महाराष्ट्र शासन का महत्वपूर्ण निर्णय: दिव्यांग बच्चों के लिए कुटुंब निवृत्तिवेतन में बड़ी राहत
मुंबई, २३ सप्टेंबर २०२६
महाराष्ट्र सरकार के वित्त विभाग ने २२ सप्टेंबर २०२६ को एक महत्वपूर्ण शासन निर्णय जारी किया है, जिससे दिव्यांग बच्चों वाले कुटुंब निवृत्तिवेतनधारकों को बड़ा दिलासा मिला है।
इस निर्णय के अनुसार, मनोविकृति या मानसिक दुर्बलता से ग्रस्त तथा शारीरिक अपंगता/विकलांगता वाले पुत्र या पुत्री के मामले में वैद्यकीय प्रमाणपत्र संबंधी शर्तों में सुधार किया गया है।
मुख्य बदलाव:
यदि संबंधित पुत्र/पुत्री स्थायी रूप से दिव्यांग है और यह वैद्यकीय प्रमाणपत्र से साबित हो जाता है, तो प्रमाणपत्र केवल एक बार जमा करना होगा।
यदि अपंगता अस्थायी है, तो हर ५ वर्ष में नया वैद्यकीय प्रमाणपत्र जमा करना आवश्यक होगा।
वैद्यकीय प्रमाणपत्र जिला शल्यचिकित्सक से कम रैंक के नहीं, बल्कि उनके बराबर या उससे ऊंचे स्तर के वैद्यकीय अधिकारी द्वारा जारी होना चाहिए।
यह निर्णय महाराष्ट्र सिविल सेवा (निवृत्तिवेतन) नियम, १९८२ में संबंधित प्रावधानों में संशोधन के अनुरूप लिया गया है।
यह निर्णय किन पर लागू होगा?
निवृत्तिवेतन योजना लागू मान्यता प्राप्त व अनुदानित शैक्षणिक संस्थानों
कृषि/गैर-कृषि विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध अशासकीय महाविद्यालयों के संबंधित निवृत्तिवेतनधारक/कुटुंब निवृत्तिवेतनधारक
महाराष्ट्र जिला परिषद व पंचायत समिति अधिनियम, १९६१ के अंतर्गत आने वाले संबंधित निवृत्तिवेतनधारक
शासन निर्णय तिथि: २२ सप्टेंबर २०२६
विभाग: महाराष्ट्र शासन – वित्त विभाग
यह राहत हजारों कुटुंब निवृत्तिवेतनधारकों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। संबंधित लोगों को इस निर्णय की जानकारी जरूर पहुंचाई जाए।🙏
🔥 मोठी आणि महत्त्वाची शासन निर्णय अपडेट! 🔥
♿ दिव्यांग व्यक्तींच्या कुटुंब निवृत्तीवेतनाबाबत मोठा दिलासा!
महाराष्ट्र शासनाच्या वित्त विभागाने दिनांक २२ सप्टेंबर २०२६ रोजी महत्त्वपूर्ण शासन निर्णय जारी केला आहे.
या निर्णयानुसार, मनोविकृतीने किंवा मानसिक दुर्बलतेने ग्रस्त तसेच शारीरिक अपंगत्व/विकलांगत्व असलेल्या मुलगा किंवा मुलीच्या बाबतीत वैद्यकीय प्रमाणपत्र सादर करण्याच्या अटीमध्ये सुधारणा करण्यात आली आहे.
📌 महत्त्वाचे बदल :
🔹 संबंधित मुलगा/मुलगी कायमस्वरूपी अपंग असल्याचे वैद्यकीय प्रमाणपत्राद्वारे सिद्ध झाल्यास, एकदाच प्रमाणपत्र सादर करता येणार आहे.
🔹 अपंगत्व तात्पुरते असल्यास दर ५ वर्षांनी वैद्यकीय प्रमाणपत्र सादर करण्याची तरतूद करण्यात आली आहे.
🔹 वैद्यकीय प्रमाणपत्र हे जिल्हा शल्यचिकित्सकांपेक्षा कमी दर्जाच्या नसलेल्या वैद्यकीय अधिकाऱ्याकडून असणे आवश्यक आहे.
🔹 हा निर्णय महाराष्ट्र नागरी सेवा (निवृत्तिवेतन) नियम, १९८२ मधील संबंधित तरतुदींमध्ये सुधारणा करण्याच्या अनुषंगाने घेण्यात आला आहे.
🔹 निवृत्तिवेतन योजना लागू असलेल्या मान्यता व अनुदानप्राप्त शैक्षणिक संस्था, कृषी/कृषीतर विद्यापीठे व त्यांच्याशी संलग्न अशासकीय महाविद्यालयांतील संबंधित निवृत्तिवेतनधारक/कुटुंब निवृत्तिवेतनधारकांनाही हा निर्णय लागू राहणार आहे.
🔹 तसेच महाराष्ट्र जिल्हा परिषद व पंचायत समिती अधिनियम, १९६१ अंतर्गत संबंधित निवृत्तिवेतनधारकांनाही हा निर्णय लागू राहणार आहे.
📜 शासन निर्णय : २२ सप्टेंबर २०२६
🏛️ महाराष्ट्र शासन – वित्त विभाग
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👉 संपादक एवं लेखक: समाज सेवक, RTI कार्यकर्ता👈
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🙏 संपादक व लेखक व अध्यक्ष व RTI आरटीआई कार्यकर्ता
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