महाराष्ट्र शासनाने ऐपत प्रमाणपत्राच्या वित्तीय मर्यादा वाढवल्या; विभागीय आयुक्तांचा नव्याने समावेश
मुंबई, १२ ऑक्टोबर २०२६: जमीन आणि स्थावर मालमत्तेच्या वाढत्या मूल्याचा विचार करून महाराष्ट्र शासनाने ऐपत प्रमाणपत्र (Solvency Certificate) देण्यासाठी विविध महसूल अधिकाऱ्यांच्या कमाल वित्तीय मर्यादेत मोठी वाढ केली आहे. तसेच विभागीय आयुक्तांचाही यात नव्याने समावेश करण्यात आला आहे.
महसूल विभागाने शासन निर्णय क्रमांक ऐपत-२०२६/प्र.क्र.१३८/आस्था-१ अन्वये ही सुधारणा जाहीर केली. ही सुधारित मर्यादा शासन निर्णय जारी झाल्याच्या दिनांकापासून लागू होईल. पूर्वीची मर्यादा २२ जून २००९ च्या शासन निर्णयानुसार होती.
सुधारित वित्तीय मर्यादा पुढीलप्रमाणे आहेत:
नायब तहसिलदार (तहसिलदारांचे अधिकार प्रदान केलेले): आता रु. ५ लाख पर्यंत (पूर्वी रु. २ लाख पर्यंत)
तहसिलदार: रु. ५ लाख १ ते रु. १० लाख पर्यंत (पूर्वी रु. २ लाख १ ते रु. ८ लाख)
उपविभागीय अधिकारी (महसूल): रु. १० लाख १ ते रु. ५० लाख पर्यंत (पूर्वी रु. ८ लाख १ ते रु. ४० लाख)
जिल्हाधिकारी: रु. ५० लाख १ ते रु. १ कोटी पर्यंत (पूर्वी रु. ४० लाखाहून अधिक सर्व)
विभागीय आयुक्त: रु. १ कोटीहून अधिक सर्व (नव्याने समाविष्ट)
महत्त्वाच्या अटी:
प्रमाणपत्रात ते कोणत्या कारणासाठी देण्यात येत आहे, हे स्पष्ट नमूद करावे.
अचल मालमत्तेच्या चालू वर्षातील मूल्यांकनाच्या जास्तीत जास्त ७५ टक्के पर्यंतच ऐपत प्रमाणपत्र द्यावे. वैधता कालावधी एक वर्षाचा असेल. दोन प्रती तयार करून एक अर्जदाराला आणि एक कार्यालयात ठेवावी.
सह-मालकांचे संमतीपत्र आवश्यक आहे. प्रत्येकाच्या हिश्याला अनुसरून एका मालमत्तेवर एका वर्षात फक्त एकच ऐपत प्रमाणपत्र जारी करता येईल.
हे निर्णय विधि व न्याय विभाग तसेच वित्त विभागाच्या सहमतीने घेण्यात आले आहे. शासन निर्णयाचा संगणक संकेतांक २०२६१०१२१७२६२७५४४८ असून तो महाराष्ट्र शासनाच्या अधिकृत संकेतस्थळावर उपलब्ध आहे.🙏
महाराष्ट्र शासन ने ऐपत प्रमाणपत्र (Solvency Certificate) की वित्तीय सीमा बढ़ाई; विभागीय आयुक्त भी अब शामिल
मुंबई, १२ अक्टूबर २०२६: जमीन और अचल संपत्ति के बढ़ते मूल्यों को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र शासन ने ऐपत प्रमाणपत्र जारी करने के लिए विभिन्न राजस्व अधिकारियों की अधिकतम वित्तीय सीमा में बड़ी बढ़ोतरी की है। साथ ही विभागीय आयुक्त को भी इसमें नए सिरे से शामिल किया गया है।
राजस्व विभाग ने शासन निर्णय क्रमांक ऐपत-२०२६/प्र.क्र.१३८/आस्था-१ के तहत यह संशोधन जारी किया है। यह संशोधित सीमा शासन निर्णय जारी होने की तारीख से लागू होगी। पहले की सीमा २२ जून २००९ के शासन निर्णय के अनुसार थी।
संशोधित वित्तीय सीमा इस प्रकार है:
नायब तहसीलदार (जिन्हें तहसीलदार के अधिकार दिए गए हैं): अब ₹५ लाख तक (पहले ₹२ लाख तक)
तहसीलदार: ₹५ लाख १ से ₹१० लाख तक (पहले ₹२ लाख १ से ₹८ लाख तक)
उपविभागीय अधिकारी (राजस्व): ₹१० लाख १ से ₹५० लाख तक (पहले ₹८ लाख १ से ₹४० लाख तक)
जिलाधिकारी: ₹५० लाख १ से ₹१ करोड़ तक (पहले ₹४० लाख से अधिक सभी)
विभागीय आयुक्त: ₹१ करोड़ से अधिक सभी (नए सिरे से शामिल)
महत्वपूर्ण शर्तें:
प्रमाणपत्र में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाए कि वह किस उद्देश्य के लिए जारी किया जा रहा है।
अचल संपत्ति के चालू वर्ष के मूल्यांकन के अधिकतम ७५ प्रतिशत तक ही ऐपत प्रमाणपत्र दिया जाए। वैधता अवधि एक वर्ष की होगी। दो प्रतियां बनाई जाएं — एक आवेदक को दी जाए और एक कार्यालय में रखी जाए।
सह-मालिकों का सहमति पत्र आवश्यक है। प्रत्येक के हिस्से के अनुसार एक संपत्ति पर एक वर्ष में केवल एक ही ऐपत प्रमाणपत्र जारी किया जा सकेगा।
यह निर्णय विधि एवं न्याय विभाग तथा वित्त विभाग की सहमति से लिया गया है। शासन निर्णय का कंप्यूटर संकेतांक २०२६१०१२१७२६२७५४४८ है और यह महाराष्ट्र शासन की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
🙏👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇🙏
“सूत्रों के अनुसार…”🪶🙏
👉 संपादक एवं लेखक: समाज सेवक, RTI कार्यकर्ता👈
👉 श्री दयाशंकर गुप्ता जी👈 👉 नमस्कार चमत्कार 👈
👉 मेरा देश मेरा वतन समाचार 👈 👉 बुलंद आवाज न्यूज़ 👈
👉 दया की सोच👈 🙏जनहित के लिए🙏 नोट........ 👉👇🙏
दोस्तों अप सभी पाठकों से उम्मीद करता हूं कि आप सभी ने यह आर्टिकल को अंत तक पढ़े होंगे एवं यह आर्टिकल आपको बेहद पसंद आया होगा हैं।
संविधान का चौथा स्तंभ ने अपने दिल की कुछ प्रमुखताएं या बातें या भावनाएं रखा है अप सभी के बिच में सभी नागरिकों के समक्ष प्रस्तुत किया है और लिखने में कोई त्रुटि हुई हैं।
तो क्षमा करें इस के लिए हम आप से क्षमा मांगते हैं। और हमारे इस आर्टिकल को लाइक करें शेयर करें? 🪶🙏
🙏 संपादक व लेखक व अध्यक्ष व RTI आरटीआई कार्यकर्ता
श्री दयाशंकर गुप्ता जी की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद🙏
🙏जय संविधान जय भीम जय, संविधान के चौथा स्तंभ की जय 🙏
जय हिंद 🇮🇳 जय भारत 🇮🇳 जय महाराष्ट्र 🙏 वंदे मातरम🙏



Comments