श्रावण पूर्णिमा पर यह पर्व भाई-बहन के पवित्र बंधन का प्रतीक है। बहनें राखी बाँधती हैं और भाई रक्षा का वचन देते हैं।
श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह लगभग 9:08 बजे शुरू होती है और 28 अगस्त को सुबह लगभग 9:48 बजे समाप्त होती है। भद्रा काल 27 अगस्त को रहता है, इसलिए राखी बांधने का शुभ समय 28 अगस्त की सुबह (उदया तिथि के अनुसार) माना जाता है।
रक्षाबंधन हिंदू धर्म (और जैन धर्म में भी) का एक प्रमुख पर्व है, जो श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसका अर्थ है “रक्षा का बंधन”। यह मुख्य रूप से भाई-बहन के पवित्र संबंध, स्नेह, विश्वास और रक्षा के वचन का प्रतीक है। बहन भाई की कलाई पर राखी (रक्षासूत्र) बांधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है।
धार्मिक और वैदिक मान्यताएं
वैदिक साहित्य में रक्षासूत्र का उल्लेख शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक सुरक्षा से जुड़ा है। अथर्ववेद में रक्षा सूत्र का वर्णन मिलता है।
प्राचीन काल में ब्राह्मण यजमानों, राजाओं या गुरु शिष्यों को रक्षासूत्र बांधते थे। यह केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं था; पत्नी-पति, गुरु-शिष्य आदि संबंधों में भी बांधा जाता था।
रक्षासूत्र बांधते समय प्रचलित मंत्र है:
“येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”
(अर्थात् जिस सूत्र से राजा बलि बंधे थे, उसी से मैं तुम्हें बांधता हूं। हे रक्षा, अडिग रहो।)
मान्यता है कि यह सूत्र नकारात्मक शक्तियों, बुरी नजर और संकटों से रक्षा करता है तथा सुख, आरोग्य, विजय और समृद्धि प्रदान करता है।
प्रमुख पौराणिक कथाएं
रक्षाबंधन से कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हैं:
इंद्र और इंद्राणी (भविष्य पुराण): देवासुर संग्राम में जब इंद्र हार रहे थे, तब उनकी पत्नी इंद्राणी (शची) ने मंत्रों से अभिमंत्रित रक्षासूत्र श्रावण पूर्णिमा को इंद्र की कलाई पर बांधा। इससे इंद्र को बल मिला और वे विजयी हुए। यह कथा रक्षा सूत्र की शक्ति को दर्शाती है।
श्रीकृष्ण और द्रौपदी (महाभारत संबंधी प्रचलित कथा): जब श्रीकृष्ण की उंगली कट गई (शिशुपाल वध या अन्य प्रसंग में), द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर बांध दिया। कृष्ण ने उन्हें बहन का दर्जा दिया और जीवनभर रक्षा का वचन दिया, जिसे उन्होंने चीरहरण के समय निभाया।
लक्ष्मी और राजा बलि: भगवान विष्णु राजा बलि के पास पाताल में रहने लगे थे। माता लक्ष्मी ने ब्राह्मण स्त्री का वेश धरकर बलि को राखी बांधी, उन्हें भाई माना और उपहार स्वरूप विष्णु को वैकुंठ वापस ले आईं।
यम और यमुना: यमुना ने भाई यमराज को राखी बांधी। यम ने उन्हें अमरता का वरदान दिया और प्रतिवर्ष मिलने का वचन दिया।
जैन धर्म में भी रक्षाबंधन मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन विष्णुकुमार मुनिराज ने 700 मुनियों की रक्षा की थी।
आध्यात्मिक महत्व
यह पर्व धर्म, कर्तव्य (रक्षा का दायित्व), शुद्ध प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। यह सिखाता है कि रिश्ते केवल रक्त संबंध तक सीमित नहीं, बल्कि सुरक्षा और मंगलकामना का भाव मुख्य है। आजकल यह व्यापक रूप में मनाया जाता है—मित्रों, सैनिकों या अन्य संबंधों में भी।
रक्षाबंधन केवल एक सामाजिक त्योहार नहीं, बल्कि वैदिक और पौराणिक परंपराओं से जुड़ा धार्मिक अनुष्ठान है, जो सुरक्षा, आशीर्वाद और संबंधों की पवित्रता का संदेश देता है।🙏
श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह लगभग 9:08 बजे शुरू होती है और 28 अगस्त को सुबह लगभग 9:48 बजे समाप्त होती है। भद्रा काल 27 अगस्त को रहता है, इसलिए राखी बांधने का शुभ समय 28 अगस्त की सुबह (उदया तिथि के अनुसार) माना जाता है।
राखी बांधने का मुख्य शुभ मुहूर्त (दिल्ली/सामान्य):
सुबह लगभग 5:57 बजे से 9:48 बजे तक।
रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🎉
आज शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन है।
श्रावण पूर्णिमा पर यह पर्व भाई-बहन के पवित्र बंधन का प्रतीक है। बहनें राखी बाँधती हैं और भाई रक्षा का वचन देते हैं।
आज का मुख्य शुभ मुहूर्त (दिल्ली/एनसीआर के अनुसार):
सुबह लगभग 5:57 बजे से 9:48 बजे तक (पूरिणमा तिथि समाप्त होने से पहले)। अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय जरूर चेक करें।
इस दिन चंद्र ग्रहण भी लग रहा है, इसलिए कई लोग ग्रहण से पहले राखी बाँधने को प्राथमिकता देते हैं?
आपको और आपके परिवार को रक्षाबंधन की ढेर सारी शुभकामनाएँ! भाई-बहन का यह प्यार हमेशा बना रहे।🪶 ❤️🙏
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संपादक श्री दयाशंकर गुुुप्ता जी
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जय संविधान जय भीम जय संविधान का चौथा स्तंभ ने अपने दिल की कुछ प्रमुखताएं या बातें या भावनाएं रखा है अप सभी के बिच में सभी नागरिकों के समक्ष प्रस्तुत किया है और लिखने में कोई त्रुटि हुई है तो क्षमा करें लिखने गलती हुई हैं तो क्षमा करना श्री दयाशंकर गुप्ता जी की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद🙏
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