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स्कूल छोड़ने के बाद भी ‘एजुकेशन ऑफिसर्स’ (EO) के पास LC/जनरल रजिस्टर ठीक करने का अधिकार है! माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा और सुकून देने वाला फैसला!

 स्कूल छोड़ने के बाद भी ‘एजुकेशन ऑफिसर्स’ (EO) के पास LC/जनरल रजिस्टर ठीक करने का अधिकार है! माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा और सुकून देने वाला फैसला!



स्कूल छोड़ने या पढ़ाई पूरी करने के बाद, बहुत से लोग स्कूल सर्टिफिकेट (लीविंग सर्टिफिकेट/जनरल रजिस्टर) पर जन्मतिथि, अपना नाम, पिता का नाम या सरनेम में गलती ठीक करवाने के लिए एजुकेशन डिपार्टमेंट जाते हैं। लेकिन एप्लीकेशन यह कहकर रिजेक्ट कर दी जाती है कि “स्टूडेंट ने स्कूल छोड़ दिया है, इसलिए अब बदलाव नहीं किया जा सकता”।

इस पर माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच (रिट पिटीशन नंबर 8739/2026 – सैयद सुहाना मुबीन बनाम महाराष्ट्र सरकार, फैसले की तारीख: 04/08/2026) ने बहुत ही अहम फैसला सुनाया है और सभी मामलों को साफ किया है।
🔹 फैसले में अहम बातें और डिटेल में जानकारी:
* 1) ठीक करने का अधिकार किसे है? (एजुकेशन ऑफिसर):
* लीगल रेफरेंस: इस जजमेंट के पैराग्राफ 1, 5 और 8 के अनुसार, एजुकेशन ऑफिसर (EO) के पास स्कूल छोड़ने के बाद जनरल रजिस्टर या सर्टिफिकेट में करेक्शन करने का अधिकार है।
* प्रोसीजर: स्कूल के हेडमास्टर (HM) के पास खुद से ऐसे बदलाव करने का अधिकार नहीं है। हेडमास्टर को ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स के साथ प्रपोज़ल तैयार करना होगा और फाइनल अप्रूवल के लिए एजुकेशन ऑफिसर (EO) को भेजना होगा। एजुकेशन ऑफिसर के लिखित ऑर्डर के बाद ही स्कूल रजिस्टर में एंट्री की जाती है।
* 2) स्कूल छोड़ने के आधार पर एप्लीकेशन रिजेक्ट नहीं की जा सकती:
कोर्ट ने साफ किया कि एजुकेशन ऑफिसर सिर्फ इस टेक्निकल आधार पर करेक्शन के लिए एप्लीकेशन रिजेक्ट नहीं कर सकता कि संबंधित स्टूडेंट अब उस स्कूल में नहीं पढ़ रहा है या उसने स्कूल छोड़ दिया है। * 3) स्टूडेंट का इंसानी और साफ़ गलतियों को सुधारने का अधिकार:
'जनाबाई हिम्मतराव ठाकुर बनाम महाराष्ट्र सरकार' (AIR OnLine 2019 बॉम्बे 1055) में हाई कोर्ट की फुल बेंच के ऐतिहासिक फैसले पर भरोसा करते हुए, कोर्ट ने साफ़ किया कि स्टूडेंट को S.S. कोड के रूल 26.3 के अनुसार साफ़ इंसानी या क्लर्क की गलतियों को सुधारने का अधिकार है।
* 4) क्या यह फैसला सभी पर लागू होता है?
हाँ। भले ही यह आदेश एक खास पिटीशन पर दिया गया था, लेकिन इसमें हाई कोर्ट की फुल बेंच का ज़िक्र किया गया है। इसलिए, यह फैसला भविष्य में ऐसे सभी मामलों के लिए एक मज़बूत कानूनी मिसाल बन जाता है।
* 5) लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना ​​की कार्रवाई:
कोर्ट ने सख्त चेतावनी दी है कि अगर एजुकेशन डिपार्टमेंट के अधिकारी बार-बार साफ़ आदेशों के बावजूद स्टूडेंट्स के एप्लीकेशन रिजेक्ट करते हैं, तो उनके खिलाफ 'कन्टेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट' के तहत सीधी डिसिप्लिनरी कार्रवाई की जाएगी। 📢 इस ज़रूरी कानूनी आदेश और जानकारी को टीचर्स, पेरेंट्स और ज़रूरतमंद स्टूडेंट्स के साथ ज़रूर शेयर करें!🪶🙏

school chhodne ke baad bhi 'education officers' (EO) ke paas LC/janaral register theek karne ka adhikar hota hai! mananiya bombay high court ka bada aur boring faisla!

skul chhodne ya padhai puri karne ke bad, bahut se log apne school certificate (leving sartificate/janaral register) par janmatithi, nam, pita ka naam ya sarnem theek karvane ke liye education department jaate han. lekin application yah kahkar reject kar di jaati hai ki “student ne school chhod diya hai, isliye koi badlav nahin kiya ja sakta”.

is par mananiya bombay high court ki aurangabad bench ne (ret petition number 8739/2026 – saiyad suhana mubeen banaam maharashtra sarkar, faisle ki taarikh: 04/08/2026) bahut zaruri faisla sunaya hai aur sabhi case khatm kar diye han.

🔹 faisle mein zaruri baatein aur detailed jankari:

* 1) theek karne ka adhikar kise hai? (education officer):

* legal referance: is judgement ke paragraph 1, 5 aur 8 ke mutabik, education officer (EO) ko school chhodne ke baad general register ke certificate mein correction karne ka adhikar hai.

* procger: school ke headmaster (HM) ko khud aise badlav karne ka adhikar nahin hai. headmaster ko zaruri documents ke saath proposal taiyar karke final approval ke liye education officer (EO) ko bhejna hota hai. education officer ke likhit order ke baad school register mein entry ki jaati hai.

* 2) school chhodne ke aadhar par application reject nahin ki ja sakti:

kort ne saaf kiya ki education officer sirf is technical ground par correction ke liye application reject nahin kar sakta ki sambandhit student ab us school mein nahin padh raha hai ya usne school chhod diya hai. * 3) student ka insaani aur saaf galtiyon ko sudharne ka adhikar:

'janabai himmatrav thakur banaam maharashtra sarkar' (AIR OnLine 2019 bombay 1055) mein high court ki full bench ke aitihasik faisle par bharosa karte hue, court ne saaf kiya ki student S.S. code ke rule 26.3 ke mutabik, clerk ko clerk ki galtiyon ko sudharne ka adhikar hai.

* 4) kya yah faisla sabhi par lagu hota hai?

han, bhale hi yah order ek special petition par paas kiya gaya tha, lekin ise high court ki full bench ko bheja gaya tha. isliye, yah faisla bhavishya mein aise sabhi mamlon ke liye ek mazboot kanooni misaal ban jata hai.

* 5) laparwah adhikariyon ke khilaf court ki avmanna ​​ki karravai:

kort ne sakht chetavani di hai ki agar education department ke adhikari bar-bar saaf order ke bavjood students ke application reject karte han, to unke khilaf 'contempt off courts act' ke tahat sidhi disciplinary karvai ki jaegi. 📢 is zaruri kanooni aadesh aur jankari ko zaruratmand teachar, parents aur students ke saath zaroor share karen!🪶🙏🏻

शाळा सोडल्यानंतरही LC / जनरल रजिस्टर दुरुस्तीचे अधिकार 'शिक्षणाधिकाऱ्यांना' (EO)! मा. मुंबई उच्च न्यायालयाचा मोठा व दिलासादायक निकाल!

शाळा सोडल्यानंतर किंवा शिक्षण पूर्ण झाल्यावर शाळेच्या दाखल्यावर (Leaving Certificate / General Register) जन्मतारीख, स्वतःचे नाव, वडिलांचे नाव किंवा आडनावात झालेली चूक दुरुस्त करण्यासाठी अनेकजण शिक्षण विभागाकडे जातात. परंतु "विद्यार्थ्याने शाळा सोडली आहे, त्यामुळे आता बदल करता येणार नाही" असे कारण पुढे करून अर्ज फेटाळले जातात.

यावर मा. मुंबई उच्च न्यायालयाच्या औरंगाबाद खंडपीठाने (Writ Petition No. 8739 of 2026 – सैय्यद सुहाना मुबीन विरुद्ध महाराष्ट्र शासन, निकाल दिनांक: ०४/०८/२०२६) अत्यंत महत्त्वाचा निकाल दिला असून सर्व बाबी स्पष्ट केल्या आहेत.

🔹 निकालातील महत्त्वाचे मुद्दे व सविस्तर स्पष्टीकरण:

 * १) दुरुस्तीचे अधिकार कोणाकडे आहेत? (शिक्षणाधिकारी / Education Officer):

   * कायदेशीर संदर्भ: या निकालातील परिच्छेद १, ५ आणि ८ नुसार, शाळा सोडल्यानंतर जनरल रजिस्टर किंवा दाखल्यात दुरुस्ती करण्याचे अधिकृत अधिकार शिक्षणाधिकारी (Education Officer - EO) यांनाच आहेत.

   * प्रक्रिया: शाळा मुख्याध्यापकांना (HM) स्वतःहून परस्पर असे बदल करण्याचे अधिकार नसतात. मुख्याध्यापकांमार्फत रीतसर आवश्यक कागदपत्रांसह प्रस्ताव तयार करून तो अंतिम मंजुरीसाठी शिक्षणाधिकाऱ्यांकडे (EO) पाठवावा लागतो. शिक्षणाधिकाऱ्यांच्या लेखी आदेशानंतरच शाळेच्या रजिस्टरमध्ये नोंद घेतली जाते.

 * २) शाळा सोडली म्हणून अर्ज फेटाळता येणार नाही:

   न्यायालयाने स्पष्ट केले की, संबंधित विद्यार्थी आता त्या शाळेत शिकत नाही किंवा त्याने शाळा सोडली आहे, केवळ या एका तांत्रिक कारणास्तव शिक्षणाधिकारी दुरुस्तीचा अर्ज फेटाळू शकत नाहीत.

 * ३) मानवी व उघड चुका दुरुस्त करणे हा विद्यार्थ्याचा अधिकार:

   उच्च न्यायालयाच्या पूर्ण पीठाच्या (Full Bench) 'जनाबाई हिंमतराव ठाकूर विरुद्ध महाराष्ट्र शासन' (AIR OnLine 2019 Bombay 1055) या ऐतिहासिक निकालाचा आधार देत कोर्टाने स्पष्ट केले की, एस.एस. कोडच्या (S.S. Code) नियम २६.३ नुसार स्पष्ट दिसणाऱ्या मानवी किंवा कारकुनी चुका (Obvious Mistakes) सुधारण्याचा हक्क विद्यार्थ्याला आहे.

 * ४) हा निकाल सर्वांना लागू आहे का?

   होय. जरी हा आदेश एका विशिष्ट याचिकेवर झाला असला, तरी यामध्ये उच्च न्यायालयाच्या पूर्ण पीठाचा (Full Bench) दाखला देण्यात आला आहे. त्यामुळे भविष्यात अशाच प्रकारच्या सर्व प्रकरणांसाठी हा निकाल एक भक्कम कायदेशीर आधार (Legal Precedent) ठरतो.

 * ५) दुर्लक्ष करणाऱ्या अधिकाऱ्यांवर 'कोर्टाचा अवमान' (Contempt of Court) कारवाई:

   वारंवार स्पष्ट आदेश असूनही जर शिक्षण विभागाचे अधिकारी नियम डावलून विद्यार्थ्यांचे अर्ज फेटाळत असतील, तर त्यांच्यावर 'न्यायालयाचा अवमान कायदा' (Contempt of Courts Act) अंतर्गत थेट शिस्तभंगाची कारवाई केली जाईल, अशी सक्त ताकीद न्यायालयाने दिली आहे.

📢 हा महत्त्वाचा कायदेशीर आदेश आणि माहिती शिक्षक, पालक व गरजू विद्यार्थ्यांपर्यंत नक्की शेअर करा!🪶🙏🏻

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👉 संपादक एवं लेखक: समाज सेवक, RTI कार्यकर्ता👈

👉 श्री दयाशंकर गुप्ता जी👈 👉 नमस्कार चमत्कार 👈

👉 मेरा देश मेरा वतन समाचार 👈 👉 बुलंद आवाज न्यूज़ 👈

👉 दया की सोच👈 🙏जनहित के लिए🙏 नोट........ 👉👇🙏

 दोस्तों अप सभी पाठकों से उम्मीद करता हूं कि आप सभी ने यह आर्टिकल को अंत तक पढ़े होंगे एवं यह आर्टिकल आपको बेहद पसंद आया होगा हैं। 

संविधान का चौथा स्तंभ ने अपने दिल की कुछ प्रमुखताएं या बातें या भावनाएं रखा है अप सभी के बिच में सभी नागरिकों के समक्ष प्रस्तुत किया है और लिखने में कोई त्रुटि हुई हैं। 

तो क्षमा करें इस के लिए हम आप से क्षमा मांगते हैं। और हमारे इस आर्टिकल को लाइक करें शेयर करें? 🪶🙏 

🙏 संपादक व लेखक व अध्यक्ष व RTI आरटीआई कार्यकर्ता 

श्री दयाशंकर गुप्ता जी की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद🙏

🙏जय संविधान जय भीम जय, संविधान के चौथा स्तंभ की जय 🙏

जय हिंद 🇮🇳 जय भारत 🇮🇳 जय महाराष्ट्र 🙏 वंदे मातरम🙏

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