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ठाणे जिले का गौरव: नायब तहसीलदार मदन शेलार को राज्यस्तरीय सम्मान

 ठाणे जिले का गौरव: नायब तहसीलदार मदन शेलार को राज्यस्तरीय सम्मान



ठाणे: ठाणे जिले 137 विधानसभा पूर्व भिवंडी के गौरवशाली इतिहास से जुड़ा एक ईमानदार व्यक्तित्व आज महाराष्ट्र प्रशासन में आदर्श बनकर उभरा है। 137 भिवंडी पूर्व के नायब तहसीलदार मदन गजानन शेलार रावसाहेब को राज्यस्तरीय सम्मान मिला है।




ठाणे जिले का इतिहास तेजस्वी और गौरवशाली रहा है। ईसा की आठवीं से तेरहवीं शताब्दी तक शिलाहार राजवंश ने ठाणे और उत्तर कोंकण पर शासन किया। मूल रूप से राष्ट्रकूट साम्राज्य के सरदार रहे शिलाहारों ने बाद में स्वतंत्र सत्ता स्थापित की। ठाणे उनका मुख्य केंद्र था। उन्होंने व्यापार को बढ़ावा दिया, धर्म को आश्रय दिया और मंदिरों का निर्माण कराया। ठाणे का अंबरनाथ शिव मंदिर शिलाहार काल का एक अमूल्य उदाहरण है। इतिहासकारों के अनुसार ‘शिलाहार’ शब्द का ही अपभ्रंश आगे चलकर ‘शेलार’ हो गया। शिलाहारों द्वारा शासित इसी भूमि पर आज शेलार रावसाहेब ने अपनी ईमानदार सेवा से ठाणे का मान बढ़ाया है। यह अतीत के राजवंश और वर्तमान के अधिकारी का अद्भुत संगम है।

मदन गजानन शेलार रावसाहेब महसूल विभाग में तलाठी के रूप में काम करते हुए ईमानदारी का उदाहरण बने। मंडल अधिकारी रहते हुए उन्होंने अनुशासन बनाए रखा और आज नायब तहसीलदार के रूप में 137 भिवंडी पूर्व में उनका कार्य ठाणे जिले के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखे जाने योग्य है। उनके कार्यों की राज्य स्तर पर दखल ली गई। महसूल मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने उन्हें ‘कोंकण प्रभाग के आदर्श नायब तहसीलदार’ का पुरस्कार देकर सम्मानित किया। स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के हाथों मानचिह्न और सम्मान पत्र देकर उनका सम्मान किया गया। यह सम्मान केवल उनके व्यक्तिगत सफलता का नहीं, बल्कि ठाणे जिले के सौभाग्य का भी है।

शेलार रावसाहेब सादे, सरल किंतु कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी हैं। उन्होंने कभी पुरस्कार के लिए काम नहीं किया, फिर भी उनके काम की राज्य स्तर पर पहचान हुई। यही सच्चा कर्मयोग है। भगवद्गीता में श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं – “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।” अर्थात केवल कर्म करने का अधिकार है, फल की चिंता मत करो। शेलार रावसाहेब ने इसी संदेश को अपने जीवन में उतारा है। कर्तव्य भाव से किए गए काम को राज्यस्तरीय फल मिला है।

शिलाहारों ने ठाणे को सांस्कृतिक विरासत दी, तो शेलार रावसाहेब ने ईमानदार प्रशासन का आदर्श प्रस्तुत किया। एक ने मंदिरों का निर्माण किया, दूसरे ने नागरिकों के हित में काम किया। ठाणे का यह सफर अतीत से वर्तमान तक का तेजस्वी संगम है। शेलार रावसाहेब सच में आदर्श अधिकारी हैं। उनके काम से नई पीढ़ी को सीखना चाहिए कि कर्तव्य भाव से किया गया काम ही सच्चे अर्थों में देदीप्यमान होता है।

ठाणे जिले के गगन में झंडा फहराने वाला यह सम्मान शेलार रावसाहेब की आगे की यात्रा को प्रेरणा देने वाला है। उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं!

श्री मदन शेलार रावसाहेब का कर्तव्यनिष्ठा का गौरव

भिवंडी, महाराष्ट्र – 137 भिवंडी पूर्व विधानसभा क्षेत्र के नायब तहसीलदार श्री मदन शेलार रावसाहेब का आज कर्तव्यनिष्ठा की स्वीकृति के रूप में विशेष सम्मान और गौरव समारोह संपन्न हुआ। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि संपूर्ण महसूल विभाग के कर्मचारियों के लिए प्रेरणादायी साबित हुआ है।

शेलार रावसाहेब पिछले 20 वर्षों की सेवा अवधि में आदर्श अधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं। वांगणी निवासी उन्होंने वाडा से वांगणी तक लंबा सफर सालों तक तय किया। संकट में भी वे नहीं डगमगाए। स्वार्थ को किनारे रखकर समाज, परिवार और देश के प्रति जिम्मेदारी उन्होंने केवल बोलकर नहीं, बल्कि कर्म से सिद्ध की। श्री अशोक दूधसागरे अन्ना और भोजू पवार अन्ना जैसी नजदीकी हस्तियों ने भी उन्हें मार्गदर्शन दिया। ऐसे कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति सच में आदर्श होते हैं।


कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति वह है जो अपना काम ईमानदारी से, समय पर और बिना किसी अपेक्षा के करता है। फल की आशा न रखते हुए केवल कर्तव्य निभाने वाला व्यक्ति। किसान धूप-छाँव में फसल उगाता है, सैनिक सीमा पर जागता है, शिक्षक अज्ञान का अंधकार दूर करता है और डॉक्टर जीवन बचाता है – ये सब कर्तव्यनिष्ठा के उदाहरण हैं। उसी तरह एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी महसूल विभाग का मानबिंदु बनता है। शेलार रावसाहेब को मिला यह बहुमान महसूल विभाग के सहयोगियों के लिए निश्चित रूप से प्रेरणादायी है।

“कर्तव्य करो, फल की अपेक्षा मत करो” – यही कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति का ब्रीद है। ऐसे लोगों के कारण ही समाज आगे बढ़ता है और देश बनता है।

श्री मदन शेलार रावसाहेब को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं!

मेरा देश मेरा वतन समाचार

संपादक: श्री दयाशंकर गुप्ता जी की तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं🪶🙏

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          संपादक श्री दयाशंकर गुुुप्ता जी


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जय संविधान जय भीम जय संविधान का चौथा स्तंभ ने अपने दिल की कुछ प्रमुखताएं या बातें या भावनाएं रखा है अप सभी के बिच में सभी नागरिकों के समक्ष प्रस्तुत किया है और लिखने में कोई त्रुटि हुई है तो क्षमा करें लिखने गलती हुई हैं तो क्षमा करना श्री दयाशंकर गुप्ता जी की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद🙏



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