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1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1857 की क्रांति) में रानी लक्ष्मीबाई के साथ कई वीर साथी थे, जिनमें से बलदेव तेली, परम तेली और चतरे तेली तीनों तेली समाज के बहादुर योद्धा थे। ये झांसी की रानी के अटूट वफादार थे और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1857 की क्रांति) में रानी लक्ष्मीबाई के साथ कई वीर साथी थे, जिनमें से बलदेव तेली, परम तेली और चतरे तेली तीनों तेली समाज के बहादुर योद्धा थे। ये झांसी की रानी के अटूट वफादार थे और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।




उनकी भूमिका और बलिदान

जब अंग्रेजों ने झांसी के किले को घेर लिया, तो इन तीनों वीरों ने रानी लक्ष्मीबाई के लिए रसद (राशन/आपूर्ति), हथियार और अन्य सहायता पहुंचाने का काम किया।

वे रानी की सेना में शामिल होकर अंग्रेजों से सीधे युद्ध लड़े और अपनी वफादारी से मातृभूमि की रक्षा के लिए प्रेरित रहे।

23 मार्च 1858 को अंग्रेजों ने इन्हें पकड़ लिया। अंग्रेजों ने इन्हें डराने-धमकाने की बहुत कोशिश की, लेकिन ये तीनों वीर नहीं झुके।

उन्होंने हंसते-हंसते फांसी को गले लगाया और देश के लिए शहीद हो गए। यह तारीख उनकी अमर शहादत का प्रतीक है।

ये तीनों क्रांतिकारी तेली समाज के उन गुमनाम नायकों में से हैं, जिन्होंने रानी लक्ष्मीबाई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी। मुख्यधारा के इतिहास में रानी लक्ष्मीबाई की वीरता बहुत चर्चित है, लेकिन इन जैसे साथियों की कुर्बानी भी उतनी ही महान है।

इन अमर शहीदों को कोटि-कोटि नमन!

जय हिंद! 🇮🇳

अमर रहे बलदेव तेली, परम तेली और चतरे तेली!

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       मेरा देश मेरा वतन समाचार 






                    🙏 पत्र के🙏




        संपादक श्री दयाशंकर गुुुप्ता जी




नोट........ 👉🙏




 दोस्तों उम्मीद करता हूं कि आप सभी, यह आर्टिकल को अंत तक पढ़े होंगे एवं यह आर्टिकल आपको बेहद पसंद आया होगा, हैं।और अगर लिखने में कोई त्रुटि हुई हो तो क्षमा करें इस के लिए हम आप क्षमा मांगते हैं और हमारे इस आर्टिकल को लाइक करें शेयर करें ? 🙏 जनहित लोकहित के लिए धन्यवाद 🙏




जय संविधान जय भीम जय संविधान का चौथा स्तंभ ने अपने दिल की कुछ प्रमुखताएं या बातें या भावनाएं रखा है अप सभी के बिच में सभी नागरिकों के समक्ष प्रस्तुत किया है और लिखने में कोई त्रुटि हुई है तो क्षमा करें लिखने गलती हुई हैं तो क्षमा करना श्री दयाशंकर गुप्ता जी की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद🙏




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