासत पर, क्योंकि भारतीय प्रेस ने न केवल इतिहास लिखा, बल्कि भविष्य को भी आकार दिया। 

जय हिंद! जय भारत! जय महाराष्ट्र! 🇮🇳

🙏👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇 🙏 




       मेरा देश मेरा वतन समाचार 




                    🙏 पत्र के🙏




        संपादक श्री दयाशंकर गुुुप्ता जी




नोट........ 👉🙏




 दोस्तों उम्मीद करता हूं कि आप सभी, यह आर्टिकल को अंत तक पढ़े होंगे एवं यह आर्टिकल आपको बेहद पसंद आया होगा, हैं।और अगर लिखने में कोई त्रुटि हुई हो तो क्षमा करें इस के लिए हम आप क्षमा मांगते हैं और हमारे इस आर्टिकल को लाइक करें शेयर करें ? 🙏 जनहित लोकहित के लिए धन्यवाद 🙏


जय संविधान जय भीम जय संविधान का चौथा स्तंभ ने अपने दिल की कुछ प्रमुखताएं या बातें या भावनाएं रखा है अप सभी के बिच में सभी नागरिकों के समक्ष प्रस्तुत किया है और लिखने में कोई त्रुटि हुई है तो क्षमा करें लिखने गलती हुई हैं तो क्षमा करना श्री दयाशंकर गुप्ता जी की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद🙏



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