Maa कोराडी माता मंदिर, नागपुर
माॅं कोराडी माता मंदिर (श्री महालक्ष्मी जगदंबा मंदिर) महाराष्ट्र के नागपुर शहर के निकट एक प्रसिद्ध हिंदू धार्मिक स्थल है। यह मंदिर माता दुर्गा के जगदंबा रूप को समर्पित है और एक शक्ति पीठ के रूप में जाना जाता है। मंदिर की स्वयंभू मूर्ति के चमत्कारिक कथाएं इसे विशेष महत्व प्रदान करती हैं, जहां माता का रूप दिन में तीन बार बदलने की मान्यता है – सुबह एक युवती, दोपहर एक परिपक्व महिला और रात में एक वृद्धा के रूप में। यह मंदिर संतान प्राप्ति, धन-समृद्धि और मोक्ष की कामना करने वाले भक्तों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
इतिहास और किंवदंतियां
मंदिर का इतिहास लगभग 300-350 वर्ष पुराना माना जाता है, हालांकि इसकी जड़ें महाभारत काल तक जाती हैं। किंवदंती के अनुसार, यह स्थान मूल रूप से 'जाखापुर' के नाम से जाना जाता था। राजा झोलन की पुत्री जाखुमाई ने युद्ध के बाद यहीं विश्राम किया और देवी कात्यायनी के रूप में प्रकट हुईं। एक अन्य कथा में, नागपुर के निवासियों ने एक भयानक राक्षस से मुक्ति के लिए माता जगदंबा की आराधना की, जिन्होंने राक्षस का वध किया। मंदिर का निर्माण हेमाडपंथी शैली में हुआ है, और यह 'विदर्भ की कुलस्वामिनी' के नाम से भी जाना जाता है।
स्थान और कैसे पहुंचें
मंदिर नागपुर शहर से लगभग 15 किलोमीटर उत्तर में कोराडी झील के किनारे स्थित है।
हवाई मार्ग: नागपुर का डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (18 किमी दूर) से टैक्सी या कैब द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।
रेल मार्ग: नागपुर रेलवे स्टेशन (15 किमी दूर) से लोकल बस या ऑटो उपलब्ध।
सड़क मार्ग: नागपुर से कोराडी मंदिर रोड होते हुए सीधा पहुंचें। आसपास पार्किंग सुविधा उपलब्ध है।
दर्शन समय और पूजा
मंदिर सुबह 6:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुला रहता है। नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा और उत्सव आयोजित होते हैं, जहां लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। भोग में 56 प्रकार के व्यंजन, नारियल, लाल वस्त्र और फल चढ़ाए जाते हैं। मंदिर परिसर में चुनरी, फूलमाला की दुकानें और भक्तों के ठहरने की व्यवस्था उपलब्ध है।
महत्वपूर्ण त्योहार
नवरात्रि: आश्विन और चैत्र नवरात्रि में विशेष आकर्षण, जहां अखंड ज्योति और झांकी सजाई जाती हैं।
अन्य: दुर्गा पूजा, लक्ष्मी पूजा।
यह मंदिर न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है, बल्कि आसपास की प्राकृतिक सुंदरता (कोराडी झील) के कारण पर्यटन स्थल के रूप में भी लोकप्रिय है। यदि आप दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो नवरात्रि से पहले बुकिंग कर लें। 🙏
नागपुर शहर में कोराडी माता मंदिर बहुत प्रसिद्ध और शक्तिपीठ माना जाने वाला देवी मंदिर है। इसका पूरा नाम श्री कोराडी देवी मंदिर या महालक्षमी जगदंबा मंदिर है।
मुख्य जानकारी:
स्थान: कोराडी, नागपुर से लगभग 12-15 किमी दूर, नागपुर-जबलपुर हाईवे (NH-44) पर स्थित। यह नागपुर शहर के उत्तरी हिस्से में है।
देवी: यहाँ मुख्य देवी माँ महालक्षमी (जगदंबा) की मूर्ति है। साथ ही माँ काली और माँ सरस्वती की मूर्तियाँ भी हैं। यह मंदिर शक्ति पीठ के रूप में पूजा जाता है।
विशेषता:
नवरात्रि में यहाँ भारी भीड़ होती है। लाखों श्रद्धालु आते हैं।
यहाँ की सबसे बड़ी खासियत है "अखंड ज्योत" जो दशकों से लगातार जल रही है।
मंदिर परिसर में बहुत बड़ा तालाब भी है, जिसे पवित्र माना जाता है।
नवरात्रि में विशेष:
दोनों नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) में यहाँ भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लगती हैं।
कई लोग पैदल यात्रा (पायी यात्रा) करके कोराडी माता के दर्शन करने आते हैं।
माँ की चुनरी चढ़ाने और नारियल चढ़ाने की परंपरा बहुत प्रचलित है।
कैसे पहुँचें (नागपुर से):
ऑटो, टैक्सी, बस या निजी वाहन से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
नागपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 20-25 किमी।
सबसे नजदीकी बस स्टॉप: कोराडी या खपरखेड़ा।
आसपास के अन्य दर्शन स्थल:
कोराडी थर्मल पावर प्लांट (नजदीक ही है)
खपरी रेलवे स्टेशन के पास छोटे-छोटे मंदिर
यह मंदिर नागपुर और आसपास के लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है। अगर आप नागपुर में हैं और माँ के दर्शन करना चाहते हैं, तो कोराडी माता मंदिर जरूर जाएँ।
जय माता दी! 🙏
श्री कोराडी माता मंदिर, नागपुर
नमस्कार! आपकी क्वेरी "श्री कोराडी माता मंदिर, नागपुर" से लगता है कि आप इस प्रसिद्ध मंदिर के बारे में जानकारी चाहते हैं। श्री महालक्ष्मी जगदंबा मंदिर (जिसे कोराडी देवी मंदिर या कोराडी माता मंदिर के नाम से जाना जाता है) नागपुर के पास कोराडी में स्थित एक प्राचीन और पवित्र शक्ति पीठ है। यहाँ माता महालक्ष्मी (दुर्गा के रूप में) की पूजा होती है, जो धन, समृद्धि और शक्ति की देवी हैं। आइए, विस्तार से जानते हैं:
इतिहास और महत्व
उत्पत्ति: मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। प्राचीन काल में यहाँ 'जखुमाई देवी' के रूप में पूजा होती थी, जो बाद में महालक्ष्मी जगदंबा के रूप में विकसित हुई। यह विदर्भ क्षेत्र के 51 शक्ति पीठों में से एक है और 'विदर्भ की कुलस्वामिनी' के नाम से प्रसिद्ध है।
विकास: मंदिर की भूमि भोसले राज परिवार ने फुलझेले परिवार को दान की थी, जो आज भी मंदिर का प्रबंधन देखते हैं। हाल ही में (2024 तक) मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ है, जिसमें एक विश्व स्तरीय सांस्कृतिक और धार्मिक इतिहास केंद्र भी शामिल है।
विशेषता: मूल मूर्ति का चेहरा हर कुछ घंटों में बदल जाता है, जो चमत्कारिक माना जाता है। माता की कृपा से भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
स्थान और कैसे पहुँचें
स्थान: कोराडी झील के किनारे, नागपुर शहर से लगभग 10-15 किमी उत्तर में। पता: कोराडी, महादुला, महाराष्ट्र 441111, भारत।
पहुँच:
रेल: नागपुर रेलवे स्टेशन से 15 किमी।
विमान: डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, नागपुर से 21 किमी।
सड़क: टैक्सी, बस या निजी वाहन से आसानी से पहुँचा जा सकता है। मंदिर के पास पार्किंग उपलब्ध है।
समय और दर्शन
समय: सुबह 6:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुला रहता है (सभी दिन)। वर्तमान में (29 नवंबर 2025) यह खुला है।
रेटिंग: 4.7/5 (10,000+ समीक्षाओं पर आधारित)। भक्त शांत वातावरण, सुंदर वास्तुकला और प्रसाद वितरण की सराहना करते हैं।
टिप: नवरात्रि के दौरान लाखों भक्त आते हैं। ऑनलाइन 'अखंड ज्योति' बुकिंग की जा सकती है। धोखाधड़ी वाली वेबसाइटों से सावधान रहें – आधिकारिक साइट koraditemple.com है।
प्रमुख त्योहार और पूजा
नवरात्रि: सबसे बड़ा उत्सव, जहाँ 9 दिनों तक विशेष पूजा और यात्रा होती है।
दशहरा: माता की विशेष आरती और भंडारा।
अन्य: रोजाना आरती और प्रसाद। मंदिर में राम मंदिर प्रदर्शनी केंद्र भी है।
यदि आप दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो जय माता दी! अधिक जानकारी जैसे फोटो, वीडियो या यात्रा टिप्स चाहिए तो बताएँ।
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