भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका के जन्म-मृत्यु विभाग में सर्वर व नेटवर्क ठप, अधिकारी-नागरिक दोनों परेशान
भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका के जन्म-मृत्यु विभाग में सर्वर व नेटवर्क ठप, अधिकारी-नागरिक दोनों परेशान
भिवंडी 24 अगस्त 2026
जनहित में विशेष रिपोर्ट
भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका के जन्म-मृत्यु विभाग में सर्वर और नेटवर्क की लगातार समस्या से पूरा कामकाज ठप पड़ा हुआ है। विभाग में काम करने वाले अधिकारी-कर्मचारी और प्रमाणपत्र बनवाने आए आम नागरिक दोनों ही भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं।
विभाग में पहुंचने वाले नागरिकों को बार-बार यही जवाब मिल रहा है कि “सर्वर डाउन है” या “नेटवर्क नहीं चल रहा”। जन्म प्रमाणपत्र, मृत्यु प्रमाणपत्र, नाम सुधार या पुराने रिकॉर्ड निकालने के लिए आए लोग घंटों कतार में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हो रहे हैं।
कई परिवारों को स्कूल एडमिशन, पासपोर्ट, बैंक अधार कार्ड राशन कार्ड पेन कार्ड ड्राइविंग लाइसेंस दिव्यांग लोगों का पेंशन वह अन्य दस्तावेज काम, संपत्ति संबंधी दस्तावेज या अन्य जरूरी कागजात के लिए बार-बार दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
विभाग के कर्मचारियों का भी कहना है कि तकनीकी खराबी के कारण वे नागरिकों की मदद नहीं कर पा रहे। एक कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, “हम खुद भी परेशान हैं।
सिस्टम ठीक से नहीं चल रहा। नागरिक नाराज होते हैं, हम भी कुछ नहीं कर पाते।”यह समस्या सिर्फ एक-दो दिन की नहीं है।
लंबे समय से सर्वर व नेटवर्क संबंधी गड़बड़ी बनी हुई है, जिससे जन्म-मृत्यु पंजीकरण की मूलभूत सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
पहले भी महानगरपालिका में जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड से जुड़े गंभीर संकट की खबरें आई थीं, जिसमें लाखों रिकॉर्ड गायब होने और सिस्टम डाउन रहने की शिकायतें सामने आई थीं।
उस समय महापौर ने सख्त चेतावनी दी थी, लेकिन अब फिर वही परेशानी दोबारा सिर उठा रही है।
नागरिकों का कहना है कि डिजिटल इंडिया के इस दौर में इतनी जरूरी सेवा में बार-बार तकनीकी खराबी होना शर्मनाक है। एक स्थानीय निवासी ने गुस्से में कहा, “हमारे बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए तीन दिन से आ रहे हैं। हर बार सर्वर डाउन बताकर लौटा दिया जाता है। अधिकारियों को इस समस्या का स्थायी हल निकालना चाहिए।”
जनहित में यह मांग जोर-शोर से उठ रही है कि महानगरपालिका प्रशासन तुरंत तकनीकी टीम को सक्रिय करे, सर्वर व नेटवर्क की समस्या का स्थायी समाधान निकाले और नागरिकों को समयबद्ध सेवा सुनिश्चित करे। अगर जरूरत पड़े तो अस्थायी तौर पर ऑफलाइन प्रक्रिया भी शुरू की जाए, ताकि लोगों का काम रुका न रहे।
भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका के जन्म-मृत्यु विभाग की यह स्थिति न सिर्फ आम नागरिकों की परेशानी बढ़ा रही है, बल्कि प्रशासन की कार्यक्षमता पर भी सवाल खड़े कर रही है। उम्मीद है कि प्रशासन इस जनहित के मुद्दे पर तुरंत ध्यान देगा और समस्या का समाधान निकालेगा। जनहित में जारी
जिम्मेदारी मुख्य रूप से अधिकारी/महानगरपालिका की है, नागरिक की नहीं।
Registration of Births and Deaths Act, 1969 (2023 संशोधन के साथ) के तहत जन्म-मृत्यु के रिकॉर्ड रखना, उनका संरक्षण, डिजिटाइजेशन और प्रमाणपत्र जारी करना Registrar (जन्म-मृत्यु विभाग) और स्थानीय प्राधिकरण (भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका) की वैधानिक जिम्मेदारी है। पुराने मैनुअल रिकॉर्ड को कंप्यूटर/CRS पोर्टल में लाना, डेटाबेस सुरक्षित रखना और सर्वर/नेटवर्क ठीक रखना भी प्रशासन का काम है। नागरिक को “बाहर से ऑनलाइन करो” या “कोर्ट/तहसील जाओ” कहकर टालना उचित नहीं है।
हाल की स्थिति (भिवंडी में)
मार्च 2026 में लगभग बहुत सारा जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड गायब होने की खबर आई थी। निजी ठेकेदार के साथ अनुबंध खत्म होने के बाद डेटा नहीं सौंपने और प्रशासनिक लापरवाही के कारण सर्वर/सिस्टम ठप पड़ा। महापौर ने अधिकारियों को अल्टीमेटम दिया था। विभाग में पहले भी शिकायतें और जांच हुई हैं।
महानगरपालिका खुद CRS (Civil Registration System) पोर्टल (crsorgi.gov.in / dc.crsorgi.gov.in) के जरिए पुराने जन्म प्रमाणपत्र की डिजिटल कॉपी ऑनलाइन लेने की सुविधा बता रही है। नागरिक पुराना सर्टिफिकेट अपलोड करके “Add Old Birth Event” कर सकते हैं, लेकिन सत्यापन और अंतिम मंजूरी Registrar/District Registrar की होती है।
नागरिक को क्या करना चाहिए?
पहले CRS पोर्टल आज़माएं
crsorgi.gov.in या dc.crsorgi.gov.in पर जाएं।
साइन-अप/लॉगिन करें → Add Old Birth Event (या Death) चुनें।
पुराने प्रमाणपत्र की स्कैन कॉपी और आवश्यक विवरण भरें।
Reference नंबर सेव रखें।
महानगरपालिका के आधिकारिक वीडियो/सूचना में यही प्रक्रिया बताई गई है।
विभाग में लिखित आवेदन दें
जन्म-मृत्यु विभाग में पुराना प्रमाणपत्र (यदि है), पहचान पत्र, पते का सबूत लेकर लिखित आवेदन दें।
सर्वर/रिकॉर्ड न मिलने का उल्लेख करें और पावती लें।
अगर पेज फटा है या नाम नहीं मिलता तो सर्च रिपोर्ट मांगें।
RTI लगाएं (सबसे प्रभावी)
महानगरपालिका के PIO (जन सूचना अधिकारी) को RTI भेजें:
आपके नाम/वर्ष का रिकॉर्ड डिजिटाइज कब हुआ?
फाइल की स्थिति, सर्वर/डेटा गायब होने का कारण।
नागरिक चार्टर के अनुसार समय-सीमा।
30 दिन में जवाब मिलना चाहिए। जवाब न मिले तो First Appeal।
शिकायत/एस्केलेशन
महानगरपालिका आयुक्त (अनमोल सागर, IAS) को लिखित शिकायत + ईमेल (bncmc.cd@gmail.com या commissioner संबंधित) भेजें। फोन: 02522-252374/95।
महापौर कार्यालय।
ठाणे जिला के District Registrar (जन्म-मृत्यु) / जिला सांख्यिकी अधिकारी।
जिलाधिकारी (Collector), ठाणे।
महाराष्ट्र शासन के शिकायत पोर्टल या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन।
बहुत पुराना रिकॉर्ड (1 वर्ष से अधिक) न मिले तो मजिस्ट्रेट के आदेश से delayed registration का रास्ता।
अन्य विकल्प
अगर पुराना सर्टिफिकेट हाथ में है तो उसे ही कई जगह इस्तेमाल करें (जब तक डिजिटल न मिले)।
स्कूल/अस्पताल के पुराने रिकॉर्ड, आधार, पैन आदि सेकेंडरी सबूत के रूप में रखें।
उपभोक्ता अदालत या उच्च न्यायालय में रिट भी संभव है, लेकिन पहले प्रशासनिक रास्ते आजमाएं।
डेटा एंट्री और पुराने रिकॉर्ड का डिजिटाइजेशन नागरिक का काम नहीं है। यह जनहित का मुद्दा है। अधिकारी “सर्वर डाउन” या “बाहर से करो” कहकर टालते हैं तो लिखित पावती लेकर ऊपर की शिकायत करें। कई नागरिकों के मिलने और कई के न मिलने की स्थिति में प्रशासन की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
आवश्यक दस्तावेज, आवेदन की कॉपी और Reference नंबर हमेशा सेव रखें।
मैं आपकी समस्या समझ गया हूँ। भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका के जन्म-मृत्यु विभाग में पुराने जन्म प्रमाणपत्र (जन्मपत्री) के रिकॉर्ड न मिलने, सर्वर/नेटवर्क के बहाने, और अधिकारियों द्वारा नागरिकों को “बाहर से ऑनलाइन करो / तहसील-कोर्ट जाओ” कहकर टालमटोल करने की शिकायत है।
नीचे स्पष्ट जवाब देता हूँ — कानून क्या कहता है, जिम्मेदारी किसकी है, और आपको क्या करना चाहिए।
1. दस्तावेज़ संरक्षण का कानून क्या कहता है?
Births and Deaths Registration Act, 1969 और महाराष्ट्र में लागू Registration of Births and Deaths Rules के अनुसार:
जन्म-मृत्यु के रिकॉर्ड स्थायी रूप से संरक्षित रखने की जिम्मेदारी रजिस्ट्रार (यहाँ नगरपालिका/महापालिका का जन्म-मृत्यु विभाग) की है।
पुराने रजिस्टर (हाथ से लिखे हुए) को भी सुरक्षित रखना अनिवार्य है। अगर पेज फट जाए, गीला हो जाए या खो जाए तो विभाग की लापरवाही मानी जाती है।
Right to Information Act, 2005 और Maharashtra Public Records Act के अंतर्गत भी सरकारी रिकॉर्ड का संरक्षण सरकारी कार्यालय की जिम्मेदारी है, नागरिक की नहीं।
निष्कर्ष: पुराने रिकॉर्ड को डिजिटाइज (TRS/स्कैन) करके कंप्यूटर में डालना, बैकअप रखना और नागरिक को प्रमाणित प्रति देना — अधिकारी/विभाग की जिम्मेदारी है। नागरिक पर “आप बाहर से ऑनलाइन करो” धकेलना गलत है।
2. ऑनलाइन जन्म प्रमाणपत्र निकालने की जिम्मेदारी किसकी?
अगर रिकॉर्ड पहले से डिजिटल है → नागरिक स्वयं https://crsorgi.gov.in या महाराष्ट्र के पोर्टल से निकाल सकता है।
अगर रिकॉर्ड डिजिटल नहीं है (पुराना रजिस्टर) → विभाग को खुद खोजकर, स्कैन करके, डिजिटल बनाकर देना चाहिए।
“आप बाहर से करो” या “हमारा काम नहीं” कहना गलत है। विभाग को सेवा देनी है।
3. अगर रिकॉर्ड नहीं मिलता / पेज फटा है / अधिकारी टालमटोल करते हैं तो क्या करें?
क्रम से ये कदम उठाएँ:
लिखित आवेदन दें
जन्म-मृत्यु विभाग के प्रभारी अधिकारी को लिखित आवेदन (रजिस्टर्ड पोस्ट/हाथ से रसीद लेकर) दें। आवेदन में लिखें:
जन्म तिथि, स्थान, माता-पिता के नाम
पुरानी जन्मपत्री (अगर हो) की फोटोकॉपी संलग्न करें
“रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का अनुरोध”
आरटीआई लगाएँ
उसी विभाग में RTI आवेदन करें:
“मेरे जन्म रिकॉर्ड की खोज रिपोर्ट और डिजिटाइजेशन स्थिति बताएँ”
30 दिन में जवाब देना अनिवार्य है।
उच्च अधिकारी को शिकायत
भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका के आयुक्त / अतिरिक्त आयुक्त को लिखित शिकायत
जिला कलेक्टर, ठाणे को शिकायत
महाराष्ट्र शासन के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट या सीआरएस (Civil Registration System) राज्य नोडल अधिकारी को
लोकपाल / मानवाधिकार आयोग
अगर बार-बार टालमटोल हो तो महाराष्ट्र लोकआयुक्त या राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
न्यायालय
अंतिम विकल्प के रूप में सिविल कोर्ट या हाईकोर्ट में रिट याचिका। लेकिन पहले उपरोक्त प्रशासनिक रास्ते आज़माएँ।
4. सर्वर/नेटवर्क ठप होने का बहाना
यह अस्थायी समस्या हो सकती है, लेकिन स्थायी बहाना नहीं बन सकता। अगर सर्वर बार-बार डाउन है तो विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था (ऑफलाइन रजिस्टर से निकालकर प्रमाणित प्रति देना) करनी चाहिए। नागरिक को परेशान करना उचित नहीं।
5. सारांश — जिम्मेदारी किसकी?
मुद्दा
जिम्मेदारी
पुराने रिकॉर्ड का संरक्षण
नगरपालिका विभाग
डिजिटाइजेशन / डेटा एंट्री
नगरपालिका विभाग
नागरिक को प्रमाणित प्रति देना
नगरपालिका विभाग
“बाहर से ऑनलाइन करो” कहना
गलत व्यवहार
नागरिक को तहसील/कोर्ट भेजना
अंतिम विकल्प, पहले नहीं
नागरिक की जिम्मेदारी केवल सही जानकारी और आवेदन देना है। बाकी सब विभाग का काम है।
व्यावहारिक सलाह:
आज ही लिखित आवेदन + RTI दोनों एक साथ दें। आवेदन की कॉपी और रसीद सुरक्षित रखें। अगर 15-20 दिन में कोई ठोस जवाब न मिले तो आयुक्त और कलेक्टर को भेजें।
अगर कोई खास वर्ष/नाम का केस है तो और विस्तार से बताएं, तो प्रक्रिया और स्पष्ट बता सकता हूँ। अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए सामूहिक शिकायत या स्थानीय जनप्रतिनिधि/मीडिया भी मददगार हो सकता है।
नोट..... मैं नागरिक अपील करता हूं कि आपकी जो भी समस्या है नागरिक को अधिकारी से संपर्क करें अपनी जन्म मृत्यु विभाग से अगर वह समस्या हल नहीं करते हैं तो उनके वरिष्ठ अधिकारी से मिले आयुक्त से मिले वह भी नहीं करते हैं तो आरटीआई करें वहां से भी जवाब ना मिले तो अपील करिए राज्य अपील करिए और वहां से भी समाधान नहीं मिलता है तो कोर्ट में रिट पिटीशन दाखिल करें अपनी समस्या का समाधान करें और अधिकारियों से भी अपील है कि नागरिक की मदद करें?
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संपादक श्री दयाशंकर गुुुप्ता जी
नोट........ 👉🙏
दोस्तों उम्मीद करता हूं कि आप सभी, यह आर्टिकल को अंत तक पढ़े होंगे एवं यह आर्टिकल आपको बेहद पसंद आया होगा, हैं।और अगर लिखने में कोई त्रुटि हुई हो तो क्षमा करें इस के लिए हम आप क्षमा मांगते हैं और हमारे इस आर्टिकल को लाइक करें शेयर करें ? 🙏 जनहित लोकहित के लिए धन्यवाद 🙏
जय संविधान जय भीम जय संविधान का चौथा स्तंभ ने अपने दिल की कुछ प्रमुखताएं या बातें या भावनाएं रखा है अप सभी के बिच में सभी नागरिकों के समक्ष प्रस्तुत किया है और लिखने में कोई त्रुटि हुई है तो क्षमा करें लिखने गलती हुई हैं तो क्षमा करना श्री दयाशंकर गुप्ता जी की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद🙏
जय हिंद जय भारत जय महाराष्ट्र वंदे मातरम🙏
जनहित के लिए जय हिंद जय भारत जय महाराष्ट्र वंदे मातरम




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