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भिवंडी शहर 137 पूर्व के मतदारों BLO के साथ बैठक: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए नागरिकों को महत्वपूर्ण जानकारी

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राष्ट्रीय महामार्गालगतचे अतिक्रमण, अनधिकृत बांधकामे व महामार्ग सुरक्षा याबाबत सर्वोच्च न्यायालयाच्या निर्देशांची राज्यात काटेकोर अंमलबजावणी...

 🚨 राष्ट्रीय महामार्गालगतचे अतिक्रमण, अनधिकृत बांधकामे व महामार्ग सुरक्षा याबाबत सर्वोच्च न्यायालयाच्या निर्देशांची राज्यात काटेकोर अंमलबजावणी... महाराष्ट्र शासनाचा महत्त्वपूर्ण शासन परिपत्रक — दि. 10 ऑगस्ट 2026 मा. सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली येथे दाखल Suo-Moto Writ Petition (Civil) No. 9/2025 – Phalodi Accident vs. National Highways Authority of India तसेच W.P. (C) No. 1100/2025 या प्रकरणामध्ये मा. सर्वोच्च न्यायालयाने दि. 13 एप्रिल 2026 रोजी राष्ट्रीय महामार्गांची सुरक्षितता, महामार्गाच्या हद्दीतील अतिक्रमणे, अनधिकृत बांधकामे आणि महामार्ग सुरक्षा क्षेत्रातील परवानग्यांबाबत महत्त्वपूर्ण निर्देश दिले आहेत. या निर्देशांची राज्यातील सर्व महानगरपालिका, नगरपरिषदा व नगरपंचायतींनी काटेकोरपणे अंमलबजावणी करावी, यासाठी महाराष्ट्र शासनाच्या नगर विकास विभागाने शासन परिपत्रक क्र. संकीर्ण-2026/प्र.क्र.271/नवि-20, दि. 10 ऑगस्ट 2026 रोजी निर्देश जारी केले आहेत. 🔴 1. राष्ट्रीय महामार्गाच्या ROW मध्ये नवीन ढाबे, हॉटेल, दुकाने किंवा व्यावसायिक बांधकामांना मनाई राष्ट्रीय महामार्गाच्या Right of Way (...

वंदे मातरम् का इतिहास बहुत गौरवशाली और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ है।

  वंदे मातरम् का इतिहास बहुत गौरवशाली और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ है। रचना और लेखक लेखक: बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय (Bankim Chandra Chatterjee) यह गीत उन्होंने 1870 के दशक में लिखा था। पहली बार यह उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ (Anandamath) में 1882 में प्रकाशित हुआ। गीत मूल रूप से संस्कृत मिश्रित बांग्ला में लिखा गया है। स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे सार्वजनिक रूप से गाया। यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया। बंग-भंग आंदोलन (1905) और उसके बाद के कई आंदोलनों में इसे व्यापक रूप से गाया गया। कई क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे अपना नारा बनाया। राष्ट्रीय गीत का दर्जा 15 अगस्त 1947 के बाद संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को वंदे मातरम् को भारत का राष्ट्रीय गीत (National Song) घोषित किया। (जबकि जन गण मन को राष्ट्रीय गान यानी National Anthem का दर्जा दिया गया।) कुछ महत्वपूर्ण बातें गीत की शुरुआत “वंदे मातरम्” से होती है, जिसका अर्थ है — “माता को प्रणाम” या “मैं मातृभूमि को नमन करता...

श्रावण शिवरात्रि (सावन शिवरात्रि) 2026 आज 11 अगस्त (मंगलवार) को है।

श्रावण शिवरात्रि (सावन शिवरात्रि) 2026 आज 11 अगस्त (मंगलवार) को है। यह श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मनाई जाती है। चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त सुबह लगभग 4:54 बजे शुरू होकर 12 अगस्त रात लगभग 1:52 बजे तक रहती है। इसलिए शिवरात्रि का मुख्य व्रत और पूजा 11 अगस्त को की जाती है। महत्व श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस महीने में आने वाली शिवरात्रि विशेष फलदायी होती है। भक्त व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं, बेलपत्र, दूध, दही आदि अर्पित करते हैं और रात्रि जागरण करते हैं। कांवड़ यात्रा का समापन भी अक्सर इसी दिन होता है। चार प्रहर की पूजा (सामान्य समय) पहला प्रहर: शाम ~7:04 से रात 9:45 बजे तक (जल/दूध अर्पण) दूसरा प्रहर: रात 9:45 से ~12:26 बजे तक (दही अर्पण) तीसरा प्रहर (निशिता काल): रात ~12:05/12:26 से सुबह 3:07 बजे तक — सबसे महत्वपूर्ण समय चौथा प्रहर: सुबह ~3:07 से 5:48/5:49 बजे तक (समय स्थान और पंचांग के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकते हैं।) जलाभिषेक और पूजा शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि चढ़ाए जाते हैं।  “ॐ नमः शिवाय” क...

भगवान गणेश की जन्म कथा (शिव पुराण के अनुसार सबसे प्रचलित कथा)

 भगवान गणेश की जन्म कथा (शिव पुराण के अनुसार सबसे प्रचलित कथा) कैलाश पर्वत पर भगवान शिव और माता पार्वती निवास करते थे। एक दिन माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं। उन्होंने नंदी को द्वार पर पहरा देने को कहा, लेकिन नंदी शिवजी के अनुचर होने के कारण शिवजी को अंदर आने देते थे। माता पार्वती चाहती थीं कि उनके पास एक ऐसा रक्षक हो जो केवल उनकी आज्ञा का पालन करे। तब माता पार्वती ने अपने शरीर पर लगाए हुए हल्दी के उबटन (या शरीर के मैल/लेप) से एक सुंदर बालक की आकृति बनाई और अपनी दिव्य शक्ति से उसमें प्राण फूंक दिए। इस प्रकार गणेश का जन्म हुआ। माता पार्वती ने उन्हें अपना पुत्र माना और द्वारपाल बनाकर कहा कि कोई भी अंदर न आए, चाहे कोई भी हो। उसी समय भगवान शिव लौटे। गणेश जी ने माता की आज्ञा का पालन करते हुए शिवजी को अंदर जाने से रोक दिया। शिवजी ने अपना परिचय दिया, लेकिन गणेश जी नहीं माने। इससे क्रोधित होकर शिवजी ने अपने गणों को भेजा, पर गणेश जी ने सबको हरा दिया। अंत में शिवजी ने स्वयं त्रिशूल से गणेश जी का सिर काट दिया। माता पार्वती ने यह देखा तो अत्यंत दुखी और क्रोधित हुईं। उन्होंने शिवजी से पुत्र ...

विश्व आदिवासी दिवस (International Day of the World's Indigenous Peoples) हर साल 9 अगस्त को मनाया जाता है।

 विश्व आदिवासी दिवस (International Day of the World's Indigenous Peoples) हर साल 9 अगस्त को मनाया जाता है। आज 9 अगस्त 2026 को यह दिवस मनाया जा रहा है। मुख्य जानकारी स्थापना: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 23 दिसंबर 1994 के प्रस्ताव 49/214 द्वारा इसे घोषित किया। तारीख का महत्व: 1982 में जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के आदिवासी आबादी पर कार्य समूह (UN Working Group on Indigenous Populations) की पहली बैठक इसी दिन हुई थी। उद्देश्य: दुनिया भर के आदिवासी समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा, उनकी संस्कृति, भाषा, ज्ञान और जीवनशैली को बढ़ावा देना तथा उनके योगदान (खासकर पर्यावरण संरक्षण) को मान्यता देना। 2026 का थीम “Honouring Indigenous Midwives: Safeguarding Life and Well-being” (आदिवासी दाईयों का सम्मान: जीवन और कल्याण की रक्षा) इस वर्ष का फोकस आदिवासी पारंपरिक दाईयों (midwives) के ज्ञान और उनके स्वास्थ्य संबंधी योगदान पर है। कुछ महत्वपूर्ण तथ्य विश्व में लगभग 47.6 करोड़ आदिवासी लोग रहते हैं (लगभग 90 देशों में)। ये वैश्विक आबादी का करीब 6% हैं, लेकिन अत्यधिक गरीबी में रहने वालों में 15% हिस्सा रखते ह...

*श्री गुरू तेग बहादूर जी यांचे सर्वोच्च बलिदान* *मानवी हक्क आणि धार्मिक स्वातंत्र्याचा जिवंत दीपस्तंभ* - *राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा* *नवी मुंबईत 'श्री गुरू तेग बहादूर जी यांचा वारसा' विषयावर राष्ट्रीय चर्चासत्र उत्साहात संपन्न; राज्यातील विद्यापीठात 'श्री गुरू तेग बहादूर अध्यासन' सुरू करण्याचे राज्यपालांचे आवाहन*

 *श्री गुरू तेग बहादूर जी यांचे सर्वोच्च बलिदान*  *मानवी हक्क आणि धार्मिक स्वातंत्र्याचा जिवंत दीपस्तंभ* - *राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा* *नवी मुंबईत 'श्री गुरू तेग बहादूर जी यांचा वारसा' विषयावर राष्ट्रीय चर्चासत्र उत्साहात संपन्न; राज्यातील विद्यापीठात 'श्री गुरू तेग बहादूर अध्यासन' सुरू करण्याचे राज्यपालांचे आवाहन* नवी मुंबई, दि. 08 अगस्त 2026:- इतर धर्माच्या अनुयायांच्या धार्मिक स्वातंत्र्याचे आणि मानवी प्रतिष्ठेचे रक्षण करण्यासाठी स्वतःच्या प्राणांचे बलिदान देणारे श्री गुरू तेग बहादूर जी यांचे जीवन आणि विचार हे केवळ ऐतिहासिक स्मरण नसून आधुनिक लोकशाही, सामाजिक सौहार्द आणि धार्मिक स्वातंत्र्याचा जिवंत दीपस्तंभ आहेत, असे प्रतिपादन महाराष्ट्राचे राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा यांनी आज येथे केले.  श्री गुरू तेग बहादूर जी यांच्या ३५० व्या शहादत दिनाचे औचित्य साधून नवी मुंबईतील सीबीडी बेलापूर येथील पंजाब हेरिटेज भवन येथे आयोजित 'श्री गुरू तेग बहादूर जी यांचा वारसा' या विषयावरील एकदिवसीय राष्ट्रीय चर्चासत्राचे उद्घाटन प्रसंगी ते बोलत होते. केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय, साह...