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प्रयागराज में माघ मेला 2026 आज 3 जनवरी 2026 से शुरू हो रहा है। यह पौष पूर्णिमा के पवित्र स्नान के साथ आरंभ होगा और 15 फरवरी 2026 (महाशिवरात्रि) तक चलेगा।

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सावित्रीबाई फुले (3 जनवरी 1831 – 10 मार्च 1897) भारत की पहली महिला शिक्षिका, समाज सुधारिका, कवयित्री और महिलाओं के अधिकारों की अग्रदूत थीं। वे अपने पति महात्मा ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर महिलाओं की शिक्षा, जाति व्यवस्था के खिलाफ और सामाजिक समानता के लिए जीवनभर संघर्ष करती रहीं। आज, 3 जनवरी को उनकी जयंती मनाई जाती है, जो बालिका शिक्षा दिवस के रूप में भी जानी जाती है

 सावित्रीबाई फुले (3 जनवरी 1831 – 10 मार्च 1897) भारत की पहली महिला शिक्षिका, समाज सुधारिका, कवयित्री और महिलाओं के अधिकारों की अग्रदूत थीं। वे अपने पति महात्मा ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर महिलाओं की शिक्षा, जाति व्यवस्था के खिलाफ और सामाजिक समानता के लिए जीवनभर संघर्ष करती रहीं। आज, 3 जनवरी को उनकी जयंती मनाई जाती है, जो बालिका शिक्षा दिवस के रूप में भी जानी जाती है। प्रारंभिक जीवन सावित्रीबाई का जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव गांव में माली समुदाय (जो उस समय हाशिए पर था) में हुआ था। उनके पिता खंडोजी नेवसे पाटिल और माता लक्ष्मीबाई थे। मात्र 9-10 वर्ष की आयु में उनका विवाह 13 वर्षीय ज्योतिराव फुले से हो गया। विवाह के समय वे निरक्षर थीं, लेकिन ज्योतिराव ने उन्हें घर पर पढ़ाना शुरू किया और बाद में पुणे व अहमदनगर में शिक्षक प्रशिक्षण दिलाया। प्रमुख योगदान महिला शिक्षा की शुरुआत: 1848 में पुणे के भिड़ेवाड़ा में ज्योतिराव और सावित्रीबाई ने भारत का पहला बालिका विद्यालय खोला। सावित्रीबाई स्वयं उसकी पहली शिक्षिका बनीं। इसके बाद उन्होंने 18 स्कूल खोले, जिनमें सभी जातियों और वर्गों ...

श्री पूर्णचन्द्र गुप्ता जी (जिन्हें अक्सर पुराण चन्द्र गुप्ता भी लिखा जाता है) दैनिक जागरण के संस्थापक थे। वे एक प्रमुख पत्रकार, प्रकाशक और स्वतंत्रता सेनानी थे।

 श्री पूर्णचन्द्र गुप्ता जी (जिन्हें अक्सर पुराण चन्द्र गुप्ता भी लिखा जाता है) दैनिक जागरण के संस्थापक थे। वे एक प्रमुख पत्रकार, प्रकाशक और स्वतंत्रता सेनानी थे। मुख्य जानकारी: जन्म: 2 जनवरी 1912 (कानपुर के निकट कालपी में)। मृत्यु: 16 सितंबर 1986। दैनिक जागरण की स्थापना: 1942 में झाँसी से शुरू किया गया, जब भारत छोड़ो आंदोलन चरम पर था। उद्देश्य था जनता की मुक्त आवाज को प्रतिबिंबित करना। शुरू में नाम "जागरण" था, 1947 में "दैनिक जागरण" हो गया और मुख्यालय कानपुर स्थानांतरित हुआ। पृष्ठभूमि: वे राष्ट्रवादी थे। 1940 में कानपुर में साप्ताहिक "स्वतंत्र" शुरू किया, जो ब्रिटिश प्रशासन ने बंद करवा दिया। इसके बाद दैनिक जागरण शुरू किया। योगदान: प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) के अध्यक्ष (1975) रहे और इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी के कार्यकारी सदस्य 15 वर्षों तक। दैनिक जागरण आज भारत का सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला हिंदी दैनिक है। सम्मान: 2012 में भारत सरकार ने उनकी स्मृति में डाक टिकट जारी किया। उनकी विरासत आज भी जागरण प्रकाशन लिमिटेड के माध्यम से जारी है, जो उनके परिवार द्वारा संच...

भिवंडी-निजामपूर शहर महानगरपालिका (BNCMC) की सार्वत्रिक निवडणूक 2025-26 साठीची माहिती खालीलप्रमाणे आहे:

 भिवंडी-निजामपूर शहर महानगरपालिका (BNCMC) की सार्वत्रिक निवडणूक 2025-26 साठीची माहिती खालीलप्रमाणे आहे: मतदानाची तारीख: 15 जानेवारी 2026 मतमोजणी आणि निकाल: 16 जानेवारी 2026 ही निवडणूक महाराष्ट्रातील एकूण 29 महानगरपालिकांसाठी (मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे इत्यादींसह) एकाच टप्प्यात होत आहे. भिवंडीमध्ये एकूण 90 जागा (23 प्रभाग) असून, सुमारे 6.69 लाख मतदार आहेत (पुरुष: 3.80 लाख, महिला: 2.88 लाख, इतर: 313). निवडणूक तयारी: नामनिर्देशन पत्र दाखल करण्याची मुदत: 23 डिसेंबर ते 30 डिसेंबर 2025 नामनिर्देशन पत्रांची छाननी: 31 डिसेंबर 2025 नामनिर्देशन माघार: 2 जानेवारी 2026 पर्यंत अंतिम उमेदवार यादी: 3 जानेवारी 2026 महानगरपालिकेच्या अधिकृत वेबसाइटवर (bncmc.gov.in) प्रभाग रचना, मतदार यादी, मतदान केंद्रांची यादी आणि इतर तपशील उपलब्ध आहेत.🙏 भिवंडी निजामपूर शहर महानगरपालिकेच्या सार्वत्रिक निवडणुकी २०२५-२६ साठी अंतिम मतदान केंद्र यादी अधिकृत वेबसाइटवर उपलब्ध आहे. ही यादी प्रभागनिहाय (वार्डनिहाय) तयार करण्यात आली असून, एकूण २३ प्रभागांसाठी आहे. निवडणूक १५ जानेवारी २०२६ रोजी होणार असून, निकाल १६ जानेव...

भारत में मतदाता (वोटर) के मुख्य अधिकार निम्नलिखित हैं, जो भारतीय संविधान (मुख्य रूप से अनुच्छेद 326) और निर्वाचन आयोग (ECI) के दिशानिर्देशों पर आधारित हैं

 भारत में मतदाता (वोटर) के मुख्य अधिकार निम्नलिखित हैं, जो भारतीय संविधान (मुख्य रूप से अनुच्छेद 326) और निर्वाचन आयोग (ECI) के दिशानिर्देशों पर आधारित हैं: मुख्य अधिकार: मतदान का अधिकार (Right to Vote): 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का हर भारतीय नागरिक (जो अयोग्य नहीं ठहराया गया हो) लोकसभा, राज्य विधानसभा, स्थानीय निकाय आदि चुनावों में मतदान कर सकता है। यह सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर आधारित है, जिसमें जाति, धर्म, लिंग, शिक्षा या आर्थिक स्थिति से कोई भेदभाव नहीं है। मतदाता सूची में पंजीकरण का अधिकार: योग्य नागरिक अपना नाम मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) में दर्ज कराने का हकदार है। फॉर्म 6 के माध्यम से नया पंजीकरण, फॉर्म 8 से सुधार या स्थानांतरण कराया जा सकता है। यह एक संवैधानिक अधिकार है। गुप्त मतदान का अधिकार (Secret Ballot): मतदाता का वोट पूरी तरह गोपनीय रहता है। कोई दबाव, भय या प्रभाव के बिना स्वतंत्र रूप से मतदान करने का अधिकार है (अनुच्छेद 21 से जुड़ा)। EVM और VVPAT इसकी गारंटी देते हैं। NOTA का अधिकार (None of the Above): यदि कोई उम्मीदवार पसंद न हो, तो मतदाता NOTA विकल्प चुन सकता है। य...

तुलसी पूजन दिवस हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है। आज, 25 दिसंबर 2025 को यह पर्व बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है

 तुलसी पूजन दिवस हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है। आज, 25 दिसंबर 2025 को यह पर्व बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है। महत्व हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसे माता लक्ष्मी का स्वरूप और भगवान विष्णु की प्रिया कहा जाता है। तुलसी की पूजा से घर में सुख-समृद्धि, शांति और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। तुलसी के औषधीय गुण भी अद्भुत हैं – यह स्वास्थ्य, पर्यावरण और आध्यात्मिक शुद्धता का प्रतीक है। यह दिवस 2014 से मनाया जा रहा है, जब संत श्री आशारामजी बापू के प्रेरणा से इसे शुरू किया गया। इसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देना और तुलसी के धार्मिक-वैज्ञानिक लाभों को घर-घर पहुंचाना है। पूजा विधि सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। तुलसी के पौधे को स्नान कराएं, सिंदूर, चंदन लगाएं। फूल, पुष्प, मिठाई और फल अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं और तुलसी माता की आरती करें। "ॐ जय जय तुलसी माता" या "जय जय तुलसी माता, सबकी संकट हारिणी" जैसे मंत्रों का जाप करें। तुलसी की 11 या 21 परिक्रमा करें। शाम को फिर दीपक जलाएं। इस दिन तुलसी की जड़ में दूध या विशेष चीज अर्पित करने से...

क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएं! 🎄

 क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएं! 🎄✨ आज, 25 दिसंबर 2025, पूरी दुनिया में क्रिसमस का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह ईसाई धर्म का सबसे बड़ा त्योहार है, जो प्रभु यीशु मसीह के जन्म की याद में मनाया जाता है। यीशु का जन्म बेथलेहम में एक साधारण गौशाले में हुआ था, और इस दिन को प्रेम, शांति, क्षमा और उम्मीद का प्रतीक माना जाता है। क्रिसमस की मुख्य परंपराएं: क्रिसमस ट्री सजाना: सदाबहार पेड़ को लाइट्स, गिफ्ट्स और ऑर्नामेंट्स से सजाया जाता है। सांता क्लॉज: बच्चे सांता से गिफ्ट्स की उम्मीद करते हैं, जो संत निकोलस की परंपरा से आया है। चर्च में प्रार्थना: मिडनाइट मास और कैरोल गाना। केक और फीस्ट: प्लम केक, कुकीज और परिवार के साथ विशेष भोजन। गिफ्ट्स का आदान-प्रदान: प्रेम और खुशी बांटने का तरीका। भारत में क्रिसमस: भारत में भी क्रिसमस बड़े उत्साह से मनाया जाता है, खासकर गोवा, केरल, दिल्ली, मुंबई और पूर्वोत्तर राज्यों में। चर्चों को खूबसूरती से सजाया जाता है, कैरोल गाए जाते हैं, और प्लम केक का मजा लिया जाता है। कई जगहों पर बाजार लाइट्स से जगमगाते हैं और परिवार एक साथ जश्न मनाते हैं। यह पर्व सभी धर्...