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नागपुर में तिलक खेड़ी मंदिर का रहस्य

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Maa कोराडी माता मंदिर, नागपुर

Maa कोराडी माता मंदिर, नागपुर माॅं कोराडी माता मंदिर (श्री महालक्ष्मी जगदंबा मंदिर) महाराष्ट्र के नागपुर शहर के निकट एक प्रसिद्ध हिंदू धार्मिक स्थल है। यह मंदिर माता दुर्गा के जगदंबा रूप को समर्पित है और एक शक्ति पीठ के रूप में जाना जाता है। मंदिर की स्वयंभू मूर्ति के चमत्कारिक कथाएं इसे विशेष महत्व प्रदान करती हैं, जहां माता का रूप दिन में तीन बार बदलने की मान्यता है – सुबह एक युवती, दोपहर एक परिपक्व महिला और रात में एक वृद्धा के रूप में। यह मंदिर संतान प्राप्ति, धन-समृद्धि और मोक्ष की कामना करने वाले भक्तों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इतिहास और किंवदंतियां मंदिर का इतिहास लगभग 300-350 वर्ष पुराना माना जाता है, हालांकि इसकी जड़ें महाभारत काल तक जाती हैं। किंवदंती के अनुसार, यह स्थान मूल रूप से 'जाखापुर' के नाम से जाना जाता था। राजा झोलन की पुत्री जाखुमाई ने युद्ध के बाद यहीं विश्राम किया और देवी कात्यायनी के रूप में प्रकट हुईं। एक अन्य कथा में, नागपुर के निवासियों ने एक भयानक राक्षस से मुक्ति के लिए माता जगदंबा की आराधना की, जिन्होंने राक्षस का वध किया। मंदिर का निर्माण ह...

महात्मा ज्योतिबा गोविंदराव फुले (11 अप्रैल 1827 – 28 नवंबर 1890) भारत के महान समाज सुधारक, विचारक, लेखक, दार्शनिक और सच्चे अर्थों में पहले क्रांतिकारी थे। उन्हें महात्मा की उपाधि गांधीजी से बहुत पहले मिल चुकी थी। वे स्त्री-शिक्षा, दलित-शोषितों के उत्थान और ब्राह्मणवादी वर्ण-व्यवस्था के खिलाफ जीवनभर संघर्ष करने वाले पहले व्यक्ति थे

 महात्मा ज्योतिबा गोविंदराव फुले (11 अप्रैल 1827 – 28 नवंबर 1890) भारत के महान समाज सुधारक, विचारक, लेखक, दार्शनिक और सच्चे अर्थों में पहले क्रांतिकारी थे। उन्हें महात्मा की उपाधि गांधीजी से बहुत पहले मिल चुकी थी। वे स्त्री-शिक्षा, दलित-शोषितों के उत्थान और ब्राह्मणवादी वर्ण-व्यवस्था के खिलाफ जीवनभर संघर्ष करने वाले पहले व्यक्ति थे। प्रमुख योगदान और क्रांतिकारी कार्य: स्त्री शिक्षा के जनक 1848 में पुणे में भारत की पहली बालिका पाठशाला खोली (पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ)। उस समय लड़कियों को पढ़ाना तो दूर, छूना भी पाप माना जाता था। ज्योतिबा-सावित्रीबाई पर पत्थर फेंके गए, गोबर फेंका गया, घर से निकाल दिया गया, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। शूद्रों-अतिशूद्रों का पहला मसीहा 1873 में ‘सत्यशोधक समाज’ की स्थापना की – इसका उद्देश्य था ब्राह्मण पुरोहितों के बिना, सत्य पर आधारित विवाह-संस्कार और सामाजिक सुधार। पहली बार शूद्रों-अतिशूद्रों को यह बताया कि वेद-पुराण तुम्हारे नहीं, तुम्हारा शोषण करने के लिए बनाए गए हैं। पहला किसान नेता 1888 में ‘शेतकऱ्यांचा आसुड’ (किसान का कोड़ा) लिखा – जिसमें अंग...

वोकल फ़ॉर लोकल” अभियान को बढ़ावा देता जयपुर की सुनीता का फटफटिया ब्राण्ड

 *“वोकल फ़ॉर लोकल” अभियान को बढ़ावा देता जयपुर की सुनीता का फटफटिया ब्राण्ड!* *श्रीनाथ दीक्षित, वरिष्ठ संवाददाता, दिल्ली* भारत देश विविध कलाओं और हुनरों का देश है! यह वो देश है जहाँ पर हर एक घर के अंदर रहने वाले सदस्यों में ही अलग-अलग कलाओं और हुनरों के महारथी आपको यूँ ही देखने को मिल जाएँगे। और, शायद देश के इन्हीं आम से दिखने वाले कलाकारों और हुनरबाज़ों की अद्भुत कलाओं और हुनरों को ना केवल देश में ही; बल्कि, पूरे विश्व-भर में एक अलग पहचान दिलाने के उद्देश्य से माननीय प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा “वोकल फ़ॉर लोकल” जैसे अभियानों का शुभारंभ किया गया है। तो, ऐसे में भारत सरकार के इसी अभियान को धरातल पर साकार करतीं नज़र आ रहीं हैं जयपुर की रहने वालीं सुनीता; जो कि पेशे से डिज़ाइनर हैं! और, इनका जो ब्राण्ड है; वो भी हम सभी के रोज़मर्रा के जीवन के एक बेहद ही महत्वपूर्ण पहलू को छूता हुआ नज़र आता है। जी! हाँ! यूँ तो, अमूमन अपनी आम ज़िंदगी में चाहे वो बच्चे हो, जवान हों या चाहे फिर वो बूढ़े ही क्यों ना हों! सभी ने कभी अपने जीवन में वो एक बेहद ख़ूबसूरत-से रंगों से सजे हुए उस फ...

मुंबई का काला दिन: 26/11 आतंकी हमला

 मुंबई का काला दिन: 26/11 आतंकी हमला  आज 26 नवंबर 2025 को, हम 26/11 मुंबई आतंकी हमलों की 17वीं बरसी मना रहे हैं। यह भारत के इतिहास का वह काला अध्याय है, जब पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादियों ने मुंबई को चार दिनों तक दहला दिया। इस हमले में 166 निर्दोष लोग शहीद हुए, जिनमें 18 सुरक्षाकर्मी शामिल थे, और 300 से अधिक घायल हुए। यह हमला न केवल मुंबई की आर्थिक राजधानी को लहूलुहान कर गया, बल्कि पूरे देश को सदमे में डाल दिया। हमले का संक्षिप्त समयरेखा 23 नवंबर 2008: आतंकी कराची से समुद्री रास्ते से एक भारतीय नाव हाईजैक करके मुंबई पहुंचे। उन्होंने नाव पर सवार चार भारतीयों की हत्या कर दी। 26 नवंबर की रात: रात करीब 8:30 बजे हमला शुरू हुआ। आतंकी छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसटी), ताज होटल, ओबरॉय ट्रिडेंट होटल, नरीमन हाउस (छाबड़ हाउस), लेपोल्ड कैफे, कामा अस्पताल, मेट्रो सिनेमा और गेटवे ऑफ इंडिया जैसे प्रमुख स्थानों पर पहुंचे। उन्होंने अंधाधुंध गोलीबारी, ग्रेनेड हमले और बंधक बनाने की घटनाएं कीं। सीएसटी पर दो आतंकियों ने 58 लोगों की हत्या की। ताज होटल में 31 लोग मारे गए, जहां ...

26 नवंबर 1949 को भारत की संविधान सभा ने भारतीय संविधान को औपचारिक रूप से अंगीकृत (adopted) किया था।

26 नवंबर 1949 को भारत की संविधान सभा ने भारतीय संविधान को औपचारिक रूप से अंगीकृत (adopted) किया था। यह वह ऐतिहासिक दिन था जब संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में संविधान पर हस्ताक्षर किए गए और इसे स्वीकृत घोषित किया गया। उस दिन संविधान पूरी तरह तैयार हो चुका था और इसे अपनाया गया। हालाँकि संविधान लागू (enforced/commenced) 26 जनवरी 1950 को हुआ था, जिसे हम गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। इसलिए संक्षेप में: 26 नवंबर 1949: भारतीय संविधान अंगीकृत/अपनाया गया 26 जनवरी 1950: भारतीय संविधान लागू हुआ इसी कारण हर साल 26 नवंबर को भारत में संविधान दिवस (Constitution Day या सम्विधान दिवस) के रूप में मनाया जाता है (यह परंपरा 2015 से आधिकारिक रूप से शुरू हुई थी)। 26 नवंबर 1949 को भारत की संविधान सभा ने भारत के संविधान को अपनाया था। यह दिन भारतीय संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। संविधान सभा और संविधान के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें - *संविधान सभा का गठन*: 1946 में कैबिनेट मिशन योजना के तहत संविधान सभा का गठन किया गया था। - *संविधान का मसौदा*: संविधान का मसौदा तैयार करने...

सशस्त्र सेना ध्वज दिन आइए, देश के सम्मान की रक्षा करने वालों का सम्मान करें!

*सशस्त्र सेना ध्वज दिन* *आइए, देश के सम्मान की रक्षा करने वालों का सम्मान करें!* 1949 से, 7 दिसंबर को पूरे देश में आर्म्ड फोर्सेज़ फ्लैग डे के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन उन शहीदों और वर्दी पहने सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने देश के सम्मान की रक्षा के लिए हमारी सीमाओं पर बहादुरी से लड़ाई लड़ी और लड़ रहे हैं। सैनिक किसी भी देश की सबसे बड़ी संपत्ति में से एक होते हैं। वे देश के रक्षक होते हैं और किसी भी हालात में नागरिकों की रक्षा करते हैं। अपनी ड्यूटी निभाने के लिए, सैनिकों ने अपनी ज़िंदगी में बहुत कुछ कुर्बान किया है। देश हमेशा इन बहादुर हीरो का कर्जदार रहेगा जिन्होंने मातृभूमि की सेवा में अपनी जान कुर्बान कर दी। यह हमारा कर्तव्य है कि हम न केवल उन शहीदों और जीवित हीरो का सम्मान करें जो ड्यूटी के दौरान घायल हो गए, बल्कि उनके परिवारों का भी सम्मान करें जो इस बलिदान का एक अहम हिस्सा हैं। केंद्र और राज्य स्तर पर सरकारी उपायों के अलावा, हमारे देश के हर नागरिक का सामूहिक कर्तव्य है कि वह देखभाल, मदद, पुनर्वास और आर्थिक मदद देने के लिए अपना निस्वार्थ और अपनी मर्...