सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला (19 दिसंबर 2025 को दिया गया, जो जनवरी 2026 में व्यापक रूप से चर्चित हुआ) ठीक वैसा ही है जैसा आपने बताया। मुख्य बिंदु: ओपन/जनरल कैटेगरी किसी के लिए रिजर्व नहीं है: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि "ओपन कैटेगरी" का मतलब ही "ओपन टू ऑल" है। ये सीटें किसी खास जाति, वर्ग या समुदाय के लिए रिजर्व नहीं हैं। ये पूरी तरह मेरिट पर आधारित हैं। मेरिट पर सेलेक्शन: अगर कोई रिजर्व्ड कैटेगरी (SC, ST, OBC, EWS) का उम्मीदवार बिना किसी रिलैक्सेशन या कंसेशन का फायदा उठाए जनरल कैटेगरी के कट-ऑफ से ज्यादा मार्क्स लाता है, तो उसे ओपन कैटेगरी की सीट पर चुना जा सकता है। उसे रिजर्व्ड कैटेगरी में ही सीमित नहीं किया जा सकता। रिजर्व्ड कैटेगरी के मेरिटोरियस उम्मीदवारों का हक: कोर्ट ने कहा कि सिर्फ रिजर्व्ड कैटेगरी का होने की वजह से ऐसे उम्मीदवार को ओपन सीट से बाहर रखना संविधान के आर्टिकल 14 और 16 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है। यह फैसला राजस्थान हाईकोर्ट के एक भर्ती मामले में आया, जहां हाईकोर्ट ने भी यही कहा था और सुप्रीम कोर्ट ने उसे बरकरार रखा। जस्टिस दीपांकर दत्त...