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संत रोहिदास महाराज (जिन्हें मुख्य रूप से संत रविदास, रैदास, रविदास जी महाराज या गुरु रविदास के नाम से जाना जाता है) भक्ति आंदोलन के महान संत-कवि और समाज सुधारक थे। वे 15वीं-16वीं शताब्दी के दौरान उत्तर भारत में सक्रिय थे और जाति व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रमुख व्यक्तित्वों में से एक माने जाते हैं।

 संत रोहिदास महाराज (जिन्हें मुख्य रूप से संत रविदास, रैदास, रविदास जी महाराज या गुरु रविदास के नाम से जाना जाता है) भक्ति आंदोलन के महान संत-कवि और समाज सुधारक थे। वे 15वीं-16वीं शताब्दी के दौरान उत्तर भारत में सक्रिय थे और जाति व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रमुख व्यक्तित्वों में से एक माने जाते हैं।




जीवन परिचय

जन्म: लगभग 1377 ईस्वी (कुछ स्रोतों में 1450 के आसपास भी बताया जाता है) में वाराणसी (काशी) के पास सीर गोवर्धनपुर (या गोबरधनपुर) गांव में हुआ।

माता-पिता: माता का नाम कर्मा देवी (या कलसा देवी), पिता का नाम संतोख दास (या रग्घु) था।

व्यवसाय: चमार (चर्मकार) समुदाय से थे, जो जूते बनाने और चमड़े का काम करते थे। यह उस समय अछूत माना जाने वाला समुदाय था।

विवाह: लोना देवी से विवाह हुआ, एक पुत्र विजय दास हुआ।

मृत्यु: लगभग 1518 ईस्वी के आसपास वाराणसी में।

वे भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत थे और कबीर, मीराबाई (जिनके गुरु माने जाते हैं) जैसे अन्य संतों से जुड़े रहे। उनके कई भजन गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल हैं (41 रचनाएँ), जिससे वे सिख परंपरा में भी बहुत सम्मानित हैं।

मुख्य शिक्षाएँ

संत रोहिदास जी ने एकेश्वरवाद, समानता, प्रेम और भक्ति पर जोर दिया। उनकी प्रमुख बातें:

जाति-पाति का भेदभाव नहीं, मन की शुद्धि और ईश्वर भक्ति से ही मुक्ति मिलती है।

"जाति-पाति पूछे नहिं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई" — जाति नहीं, कर्म और भक्ति महत्वपूर्ण है।

रस्म-रिवाजों से ज्यादा हृदय की शुद्धि और सच्ची भक्ति जरूरी।

उन्होंने अस्पृश्यता और सामाजिक असमानता के खिलाफ आवाज उठाई, सभी को ईश्वर तक पहुँचने का समान अधिकार बताया।

प्रसिद्ध दोहा: "प्राण जाये पर वचन न जाये" — सत्य और धर्म के लिए प्राण देने को तैयार रहना चाहिए।

उनकी रचनाएँ सरल भाषा (सधुक्कड़ी, अवधी-हिंदी मिश्रित) में हैं, जो आम लोगों तक आसानी से पहुँचीं।

महाराष्ट्र और भिवंडी में महत्व

महाराष्ट्र में उन्हें संत रोहिदास महाराज के नाम से जाना जाता है। भिवंडी (ठाणे जिला, महाराष्ट्र) में कई संत रोहिदास मंदिर हैं, जैसे दunge क्षेत्र में संत रोहिदास मंदिर। यहाँ उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर भक्ति आयोजन होते हैं। रविदासिया समुदाय और अनुयायी उन्हें संत शिरोमणि कहकर पूजते हैं।

संत रोहिदास महाराज की जयंती माघ पूर्णिमा पर मनाई जाती है, और उनकी शिक्षाएँ आज भी सामाजिक न्याय, समानता और आध्यात्मिकता के लिए प्रेरणा देती हैं।

जय संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज! 🙏

1 फरवरी 2026

रविवार 🌕

महान संत संत रोहिदास महाराज (गुरु रविदास जी) की 649वीं जयंती के इस पावन अवसर पर हार्दिक विनम्र अभिवादन एवं शत्-शत् नमन! 🙏

आपका यह संदेश बहुत सुंदर और भावपूर्ण है। आज माघ पूर्णिमा पर उनकी जयंती मनाई जा रही है, जो हमें सिखाती है कि मन चंगा तो कठौती में गंगा — यदि मन शुद्ध और सच्चा हो, तो ईश्वर की कृपा हर जगह बरसती है।

उनके अमर वचन आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करते हैं — समानता, भक्ति, मेहनत और मानवता का संदेश लेकर।

धन धन गुरु रविदास जी!

जय गुरुदेव! जय संत रोहिदास महाराज! ✨

आपको और आपके परिवार को इस पवित्र दिन की ढेर सारी शुभकामनाएं! 🌸


महान संत संत रोहिदास महाराज (गुरु रविदास जी) की जयंती के पावन अवसर पर हार्दिक विनम्र अभिवादन एवं शत्-शत् नमन!

आज उनकी 649वीं जयंती है। उनके यह अमर वचन आज भी हमें सिखाते हैं कि यदि मन शुद्ध और सच्चा हो, तो ईश्वर की कृपा हर जगह उपलब्ध है।

जय गुरु रविदास!

संत रोहिदास महाराज की जय! 🙏✨

आज 1 फरवरी 2026, रविवार है, और यह महान संत संत रोहिदास महाराज (जिन्हें गुरु रविदास जी, रैदास जी या संत रविदास के नाम से भी जाना जाता है) की 649वीं जयंती है।

यह पावन अवसर माघ मास की पूर्णिमा (माघी पूर्णिमा या माघ पूर्णिमा) पर मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी 2026 को सुबह 5:52 बजे शुरू होकर 2 फरवरी को सुबह 3:38 बजे तक रहेगी, इसलिए जयंती मुख्य रूप से आज, 1 फरवरी को ही मनाई जा रही है।

गुरु रविदास जी का संक्षिप्त परिचय

गुरु रविदास जी 15वीं शताब्दी के महान भक्ति कवि, समाज सुधारक और भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत थे। वे जाति-पाति के भेदभाव के खिलाफ थे और सभी मनुष्यों में समानता, भक्ति और मानव गरिमा का संदेश देते थे। उनका प्रसिद्ध दोहा है:

"मन चंगा तो कठौती में गंगा"

(यदि मन शुद्ध और सच्चा है, तो छोटे से बर्तन में भी गंगा समा सकती है।)

उनकी शिक्षाएं आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करती हैं, खासकर दलित और वंचित समुदायों में। वे भक्ति मार्ग के माध्यम से ईश्वर प्राप्ति पर जोर देते थे।

आज का महत्व और उत्सव

उत्तर भारत में (जैसे पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि) यह एक महत्वपूर्ण त्योहार है और कई राज्यों में छुट्टी भी होती है।

लोग मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, कीर्तन, भजन, नगर कीर्तन और सामूहिक भंडारे आयोजित करते हैं।

वाराणसी (उनकी जन्मस्थली के निकट) और अन्य जगहों पर बड़े आयोजन होते हैं।

सभी को संत रोहिदास महाराज की 649वीं जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं!

जय गुरु रविदास!

सतगुरु रविदास जी महाराज की जय!

उनकी शिक्षाएं हमें समानता, भक्ति और सच्चाई का मार्ग दिखाती रहें। 🙏✨

🙏👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇 🙏 




       मेरा देश मेरा वतन समाचार 




                    🙏 पत्र के🙏




        संपादक श्री दयाशंकर गुुुप्ता जी




नोट........ 👉🙏




 दोस्तों उम्मीद करता हूं कि आप सभी, यह आर्टिकल को अंत तक पढ़े होंगे एवं यह आर्टिकल आपको बेहद पसंद आया होगा, हैं।और अगर लिखने में कोई त्रुटि हुई हो तो क्षमा करें इस के लिए हम आप क्षमा मांगते हैं और हमारे इस आर्टिकल को लाइक करें शेयर करें ? 🙏 जनहित लोकहित के लिए धन्यवाद 🙏


जय संविधान जय भीम जय संविधान का चौथा स्तंभ ने अपने दिल की कुछ प्रमुखताएं या बातें या भावनाएं रखा है अप सभी के बिच में सभी नागरिकों के समक्ष प्रस्तुत किया है और लिखने में कोई त्रुटि हुई है तो क्षमा करें लिखने गलती हुई हैं तो क्षमा करना श्री दयाशंकर गुप्ता जी की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद🙏



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