मुंबई उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण फैसला: स्कूल छोड़ने के बाद भी LC और जनरल रजिस्टर में सुधार संभव
शिक्षा अधिकारी (EO) के पास ही सुधार का अधिकार, मुख्याध्यापक खुद बदलाव नहीं कर सकते
औरंगाबाद | मुंबई उच्च न्यायालय के औरंगाबाद खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि स्कूल छोड़ने या शिक्षा पूरी होने के बाद भी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (Leaving Certificate) और जनरल रजिस्टर में जन्म तारीख, नाम, पिता का नाम या उपनाम जैसी साफ दिखने वाली गलतियों का सुधार किया जा सकता है। यह अधिकार शिक्षा अधिकारी (Education Officer – EO) के पास ही है।
यह आदेश Writ Petition No. 8739 of 2026 (सैय्यद सुहाना मुबीन बनाम महाराष्ट्र शासन) में 4 अगस्त 2026 को दिया गया।
फैसले की मुख्य बातें
सुधार का अधिकार किसके पास?
स्कूल छोड़ने के बाद भी जनरल रजिस्टर या सर्टिफिकेट में सुधार करने का अधिकार शिक्षा अधिकारी (EO) के पास है। मुख्याध्यापक (HM) खुद से कोई बदलाव नहीं कर सकते। जरूरी दस्तावेजों के साथ प्रस्ताव तैयार कर शिक्षा अधिकारी के पास भेजना होता है। शिक्षा अधिकारी के लिखित आदेश के बाद ही रजिस्टर में एंट्री की जाती है।
“स्कूल छोड़ दिया” कहकर अर्ज खारिज नहीं किया जा सकता
न्यायालय ने साफ कहा कि विद्यार्थी अब उस स्कूल में नहीं पढ़ता, सिर्फ इस तकनीकी कारण से सुधार का आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता।
साफ दिखने वाली मानवीय/लिपिकीय गलतियाँ सुधारी जा सकती हैं
उच्च न्यायालय के पूर्ण पीठ (Full Bench) के ऐतिहासिक फैसले जनाबाई हिंमतराव ठाकूर बनाम महाराष्ट्र शासन (AIR OnLine 2019 Bombay 1055) का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि एस.एस. कोड के नियम 26.3 के अनुसार स्पष्ट मानवीय या लिपिकीय गलतियाँ (Obvious Mistakes) सुधारना विद्यार्थी का अधिकार है।
यह फैसला मिसाल बनेगा
भले ही यह आदेश एक विशेष याचिका पर हुआ हो, लेकिन इसमें पूर्ण पीठ के फैसले का हवाला दिया गया है। इसलिए भविष्य में ऐसे सभी मामलों के लिए यह मजबूत कानूनी आधार (Legal Precedent) बनेगा।
अधिकारियों को सख्त चेतावनी
बार-बार स्पष्ट आदेश होने के बावजूद अगर शिक्षा विभाग के अधिकारी नियमों को दरकिनार कर अर्ज खारिज करते हैं, तो उन पर न्यायालय की अवमानना अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
क्या करें प्रभावित लोग?
जन्म तारीख, नाम, पिता का नाम या उपनाम में स्पष्ट गलती हो तो स्कूल के माध्यम से आवश्यक दस्तावेज लगाकर शिक्षा अधिकारी के पास प्रस्ताव भेजें।
सिर्फ “स्कूल छोड़ दिया” कहकर खारिज करने पर यह फैसला और जनाबाई ठाकूर का पूर्ण पीठ फैसला आधार बनाकर आगे बढ़ सकते हैं।
यह फैसला उन हजारों विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए राहत भरा है, जिन्हें स्कूल छोड़ने के बाद सर्टिफिकेट में छोटी-मोटी गलतियाँ सुधारने में परेशानी होती थी।
शिक्षकों, अभिभावकों और जरूरतमंद विद्यार्थियों तक यह जानकारी जरूर पहुँचाएँ।
🙏👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇🙏
👉 संपादक एवं लेखक: समाज सेवक, RTI कार्यकर्ता👈
👉 श्री दयाशंकर गुप्ता जी👈 👉 नमस्कार चमत्कार 👈
👉 मेरा देश मेरा वतन समाचार 👈 👉 बुलंद आवाज न्यूज़ 👈
👉 दया की सोच👈 नोट........ 👉👇🙏
दोस्तों अप सभी पाठकों से उम्मीद करता हूं कि आप सभी ने यह आर्टिकल को अंत तक पढ़े होंगे एवं यह आर्टिकल आपको बेहद पसंद आया होगा हैं।
संविधान का चौथा स्तंभ ने अपने दिल की कुछ प्रमुखताएं या बातें या भावनाएं रखा है अप सभी के बिच में सभी नागरिकों के समक्ष प्रस्तुत किया है और लिखने में कोई त्रुटि हुई हैं।
तो क्षमा करें इस के लिए हम आप से क्षमा मांगते हैं। और हमारे इस आर्टिकल को लाइक करें शेयर करें? 🪶🙏
🙏 संपादक व लेखक व अध्यक्ष व RTI आरटीआई कार्यकर्ता
श्री दयाशंकर गुप्ता जी की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद🙏
🙏जय संविधान जय भीम जय, संविधान के चौथा स्तंभ की जय 🙏
जय हिंद 🇮🇳 जय भारत 🇮🇳 जय महाराष्ट्र 🙏 वंदे मातरम🙏


Comments