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दिल्ली, देश की अग्रणी साहित्यिक संस्था हिंदी की गूंज की मैसूर शाखा के द्वारा आयोजित अंतर शाखा कवि सम्मेलन, रविवार 27 जून की शाम को संपन्न हुआ।

 दिल्ली, ....देश की अग्रणी साहित्यिक संस्था हिंदी की गूंज की मैसूर शाखा के द्वारा आयोजित अंतर शाखा कवि सम्मेलन, रविवार 27 जून की शाम को संपन्न हुआ।


 जिसमें संस्था की सभी शाखाओं से कवि - कवयित्रियों ने जुड़कर कार्यक्रम में चार चांद लगाये । कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री नरेंद्र सिंह नीहार जी ने सफल आयोजन के लिए मैसूर शाखा प्रभारी डॉ पूर्णिमा उमेश जी को बधाई देते हुए कहा कि आगे भविष्य में ऐसे ही हिंदी की गूँज पूरे विश्व में फैले। यही संस्था का एकमेव उद्देश्य है। मध्य प्रदेश से कार्यक्रम में जुड़ी रश्मि मिश्रा जी ने 'सावन की घटा तुम खुलकर बरस जाओ' सुनाकर सभी को सावन के मौसम से जोड़ा, तो वहीं बलराम निगम (राजस्थान)- 'तू नित-नित आगे बढ़ नारी' कविता का पाठ कर नारी शक्ति को संबल दिया। हल्द्वानी शाखा से जुड़ी गरिमा जोशी ने 'मरुस्थल में हरियाली होगी गर तुम दो बूंद बचा लोगे'सुनाकर पर्यावरण संरक्षण की गुहार लगाई। सपना कुमार (महाराष्ट्र)- 'हमने मौसम को बदलते देखा है' सुनाया, तो राज टेकरीवाल (कर्नाटक)-  'मध्यमवर्ग पिस जाता है' सुना मध्यम वर्ग की पीड़ा को सबके सामने रखा। उषा केडिया(मैसूर)- 'हां मैं कोरोना हूं' सुना कोरोना काल में पर्यावरण, समाज, मानव संवेदनाओं,में आए सकारात्मक परिवर्तन की ओर सभी का ध्यान आकर्षित किया। 


अमृता (उत्तराखंड)ने- 'दादी पोते के संवाद' से सभी का ध्यान संयुक्त परिवार की तरफ खींचने का प्रयास किया, तो वहीं प्रमोद कुमार(उत्तर प्रदेश)- 'बनाकर दिल से रिश्ता जो सफर में छोड़ देते हैं' गजल सुना सभी का मन मोह लिया। दिल्ली से जुड़ी भावना ने 'हिंद की धरती पर तुम जन्मे प्यार करो हिंदी से' सुना कर हिंदी की विशेषता का गुणगान किया । डॉ ममता श्रीवास्तवा ने-'कौन कहता है दुआएं कुबूल नहीं होती' के माध्यम से लोगों को प्रेरणा दी। डॉ सिद्घ गंगम्मा ने-'रोज-रोज चिंता मत करो' सुना सभी को तनाव मुक्त रहने का संदेश दिया, तो महाराष्ट्र से जुड़ी लता नोवाल ने-' कोरोना कितनी बलि लेगा अनुमान चल रहा है'सुनाया,तो श्री गजे जी ने- 'अभी थोड़ा व्यस्त हूं प्रिये मैं लौट कर अवश्य आऊंगा' सुना कर सीमा पर बैठे प्रहरी का घर वालों के नाम संदेश सुनाया। संस्था के संस्थापक श्री नरेन्द्र सिंह नीहार जी ने- 'जिंदगी में विराम नहीं है, रुकना जिंदगी का काम नहीं है। '


 कविता के माध्यम से सभी को आगे बढ़ते रहने का संदेश दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रोफेसर लता चौहान की सरस्वती वन्दना से हुआ और कवि सम्मेलन का कुशल एवं जीवंत संचालन डॉ पूर्णिमा उमेश एवं डॉक्टर चैत्रा जी के द्वारा किया गया ।मैसूर शाखा के इस आयोजन की प्रशंसा करते हुए श्री खेमेंन्द् सिंह जी ने सभी को बधाई दी।

कार्यक्रम में श्रोता के रूप में जुड़ी निर्मला जोशी,तरुणा पुंडीर, दीपक कुमार मित्तल, प्रवीण, रामकुमार, रोचिका शर्मा, राकेश जाखेटिया, गिरीश चन्द्र जोशी, शोभा पाठक,डॉ. संजय कुमार सिंह, डॉ. वर्षा सिंह, अंजू रोहिल्ला, मनोज कुमार, शंभू प्रसाद, आदि ने अपने संदेशों के माध्यम से सभी की हौसला अफजाई की। ?                    👇👇👇👇👇👇👇👇👇                                मेरा देश मेरा वतन समाचार पत्र के

                                  
                         संंपादक श्री दयाशंकर गुुुप्ता जी                   

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  1. बहुत ही बढ़िया रिपोर्ट

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