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शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE-2009) सभी सेक्शन की डिटेल में जानकारी shiksha ka adhikaar adhiniyam, 2009 (rtai-2009) sabhee sekshan kee ditel mein jaanakaaree शिक्षणाचा हक्क कायदा, 2009 (RTE-2009) सर्व कलमांचे सविस्तर स्पष्टीकरण

 शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE-2009) सभी सेक्शन की डिटेल में जानकारी

 


शिक्षणाचा हक्क कायदा, 2009 (RTE-2009)  सर्व कलमांचे सविस्तर स्पष्टीकरण

धारा 1 - संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ

क्या है: इस धारा में कानून का आधिकारिक नाम, यह कहां लागू होता है और कब से लागू हुआ, यह बताया गया है।

स्पष्टीकरण:

यह कानून "बच्चों का मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009" के रूप में जाना जाता है।

पूरे भारत में लागू होता है (जम्मू-कश्मीर को छोड़कर, जो बाद में जोड़ा गया)।

1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ।

उपयोग कैसे करें:

कानूनी शिकायत करते समय इस कानून का संदर्भ दें।

अपने राज्य में कानून लागू है या नहीं, यह जांचें।

स्कूल में प्रवेश से इनकार होने पर इस धारा का उल्लेख करके शिकायत करें।

धारा 2 - परिभाषाएं

क्या है: इस कानून में उपयोग किए गए महत्वपूर्ण शब्दों की परिभाषाएं।

मुख्य परिभाषाएं:

बालक: 6 से 14 वर्ष की आयु का लड़का या लड़की।

प्रारंभिक शिक्षा: कक्षा 1 से 8 तक की शिक्षा।

उपयुक्त सरकार: केंद्र/राज्य सरकार जो स्कूल के लिए जिम्मेदार है।

स्कूल: सरकारी, सरकारी अनुदानित या अनुदान न लेने वाली निजी स्कूल।

मान्यता प्राप्त स्कूल: नियमों के अनुसार मान्यता प्राप्त स्कूल।

उपयोग कैसे करें:

यदि आपके बच्चे की आयु 6-14 वर्ष है तो यह कानून लागू होता है।

किसी भी प्रकार के स्कूल (सरकारी/निजी) में प्रवेश मांग सकते हैं।

शिकायत करते समय सही अधिकारी (उपयुक्त सरकार) कौन है, यह समझें।

धारा 3 - मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार

क्या है: प्रत्येक 6-14 वर्ष की आयु के बालक को पड़ोस के स्कूल में मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का मौलिक अधिकार।

स्पष्टीकरण:

मुफ्त: कोई फीस, शुल्क या खर्च नहीं।

अनिवार्य: राज्य को प्रत्येक बालक के प्रवेश, उपस्थिति और शिक्षा पूरी करने की गारंटी देनी होगी।

पड़ोसी स्कूल: घर से 1 किमी (प्राथमिक) और 3 किमी (उच्च प्राथमिक) दूरी पर स्कूल।

उपयोग कैसे करें:

निकटतम स्कूल में प्रवेश मांगें - स्कूल इनकार नहीं कर सकता।

कोई फीस ली गई तो शिकायत करें।

वर्दी, किताबें, भोजन - सब मुफ्त मिलना चाहिए।

बच्चे के स्कूल छोड़ने की संभावना हो तो स्थानीय अधिकारियों से शिकायत करें।

उदाहरण: राजू का स्कूल घर से 2 किमी दूर है। यदि स्कूल ने प्रवेश से इनकार किया तो यह कानून का उल्लंघन है।

धारा 4 - आयु के अनुरूप प्रवेश (सीधा)

क्या है: 6 वर्ष से अधिक आयु के बच्चे को उसकी आयु के योग्य कक्षा में सीधा प्रवेश दिया जाए।

स्पष्टीकरण:

यदि 8 वर्ष के बच्चे ने कभी स्कूल नहीं देखा तो उसे कक्षा 3 में प्रवेश दिया जाए।

विशेष प्रशिक्षण से उसे अन्य बच्चों के बराबर लाया जाए।

3 महीने का विशेष प्रशिक्षण देने के बाद मुख्यधारा में शामिल किया जाए।

उपयोग कैसे करें:

यदि बच्चे ने कभी स्कूल नहीं देखा तो उसे कक्षा 1 में डालने की जरूरत नहीं।

आयु के अनुसार योग्य कक्षा में प्रवेश मांगें।

विशेष प्रशिक्षण की मांग करें।

बच्चे को "पीछे" कहकर व्यवहार न करें।

उदाहरण: 10 वर्ष की सीता पहली बार स्कूल आ रही है। उसे कक्षा 5 में सीधा प्रवेश दिया जाए और विशेष प्रशिक्षण दिया जाए।

धारा 5 - प्रमाणपत्र हस्तांतरण

क्या है: बच्चे ने एक स्कूल से दूसरे में स्थानांतरण किया तो नए स्कूल को तुरंत प्रवेश देना होगा।

स्पष्टीकरण:

प्रमाणपत्र न मिलने पर भी प्रवेश दिया जाए।

पिछले स्कूल का प्रमाणपत्र बाद में प्राप्त किया जा सकता है।

प्रवेश रोका नहीं जा सकता।

प्रवासी मजदूरों, घुमंतू जनजातियों के बच्चों के लिए विशेष महत्व।

उपयोग कैसे करें:

एक गांव से दूसरे में जाने पर तुरंत नए स्कूल में प्रवेश लें।

प्रमाणपत्र न होने पर भी प्रवेश मांगें - स्कूल इनकार नहीं कर सकता।

पिछले स्कूल के रिकॉर्ड बाद में प्राप्त करें।

प्रवासी मजदूरों के बच्चे इस सुविधा का लाभ उठाएं।

उदाहरण: रमेश के पिता निर्माण कार्य के लिए मुंबई से पुणे आए। रमेश को तुरंत पुणे के स्कूल में प्रवेश मिलना चाहिए।

धारा 6 - स्कूल स्थापना

क्या है: उपयुक्त सरकार को 3 वर्ष के अंदर प्रत्येक इलाके में स्कूल स्थापित करना या मान्यता देना आवश्यक।

स्पष्टीकरण:

पड़ोसी क्षेत्र में स्कूल न होने पर सरकार को स्थापित करना होगा।

निजी स्कूलों को मान्यता देकर सुविधाएं बढ़ानी होंगी।

अनुसूची में दिए गए मानकों की पूर्ति आवश्यक।

3 वर्ष के अंदर (2013 तक) यह सुविधा उपलब्ध करानी होगी।

उपयोग कैसे करें:

अपने इलाके में स्कूल न होने पर स्थानीय प्रशासन से लिखित मांग करें।

ग्रामसभा में, अभिभावक समिति में इस मुद्दे पर चर्चा करें।

शिक्षा अधिकारियों से सामूहिक आवेदन जमा करें।

RTI से स्कूल स्थापना के बारे में जानकारी लें।

धारा 7 - वित्तीय और अन्य जिम्मेदारियां

क्या है: सरकार और स्थानीय प्राधिकरणों को RTE लागू करने के लिए वित्तीय और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने होंगे।

स्पष्टीकरण:

केंद्र और राज्य सरकार को फंड उपलब्ध कराना होगा।

मुफ्त शिक्षा के लिए बजट प्रावधान करना होगा।

बुनियादी सुविधाएं, शिक्षक, सामग्री के लिए खर्च करना होगा।

वित्तीय भार का बंटवारा (केंद्र-राज्य) करना होगा।

उपयोग कैसे करें:

स्कूल में बुनियादी सुविधाएं न होने पर शिकायत करें।

बजट प्रावधानों के बारे में जानकारी मांगें (RTI)।

अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) से दबाव डालें।

शिक्षा अधिकारियों से फंड उपलब्धता के बारे में पूछें।

धारा 8 - सरकार की जिम्मेदारियां

क्या है: उपयुक्त सरकार की विभिन्न जिम्मेदारियां।

मुख्य जिम्मेदारियां:

प्रत्येक बालक को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराना।

वंचित समूहों को प्राथमिकता देना।

स्कूलों के बीच की दूरी कम करना (विशेष रूप से SC/ST/पिछड़े क्षेत्रों में)।

शिक्षकों का प्रशिक्षण।

शैक्षणिक कैलेंडर तैयार करना।

गुणवत्ता और मानकों की निगरानी।

वंचित बालकों की पहचान और प्रवेश।

प्रवेश, उपस्थिति और शिक्षा पूरी करने को सुनिश्चित करना।

उपयोग कैसे करें:

बच्चे को प्रवेश न मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत करें।

यदि वंचित समूह से हैं तो विशेष प्राथमिकता की मांग करें।

शिक्षकों का प्रशिक्षण हुआ है या नहीं, जांच करें।

स्कूल की गुणवत्ता के बारे में शिक्षा विभाग को सूचित करें।

धारा 9 - स्थानीय प्राधिकरण की जिम्मेदारियां

क्या है: स्थानीय स्तर पर (ग्राम पंचायत, नगर पालिका) की जिम्मेदारियां।

मुख्य जिम्मेदारियां:

स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों की सूची तैयार करना।

उन्हें प्रवेश देने के प्रयास करना।

बच्चे की उपस्थिति पर नजर रखना।

बच्चों को स्कूल छोड़ने से रोकना।

स्कूल प्रबंधन समिति की स्थापना।

स्कूल की सुविधाओं का नियमन और निगरानी।

उपयोग कैसे करें:

इलाके में स्कूल न जाने वाले बच्चों की जानकारी ग्राम सेवक को दें।

ग्राम पंचायत/नगर पालिका में शिक्षा पर चर्चा करें।

स्कूल प्रबंधन समिति में भाग लें।

स्थानीय प्राधिकरण को जवाबदेह बनाएं।

धारा 10 - माता-पिता और अभिभावकों की जिम्मेदारियां

क्या है: अभिभावकों को बच्चे को स्कूल भेजना और उसकी शिक्षा की जिम्मेदारी लेना।

स्पष्टीकरण:

6 से 14 वर्ष की आयु के बालक को स्कूल में प्रवेश दिलाना।

नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना।

प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के लिए प्रोत्साहित करना।

यह केवल जैविक माता-पिता ही नहीं, बल्कि कानूनी अभिभावक और संरक्षकों पर भी लागू।

उपयोग कैसे करें:

बच्चे को नियमित स्कूल भेजें।

बीमारी के समय स्कूल को सूचित करें।

अभिभावक-शिक्षक बैठक में भाग लें।

बच्चे की शैक्षणिक प्रगति पर नजर रखें।

आर्थिक कठिनाई होने पर सरकारी स्कूल में प्रवेश लें (मुफ्त)।

महत्वपूर्ण: बच्चे को स्कूल न भेजना अभिभावकों की जिम्मेदारी न निभाना है।

धारा 11 - स्कूल पूर्व शिक्षा प्रावधान

क्या है: 3 वर्ष पूर्ण होने तक बालक के लिए प्रारंभिक बाल देखभाल और शिक्षा।

स्पष्टीकरण:

3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी/बालवाड़ी।

स्कूल शिक्षा के लिए तैयारी।

इस धारा का RTE कानून में समावेश है लेकिन अलग योजनाओं के तहत कार्यान्वयन।

ICDS (एकीकृत बाल विकास सेवा) योजना से संबंधित।

उपयोग कैसे करें:

3-6 वर्ष की आयु के बच्चे के लिए आंगनवाड़ी में प्रवेश लें।

बालवाड़ी की सुविधाओं के बारे में स्थानीय प्राधिकरण से पूछें।

स्कूल पूर्व शिक्षा का लाभ उठाकर बच्चे को स्कूल के लिए तैयार करें।

धारा 12 - स्कूलों की जिम्मेदारी

क्या है: स्कूलों और स्कूल प्रबंधन को RTE कानून का कार्यान्वयन करना।

मुख्य जिम्मेदारियां:

पड़ोसी सभी बालकों को प्रवेश देना।

अनुसूची में दिए गए मानकों की पूर्ति।

RTE कानून का पालन।

गुणवत्ता वाली शिक्षा देना।

किसी भेदभाव के बिना सभी बच्चों को समान व्यवहार।

उपयोग कैसे करें:

स्कूल RTE का पालन कर रहा है या नहीं, जांचें।

स्कूल ने प्रवेश से इनकार किया तो इस धारा का उल्लेख करें।

स्कूल के मानकों के बारे में शिकायत करें।

स्कूल प्रबंधन समिति से स्कूल को जवाबदेह बनाएं।

धारा 13 - प्रवेश फीस और परीक्षा पद्धति पर प्रतिबंध

क्या है: प्रवेश के लिए कोई फीस नहीं ली जा सकती और प्रवेश परीक्षा नहीं ली जा सकती।

स्पष्टीकरण:

प्रवेश शुल्क नहीं: कैपिटेशन फीस, दान, बिल्डिंग फंड आदि नहीं।

परीक्षा नहीं: बच्चे या अभिभावकों की साक्षात्कार/परीक्षा नहीं।

भेदभाव नहीं: प्रवेश से इनकार करने के लिए परीक्षा का उपयोग नहीं किया जा सकता।

यह सभी स्कूलों (सरकारी और निजी) पर लागू।

उपयोग कैसे करें:

प्रवेश के लिए कोई शुल्क न दें।

स्कूल ने फीस मांगी तो लिखित रूप से इनकार करें और शिकायत करें।

प्रवेश परीक्षा ली तो शिक्षा विभाग से शिकायत करें।

इस धारा का उल्लंघन गंभीर है - कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

उदाहरण: निजी स्कूल ने "डेवलपमेंट फीस" ₹50,000 मांगी, यह अवैध है।

धारा 14 - प्रवेश के लिए आयु का प्रमाण

क्या है: प्रवेश के लिए आयु का प्रमाण सरल होना चाहिए, कठोर नियम नहीं।

स्पष्टीकरण:

जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध हो तो पर्याप्त।

न होने पर कोई वैध प्रमाण (स्वास्थ्य कार्ड, आधार, स्कूल रिकॉर्ड)।

प्रमाण न होने पर प्रवेश रोका नहीं जा सकता।

स्व-घोषणा भी मान्य।

उपयोग कैसे करें:

जन्म प्रमाणपत्र न होने पर तुरंत प्राप्त करें (तहसील कार्यालय/नगर पालिका)।

अन्य प्रमाण (टीकाकरण कार्ड, आधार) प्रस्तुत करें।

स्कूल ने इनकार किया तो स्व-घोषणा जमा करें।

आयु के प्रमाण की कमी से बच्चा स्कूल से बाहर न रहे।

धारा 15 - प्रवेश से इनकार पर प्रतिबंध

क्या है: किसी भी स्कूल को प्रवेश से इनकार नहीं किया जा सकता।

स्पष्टीकरण:

पड़ोसी स्कूल को सभी बालकों को प्रवेश देना होगा।

सीट न होने का बहाना नहीं चलेगा।

प्रवेश से इनकार RTE का उल्लंघन।

स्कूल पर दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है।

उपयोग कैसे करें:

प्रवेश से इनकार होने पर लिखित कारण मांगें।

ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO)/जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से शिकायत करें।

स्कूल प्रबंधन समिति को सूचित करें।

RTE धारा 3 और 15 का उल्लंघन दर्ज करें।

कानूनी कार्रवाई: प्रवेश से इनकार होने पर स्कूल पर जुर्माना (धारा 18 के अनुसार मान्यता रद्द भी संभव)।

धारा 16 - पीछे रखने और निष्कासन पर प्रतिबंध

क्या है: प्रारंभिक शिक्षा में किसी बच्चे को कक्षा में पीछे नहीं रखा जा सकता या स्कूल से निकाला नहीं जा सकता।

स्पष्टीकरण:

कक्षा 1 से 8 तक बच्चे को फेल नहीं किया जा सकता।

स्कूल से निष्कासित नहीं किया जा सकता।

परीक्षा पास न होने पर भी अगली कक्षा में प्रवेश।

निरंतर और व्यापक मूल्यांकन (CCE) किया जाए।

उपयोग कैसे करें:

बच्चे को फेल घोषित किया तो स्कूल को आपत्ति दर्ज करें।

निष्कासन की धमकी दी तो लिखित शिकायत करें।

सीखने में कठिनाई होने पर विशेष मदद मांगें (फेल नहीं)।

यह बच्चे के आत्मविश्वास के लिए महत्वपूर्ण।

महत्वपूर्ण: बच्चे को मानसिक तनाव न देकर सीखने का अवसर दें।

धारा 17 - शारीरिक सजा और मानसिक उत्पीड़न पर प्रतिबंध

क्या है: स्कूल में बच्चे को शारीरिक सजा या मानसिक उत्पीड़न नहीं दिया जा सकता।

स्पष्टीकरण:

मारपीट, बेंत, थप्पड़ नहीं।

अपमान, गाली, धमकी नहीं।

कक्षा से बाहर खड़ा करना, कान खींचना, मुक्का मारना - बंद।

बच्चे का सम्मान और प्रतिष्ठा बनाए रखें।

उपयोग कैसे करें:

शिक्षक ने मारपीट की तो स्कूल प्रधान से शिकायत करें।

प्रधान ने कार्रवाई न की तो शिक्षा अधिकारी से लिखित शिकायत जमा करें।

पुलिस शिकायत भी की जा सकती है (IPC धारा 323, 350)।

चिकित्सा जांच कराकर प्रमाण संरक्षित करें।

बच्चे को मानसिक सलाह उपलब्ध कराएं।

कानूनी परिणाम: शिक्षक पर अनुशासनात्मक कार्रवाई, निलंबन, नौकरी से निकालना संभव।

धारा 18 - स्कूल स्थापना के लिए मान्यता

क्या है: किसी भी स्कूल को मान्यता लेना आवश्यक, अन्यथा चलाया नहीं जा सकता।

स्पष्टीकरण:

नया स्कूल शुरू करने से पहले मान्यता आवश्यक।

अनुसूची में दिए गए मानकों को पूरा करना।

मान्यता के बिना स्कूल चलाना अपराध।

मान्यता रद्द होने पर स्कूल बंद करना।

उपयोग कैसे करें:

बच्चे का प्रवेश करने से पहले स्कूल मान्यता प्राप्त है या नहीं जांचें।

शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर सूची देखें।

मान्यता न होने वाले स्कूल में प्रवेश से बचें।

यदि स्कूल अवैध रूप से चल रहा है तो शिकायत करें।

नोट: स्कूल चलाने वालों को मान्यता प्रमाणपत्र प्रदर्शित करना अनिवार्य।

धारा 19 - स्कूल के लिए मानक और मापदंड

क्या है: स्कूल को विशिष्ट मानकों को पूरा करना आवश्यक (अनुसूची में दिए गए)।

मुख्य मानक:

पर्याप्त जगह - मैदान, खेल का मैदान, कक्षाएं।

शौचालय - लड़कों और लड़कियों के लिए अलग।

सुरक्षित पीने का पानी।

रसोईघर (मध्याह्न भोजन के लिए)।

पुस्तकालय।

पर्याप्त शिक्षक (विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात)।

खेल सामग्री और सीखने के साधन।

कक्षाएं - हवादार और प्रकाशित।

स्कूल की दीवार/कंपाउंड।

विकलांग बच्चों के लिए सुविधाएं (रैंप आदि)।

उपयोग कैसे करें:

स्कूल में ये सुविधाएं हैं या नहीं जांचें।

कमी पाए जाने पर स्कूल प्रबंधन समिति में उठाएं।

ब्लॉक/जिला शिक्षा अधिकारी से लिखित शिकायत जमा करें।

RTI से स्कूल का निरीक्षण रिपोर्ट मांगें।

सोशल मीडिया, मीडिया से जनजागृति करें।

महत्वपूर्ण: इन मानकों की पूर्ति न करने पर स्कूल की मान्यता रद्द हो सकती है।

धारा 20 - अनुसूची में संशोधन का अधिकार

क्या है: उपयुक्त सरकार को अनुसूची में मानकों में बदलाव करने का अधिकार।

स्पष्टीकरण:

नई जरूरतों के अनुसार मानक बदल सकते हैं।

केवल बढ़ा सकते हैं, कम नहीं कर सकते।

शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए।

राज्य विधानमंडल की मंजूरी आवश्यक।

उपयोग कैसे करें:

नए मानक घोषित होने पर जानकारी लें।

स्कूलों ने नए नियमों का पालन किया है या नहीं जांचें।

संशोधनों के बारे में सुझाव दें।

जन सुनवाई में भाग लें।

धारा 21 - स्कूल प्रबंधन समिति (SMC)

क्या है: प्रत्येक स्कूल में अभिभावक और शिक्षकों की प्रबंधन समिति होना आवश्यक।

स्पष्टीकरण:

समिति में 75% अभिभावक-स्थानीय प्राधिकरण सदस्य।

50% महिला सदस्य।

वंचित समूहों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व।

स्कूल के कार्यों की समीक्षा।

शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सुझाव।

SMC के कार्य:

स्कूल विकास योजना तैयार करना।

मध्याह्न भोजन की निगरानी।

स्कूल फंड की समीक्षा।

शिक्षकों की उपस्थिति जांचना।

बच्चों के सीखने के परिणामों पर नजर।

उपयोग कैसे करें:

SMC के सदस्य बनें - सक्रिय भाग लें।

मासिक बैठक में नियमित उपस्थित रहें।

स्कूल की समस्याएं समिति के सामने रखें।

SMC न होने पर शिक्षा विभाग से शिकायत करें।

निर्णय प्रक्रिया में शामिल हों।

महत्वपूर्ण: SMC अभिभावकों के सशक्तिकरण का साधन - इसका पूर्ण उपयोग करें।

धारा 22 - स्कूल विकास योजना (School Development Plan)

क्या है: स्कूल प्रबंधन समिति को हर साल स्कूल की विकास योजना तैयार करनी होगी।

स्पष्टीकरण:

स्कूल की जरूरतों की योजना।

बुनियादी सुविधाओं में सुधार।

शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाना।

वित्तीय योजना।

स्थानीय अधिकारियों को जमा करना।

योजना में क्या होना चाहिए:

स्कूल की वर्तमान स्थिति।

आवश्यक सुधार।

शैक्षणिक उद्देश्य।

वित्तीय जरूरतें।

कार्यान्वयन का समय सारिणी।

उपयोग कैसे करें:

SMC बैठक में योजना तैयार करने में भाग लें।

स्कूल की जरूरतें पहचानें और नोट करें।

योजना का कार्यान्वयन हुआ या नहीं जांचें।

योजना को सार्वजनिक स्थान (स्कूल में) प्रदर्शित करें।

ग्रामसभा/नगर पालिका में चर्चा करके फंड प्राप्त करें।

धारा 23 - शिक्षक नियुक्ति, योग्यता और शर्तें

क्या है: शिक्षकों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता और सेवा शर्तें।

न्यूनतम योग्यता:

B.Ed या D.Ed (डिप्लोमा इन एजुकेशन)।

सरकार द्वारा निर्धारित योग्यता (NCTE के अनुसार)।

TET (Teacher Eligibility Test) उत्तीर्ण।

अन्य शर्तें:

पारदर्शक नियुक्ति प्रक्रिया।

उचित वेतन और सुविधाएं।

नियमित शिक्षक (अस्थायी नहीं)।

स्थानीय शिक्षकों को प्राथमिकता।

उपयोग कैसे करें:

स्कूल में शिक्षकों की योग्यता जांचें।

अयोग्य शिक्षक होने पर शिकायत करें।

SMC से शिक्षकों की गुणवत्ता की समीक्षा करें।

अस्थायी शिक्षकों की बजाय नियमित शिक्षकों की मांग करें।

धारा 24 - शिक्षकों की जिम्मेदारियां

क्या है: शिक्षकों को पालन करने वाली आचार संहिता और जिम्मेदारियां।

मुख्य जिम्मेदारियां:

नियमित और समय पर उपस्थित रहना।

पाठ्यक्रम पूरा करना।

प्रत्येक बच्चे के सीखने के परिणाम पूरे करना।

नियमित मूल्यांकन करना।

अभिभावकों से संवाद।

स्कूल और SMC को सहयोग।

शिक्षा सत्र का पूर्ण समय सारिणी पालन।

न करने वाली चीजें:

निजी ट्यूशन (उसी स्कूल के विद्यार्थियों को)।

गैर-शैक्षणिक कार्य।

भेदभाव।

उपयोग कैसे करें:

शिक्षक नियमित नहीं आते तो जांचें (उपस्थिति रजिस्टर)।

पाठ्यक्रम पूरा नहीं होता तो SMC को सूचित करें।

शिक्षक निजी ट्यूशन लेते हैं तो जांचें (धारा 28 का उल्लंघन)।

शिकायतें लिखित रूप में स्कूल प्रधान से करें।

धारा 25 - विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात (PTR)

क्या है: विशिष्ट विद्यार्थी संख्या पर निर्धारित शिक्षक होना आवश्यक।

निर्धारित अनुपात:

कक्षा 1-5: 30 विद्यार्थियों पर 1 शिक्षक।

कक्षा 6-8: 35 विद्यार्थियों पर 1 शिक्षक।

विषयवार शिक्षक (गणित, विज्ञान, सामाजिक, भाषा)।

शारीरिक शिक्षा और कला शिक्षक।

स्पष्टीकरण:

शिक्षकों की संख्या कम होने पर गुणवत्ता गिरती है।

प्रत्येक बच्चे को उचित ध्यान मिले।

विषय विशेषज्ञ शिक्षक हों।

उपयोग कैसे करें:

स्कूल में विद्यार्थी संख्या और शिक्षक संख्या गिनें।

अनुपात सही न होने पर लिखित शिकायत करें।

SMC से अधिक शिक्षकों की मांग करें।

शिक्षा अधिकारियों से निरंतर फॉलो-अप करें।

उदाहरण: स्कूल में 90 विद्यार्थी लेकिन केवल 2 शिक्षक = धारा 25 का उल्लंघन।

धारा 26 - शिक्षक रिक्त पद भरना

क्या है: शिक्षकों के रिक्त पदों को 6 महीने के अंदर भरना आवश्यक।

स्पष्टीकरण:

शिक्षक सेवानिवृत्त/छुट्टी/ट्रांसफर होने पर तुरंत नियुक्ति।

6 महीने से अधिक समय पद रिक्त नहीं रखा जा सकता।

अस्थायी व्यवस्था करना आवश्यक।

शिक्षा की गुणवत्ता न गिरे।

उपयोग कैसे करें:

शिक्षक रिक्त पद पर न होने पर समय नोट करें।

6 महीने बीतने पर शिकायत करें।

SMC से प्रशासन पर दबाव डालें।

RTI से नियुक्ति प्रक्रिया की जानकारी मांगें।

धारा 27 - गैर-शैक्षणिक प्रयोजनों पर प्रतिबंध

क्या है: शिक्षकों को शिक्षा के अलावा कार्य करने पर मजबूर नहीं किया जा सकता।

प्रतिबंधित कार्य:

चुनाव ड्यूटी (जनगणना को छोड़कर)।

आपदा प्रबंधन (शिक्षा को छोड़कर)।

शराब नीति, पल्स पोलियो (शिक्षा संबंधित कार्यक्रम को छोड़कर)।

अनुमति वाले कार्य:

जनगणना।

शैक्षणिक सर्वेक्षण।

मतदाता सूची अपडेट (स्कूल कार्य के रूप में)।

स्पष्टीकरण:

शिक्षकों का मुख्य उद्देश्य पढ़ाना।

अन्य कार्यों से शिक्षा प्रभावित होती है।

बच्चों का अधिकार संरक्षित करना।

उपयोग कैसे करें:

शिक्षक स्कूल में न होने पर कारण पूछें।

निरंतर गैर-शैक्षणिक कार्य में होने पर शिकायत करें।

प्रशासन शिक्षकों को अनावश्यक न बुलाए।

SMC से शिक्षकों की स्कूल उपस्थिति मापें।

धारा 28 - निजी ट्यूशन पर प्रतिबंध

क्या है: शिक्षक अपने स्कूल के विद्यार्थियों को निजी ट्यूशन नहीं दे सकते।

स्पष्टीकरण:

हितों का टकराव।

कक्षा में जानबूझकर कम पढ़ाना और ट्यूशन में पढ़ाना - अनैतिक।

बच्चों और अभिभावकों पर आर्थिक दबाव।

स्कूल समय का दुरुपयोग।

अनुमति:

अन्य स्कूल के विद्यार्थियों को पढ़ा सकते हैं।

अपनी स्कूल नहीं तो अनुमति।

उपयोग कैसे करें:

शिक्षक अपने स्कूल के बच्चों को ट्यूशन देते हैं तो शिकायत करें।

प्रमाण (फीस रसीदें, अन्य अभिभावकों की गवाही) इकट्ठा करें।

स्कूल प्रधान/BEO से लिखित शिकायत।

अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।

महत्वपूर्ण: स्कूल में सभी विषय अच्छे से पढ़ाए जाएं तो ट्यूशन की जरूरत न पड़े।

धारा 29 - पाठ्यक्रम और मूल्यांकन

क्या है: पाठ्यक्रम संतुलित और बालमित्र होना चाहिए, मूल्यांकन निरंतर हो।

स्पष्टीकरण:

पाठ्यक्रम बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए।

NCERT/राज्य पाठ्यक्रम का पालन।

निरंतर और व्यापक मूल्यांकन (CCE) - परीक्षाओं पर जोर नहीं।

अतिरिक्त किताबें, भारी बैग से बचें।

शिक्षा आनंददायक हो।

मूल्यांकन के प्रकार:

दैनिक कक्षा निरीक्षण।

प्रोजेक्ट, होमवर्क।

मौखिक परीक्षा।

वर्षांत परीक्षा (निर्णायक नहीं)।

उपयोग कैसे करें:

बच्चे का बैग भारी होने पर स्कूल को आपत्ति दर्ज करें।

पाठ्यक्रम से बाहर किताबें थोपी गईं तो शिकायत करें।

केवल अंकों पर नहीं, सीखने की प्रगति पर ध्यान दें।

शिक्षकों से नियमित फीडबैक मांगें।

धारा 30 - परीक्षा और पूर्णता प्रमाणपत्र

क्या है: कक्षा 8 पूरी करने पर प्रमाणपत्र देना।

स्पष्टीकरण:

प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने का प्रमाण।

आगे की शिक्षा के लिए आवश्यक।

बोर्ड परीक्षा नहीं (केवल स्कूल स्तर पर)।

स्कूल को प्रमाणपत्र देना आवश्यक।

उपयोग कैसे करें:

कक्षा 8 पूरी होने पर प्रमाणपत्र मांगें।

खोने पर डुप्लिकेट प्राप्त करें।

माध्यमिक शिक्षा के लिए आवश्यक।

स्कूल बदलते समय साथ लें।

धारा 31 - बालक के अधिकारों का संरक्षण

क्या है: बालक के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रावधान।

स्पष्टीकरण:

किसी प्रकार का शोषण नहीं।

बालक का सम्मान।

सुरक्षित वातावरण।

भेदभाव रहित शिक्षा।

बाल अधिकार आयोग की भूमिका।

संरक्षण के क्षेत्र:

शारीरिक सुरक्षा।

भावनात्मक सुरक्षा।

शैक्षणिक अधिकार।

समानता और न्याय।

उपयोग कैसे करें:

बच्चे के अधिकारों का उल्लंघन होने पर शिकायत करें।

राज्य/राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग से संपर्क करें।

बाल कल्याण समिति (CWC) से शिकायत करें।

कानूनी मदद लें।

धारा 32 - शिकायतों का निवारण

क्या है: इस कानून के कार्यान्वयन में उत्पन्न शिकायतों का निवारण करने का अधिकार।

स्पष्टीकरण:

केंद्र/राज्य सरकार को शिकायतें सुलझाने का अधिकार।

स्पष्टीकरण जारी करना।

नए दिशानिर्देश।

कानून की भावना के अनुसार निर्णय।

उपयोग कैसे करें:

कानून के अर्थ में संदेह होने पर स्पष्टीकरण मांगें।

सरकार के दिशानिर्देश पढ़ें।

RTI से आधिकारिक स्पष्टीकरण प्राप्त करें।

धारा 33 - राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की स्थापना

क्या है: केंद्र सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर सलाहकार परिषद स्थापित करना।

कार्य:

RTE कार्यान्वयन की समीक्षा।

केंद्र सरकार को सलाह।

नीतिगत मार्गदर्शन।

राज्यों में समन्वय।

वार्षिक रिपोर्ट तैयार करना।

सदस्य:

शिक्षा विशेषज्ञ।

बाल अधिकार कार्यकर्ता।

सरकारी अधिकारी।

शिक्षक संघ प्रतिनिधि।

अभिभावक प्रतिनिधि।

उपयोग कैसे करें:

राष्ट्रीय स्तर की समस्याएं परिषद को भेजें।

परिषद के रिपोर्ट पढ़ें और अध्ययन करें।

नीतिगत बदलावों के लिए सुझाव भेजें।

धारा 34 - राज्य सलाहकार परिषद की स्थापना

क्या है: प्रत्येक राज्य में सलाहकार परिषद स्थापित करना।

कार्य:

राज्य में RTE कार्यान्वयन की समीक्षा।

राज्य सरकार को सलाह।

स्थानीय समस्याओं का समाधान।

जिला स्तर पर समन्वय।

वार्षिक रिपोर्ट राज्य सरकार को।

उपयोग कैसे करें:

राज्य की शैक्षणिक समस्याएं परिषद को भेजें।

परिषद की बैठक में भाग (नागरिक के रूप में)।

परिषद के रिपोर्ट RTI से प्राप्त करें।

स्थानीय स्तर पर दबाव समूह बनाएं।

धारा 35 - निर्देश देने का अधिकार

क्या है: उपयुक्त सरकार को स्कूलों और स्थानीय प्राधिकरणों को निर्देश देने का अधिकार।

स्पष्टीकरण:

कानून का पूर्ण कार्यान्वयन करने के लिए।

आदेश जारी करना।

अनुपालन सुनिश्चित करना।

दंडात्मक कार्रवाई।

उपयोग कैसे करें:

स्कूल कानून का पालन न करे तो सरकार से निर्देश जारी करने की मांग करें।

प्रशासकीय निर्देश मिले या नहीं जांचें।

निर्देशों का कार्यान्वयन हुआ या नहीं फॉलो-अप करें।

धारा 36 - मुकदमा चलाने के लिए पूर्व अनुमति

क्या है: RTE उल्लंघन के लिए मुकदमा दाखिल करने से पहले उपयुक्त सरकार की अनुमति आवश्यक।

स्पष्टीकरण:

तुच्छ शिकायतों से संरक्षण।

गंभीर मामलों में न्यायालयीय कार्रवाई।shiksha ka adhikaar adhiniyam, 2009 (rtai-2009) sabhee sekshan kee ditel mein jaanakaaree   

फाइलिंग से पहले प्रशासकीय स्तर पर प्रयास।

अधिकारियों का संरक्षण (सद्भाव से कार्य करने पर)।

उपयोग कैसे करें:

पहले प्रशासकीय शिकायत करें।

संतोषजनक कार्रवाई न होने पर न्यायालय जाएं।

सरकार की पूर्व अनुमति लें।

कानूनी सलाह लें।

धारा 37 - सद्भाव से की गई कार्रवाई का संरक्षण

क्या है: सद्भाव से की गई कार्रवाई के लिए अधिकारियों को कानूनी संरक्षण।

स्पष्टीकरण:

कानून कार्यान्वयन में की गई गलती।

जानबूझकर गलत व्यवहार नहीं।

ईमानदारी से लिए गए निर्णय।

कर्मचारियों का संरक्षण।

उपयोग कैसे करें:

अधिकारियों ने गलत व्यवहार किया तो जानबूझकर था या नहीं जांचें।

सद्भाव की कार्रवाई होने पर अलग दृष्टिकोण।

दुर्भावनापूर्ण होने पर कानूनी उपाय।

धारा 38 - नियम बनाने का अधिकार

क्या है: उपयुक्त सरकार को RTE कार्यान्वयन के लिए नियम बनाने का अधिकार।

नियम क्या हो सकते हैं:

प्रवेश प्रक्रिया।

आयु प्रमाण स्वीकारना।

स्कूल मान्यता प्रक्रिया।

शिक्षकों की योग्यता और नियुक्ति।

SMC की स्थापना और कार्य।

RTE 2009 (शिक्षा का अधिकार कानून) कार्यान्वयन न होने पर निम्न स्थानों पर शिकायत की जा सकती है — (क्रम से / एक साथ भी कर सकते हैं):

स्कूल स्तर

प्रधानाध्यापक / संस्था प्रमुख

लिखित शिकायत और प्राप्ति रसीद लें।

शिक्षा विभाग (स्थानीय)

ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) – प्राथमिक

शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक / माध्यमिक), जिला परिषद

प्रवेश से इनकार, फीस ली, सुविधाएं न होना आदि के लिए।

शिक्षा उप निदेशक (DyDE)

जिला/विभागीय स्तर पर गंभीर या लंबित मामलों के लिए।

RTE शिकायत पोर्टल / शिक्षा विभाग

राज्य शिक्षा विभाग से ऑनलाइन/लिखित शिकायत।

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (SCPCR)

बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन (प्रवेश से इनकार, भेदभाव, उत्पीड़न, RTE उल्लंघन)।

जिलाधिकारी (Collector)

प्रशासकीय लापरवाही, आदेशों का कार्यान्वयन न होना।

लोक शिक्षा निदेशक / शिक्षा आयुक्त

नीतिगत या बार-बार उल्लंघन वाले मामले।

सूचना का अधिकार (RTI)

प्रवेश सूची, RTE कोटा, खर्च, मान्यता, निरीक्षण रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए

सूचना न देने पर पहली अपील → राज्य सूचना आयोग।

पुलिस शिकायत

धमकी, फर्जी दस्तावेज, आर्थिक धोखाधड़ी, उत्पीड़न होने पर (IPC लागू)।

न्यायालय

उच्च न्यायालय (रिट याचिका) – गंभीर और निरंतर उल्लंघन के लिए।

उपयोगी टिप्स:

शिकायत हमेशा लिखित, प्रमाणों के साथ (आवेदन, रसीद, फोटो, व्हाट्सएप/ईमेल)।

तारीख, धारा संख्या (RTE) स्पष्ट रूप से उल्लेख करें।

एक साथ शिक्षा अधिकारी + SCPCR + RTI जैसा दबावपूर्ण तरीका प्रभावी होता है।🙏

नोट.....👇

सूचना का अधिकार (RTI) के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी

👉 सूचना का अधिकार (RTI) – राइट टू इंफॉर्मेशन

👉 RTI कार्यकर्ता के लिए उपयोगी जानकारी

नोट............... 👇

👉 सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अनुसार, RTI आवेदन हिंदी, अंग्रेजी या उस क्षेत्र की आधिकारिक भाषा में दाखिल किया जा सकता है।

👉 यह हर आम नागरिक का मौलिक अधिकार है, जो लोकतंत्र को मजबूत बनाता है।

👉 आप भारत के सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सरकारी विभागों से सूचना मांग सकते हैं।

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👉 संपादक एवं लेखक: समाज सेवक, RTI कार्यकर्ता

👉 श्री दयाशंकर गुप्ता जी

👉 नमस्कार चमत्कार 👈

👉 मेरा देश मेरा वतन समाचार 👈

👉 बुलंद आवाज न्यूज़ 👈

👉 दया की सोच 

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दोस्तों, उम्मीद है कि आपने यह जानकारी अंत तक पढ़ी होगी और यह आपको बहुत पसंद आई होगी। अगर लिखने में कोई गलती हुई हो तो क्षमा करें, हम इसके लिए माफी मांगते हैं। कृपया इस पोस्ट को लाइक करें, शेयर करें और जनहित एवं लोकहित के लिए आगे बढ़ाएं। 🙏 धन्यवाद 🙏

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shiksha ka adhikaar adhiniyam, 2009 (rtai-2009) sabhee sekshan kee ditel mein jaanakaaree   

Section 1 - Short Title, Extent and Commencement

What it is: This section states the official name of the Act, where it applies, and from when it came into effect.

Explanation:

This Act is known as "The Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009"

Applies throughout India (except Jammu and Kashmir, which was later included)

Came into force from April 1, 2010

How to use it:

Refer to this Act in legal complaints

Check if the law applies in your state

If admission is denied in a school, mention this section in the complaint

Section 2 - Definitions

What it is: Definitions of important terms used in the Act.

Key Definitions:

Child: A boy or girl in the age group of 6 to 14 years

Elementary Education: Education from Class 1 to Class 8

Appropriate Government: Central/State Government responsible for the school

School: Government, government-aided, or unaided private school

Recognized School: School recognized as per rules

How to use it:

If your child is between 6-14 years, this Act applies

Admission can be sought in any type of school (government/private)

Understand who the appropriate authority (appropriate government) is when filing a complaint

Section 3 - Right to Free and Compulsory Education

What it is: Every child in the 6-14 age group has a fundamental right to free and compulsory education in a neighborhood school.

Explanation:

Free: No fees, charges, or expenses

Compulsory: The state must ensure admission, attendance, and completion of education for every child

Neighborhood School: School within 1 km (primary) and 3 km (upper primary) from home

How to use it:

Demand admission in a nearby school - the school cannot refuse

Complain if any fee is charged

Uniforms, books, meals - all should be free

If there's a risk of the child dropping out, complain to local authorities

Example: Raju's school is 2 km from home. If the school denies admission, it violates the law.

Section 4 - Age-Appropriate Admission (Direct)

What it is: A child above 6 years should be given direct admission in the class appropriate to their age.

Explanation:

If an 8-year-old child has never attended school, admit them directly to Class 3

Bring them up to par with others through special training

Include in mainstream after 3 months of special training

How to use it:

If the child has never attended school, no need to start from Class 1

Demand admission in the appropriate class based on age

Request special training

Do not treat the child as "backward"

Example: 10-year-old Sita is coming to school for the first time. She should be admitted directly to Class 5 and given special training.

Section 5 - Transfer Certificate

What it is: If a child transfers from one school to another, the new school must grant immediate admission.

Explanation:

Admission must be given even without a transfer certificate

The transfer certificate from the previous school can be obtained later

Admission cannot be withheld

Especially important for children of migrant workers and nomadic tribes

How to use it:

If moving from one village to another, take immediate admission in the new school

Demand admission even without a certificate - the school cannot refuse

Obtain records from the previous school later

Migrant workers' children should avail this facility

Example: Ramesh's father moved from Mumbai to Pune for construction work. Ramesh should get immediate admission in a Pune school.

Section 6 - Establishment of Schools

What it is: The appropriate government must establish or recognize schools in every neighborhood within 3 years.

Explanation:

If there is no school in the neighborhood, the government must establish one

Increase facilities by recognizing private schools

Compliance with standards in the Schedule is necessary

This facility must be provided within 3 years (by 2013)

How to use it:

If there is no school in your area, make a written demand to the local administration

Discuss the issue in Gram Sabha or Parent Committee

Submit a collective application to the education officer

Use RTI to get information on school establishment

Section 7 - Financial and Other Responsibilities

What it is: The government and local authorities must provide financial and other resources for implementing RTE.

Explanation:

Central and state governments must provide funds

Budget provision for free education

Spend on infrastructure, teachers, materials

Division of financial burden (center-state)

How to use it:

Complain if the school lacks basic facilities

Ask for budget provisions (via RTI)

Apply pressure through Parent-Teacher Association (PTA)

Inquire about fund availability from education officers

Section 8 - Duties of the Government

What it is: Various responsibilities of the appropriate government.

Key Duties:

Provide free and compulsory education to every child

Give priority to disadvantaged groups

Bridge gaps in schools (especially in SC/ST/backward areas)

Training of teachers

Prepare academic calendar

Monitor quality and standards

Identify and admit disadvantaged children

Ensure admission, attendance, and completion of education

How to use it:

If the child doesn't get admission, complain to the District Education Officer

If from a disadvantaged group, demand special priority

Inquire if teachers' training has been done

Inform the education department about school quality

Section 9 - Duties of Local Authorities

What it is: Responsibilities at the local level (Gram Panchayat, Municipality).

Key Duties:

Prepare list of children out of school

Make efforts to admit them

Monitor child's attendance

Prevent children from dropping out

Establish School Management Committee

Regulate and monitor school facilities

How to use it:

Provide information about children not attending school in the area to the Gram Sevak

Discuss education in Gram Panchayat/Municipality

Participate in the School Management Committee

Hold the local authority accountable

Section 10 - Duties of Parents and Guardians

What it is: Parents must send the child to school and take responsibility for their education.

Explanation:

Admit the child aged 6 to 14 to school

Ensure regular attendance

Encourage completion of elementary education

Applies not only to biological parents but also to legal guardians and custodians

How to use it:

Send the child to school regularly

Inform the school in case of illness

Participate in parent-teacher meetings

Monitor the child's academic progress

If there are financial difficulties, take admission in a government school (free)

Important: Not sending the child to school is a failure of parental duty.

Section 11 - Provision for Pre-School Education

What it is: Early childhood care and education for children until they complete 3 years.

Explanation:

Anganwadi/Play School for children aged 3 to 6 years

Preparation for school education

Included in RTE Act but implemented under separate schemes

Related to ICDS (Integrated Child Development Services) scheme

How to use it:

Admit children aged 3-6 to Anganwadi

Inquire about play school facilities from local authorities

Prepare the child for school by availing pre-school education

Section 12 - Responsibilities of Schools

What it is: Schools and school management must implement the RTE Act.

Key Responsibilities:

Admit all neighborhood children

Comply with standards in the Schedule

Follow RTE Act

Provide quality education

Treat all children equally without discrimination

How to use it:

Check if the school is complying with RTE

Mention this section if the school denies admission

Complain about school standards

Hold the school accountable through the School Management Committee

Section 13 - Prohibition of Admission Fee and Screening Procedure

What it is: No fee can be charged for admission, and no entrance test can be conducted.

Explanation:

No Admission Fee: No capitation fee, donation, building fund, etc.

No Test: No interview/exam of the child or parents

No Discrimination: Cannot use test as a reason to deny admission

Applies to all schools (government and private)

How to use it:

Do not pay any fee for admission

If the school demands fee, give written refusal and complain

Complain to the education department if an entrance test is conducted

Violation of this section is serious - legal action possible

Example: A private school demanded "Development Fee" of ₹50,000, which is illegal.

Section 14 - Proof of Age for Admission

What it is: Proof of age for admission should be simple, not strict.

Explanation:

Birth certificate is sufficient if available

If not, any valid proof (health card, Aadhaar, school record)

Admission cannot be denied due to lack of proof

Self-declaration is also acceptable

How to use it:

If no birth certificate, obtain it immediately (Tehsil office/Municipality)

Submit other proofs (vaccination card, Aadhaar)

If the school refuses, submit self-declaration

The child should not be left out of school due to lack of age proof

Section 15 - Prohibition of Denial of Admission

What it is: No school can deny admission.

Explanation:

Neighborhood school must admit all children

Cannot use lack of seats as an excuse

Denying admission is a violation of RTE

The school can face penal action

How to use it:

Ask for written reasons if admission is denied

Complain to Block Education Officer (BEO) / District Education Officer (DEO)

Inform the School Management Committee

Register as violation of RTE Sections 3 and 15

Legal Action: If admission is denied, the school can be fined (recognition can also be canceled under Section 18)

Section 16 - Prohibition of Detention and Expulsion

What it is: No child can be detained in a class or expelled from school in elementary education.

Explanation:

Cannot fail a child from Class 1 to 8

Cannot expel from school

Promote to next class even if exam not passed

Conduct Continuous and Comprehensive Evaluation (CCE)

How to use it:

Object if the child is failed

Complain in writing if threatened with expulsion

Demand special help if there are learning difficulties (not failure)

Important for the child's confidence

Important: Give the child opportunity to learn without mental stress.

Section 17 - Prohibition of Physical Punishment and Mental Harassment

What it is: No physical punishment or mental harassment to a child in school.

Explanation:

No beating, cane, slap

No insult, abuse, threat

No standing outside class, ear twisting, punching - banned

Maintain the child's dignity and respect

How to use it:

If a teacher beats, complain to the school principal

If no action by principal, submit written complaint to education officer

Police complaint also possible (IPC Sections 323, 350)

Get medical examination and preserve evidence

Provide psychological counseling to the child

Legal Consequences: Disciplinary action on teacher, suspension, dismissal possible.

Section 18 - Recognition for Establishing Schools

What it is: Recognition is mandatory for any school; cannot operate without it.

Explanation:

Recognition required before starting a new school

Must meet standards in the Schedule

Operating without recognition is a crime

If recognition is canceled, the school must be closed

How to use it:

Before admitting your child, check if the school is recognized

Check the list on the education department's website

Avoid admission in unrecognized schools

Complain if a school is operating illegally

Note: School operators must display the recognition certificate.

Section 19 - Norms and Standards for Schools

What it is: Schools must meet specific standards (as given in the Schedule).

Key Standards:

Adequate space - playground, classrooms

Toilets - separate for boys and girls

Safe drinking water

Kitchen (for mid-day meal)

Library

Adequate teachers (pupil-teacher ratio)

Sports equipment and learning aids

Classrooms - ventilated and well-lit

School wall/compound

Facilities for disabled children (ramps, etc.)

How to use it:

Check if these facilities are in the school

Raise deficiencies in the School Management Committee

Submit written complaint to Block/District Education Officer

Ask for inspection report via RTI

Create awareness through social media, media

Important: Non-compliance with these standards can lead to cancellation of school recognition.

Section 20 - Power to Amend the Schedule

What it is: The appropriate government has the power to amend standards in the Schedule.

Explanation:

Standards can be changed according to new needs

Can only be increased, not decreased

To improve education quality

Approval of state legislature required

How to use it:

Get information if new standards are announced

Check if schools are complying with new rules

Submit suggestions on amendments

Participate in public hearings

Section 21 - School Management Committee (SMC)

What it is: Every school must have a management committee of parents and teachers.

Explanation:

75% parents-local authority members in the committee

50% women members

Adequate representation from disadvantaged groups

Review school operations

Suggestions to improve education quality

Functions of SMC:

Prepare school development plan

Supervise mid-day meal

Review school funds

Check teachers' attendance

Monitor children's learning outcomes

How to use it:

Become a member of SMC - participate actively

Attend monthly meetings regularly

Raise school issues before the committee

Complain to education department if no SMC

Be involved in decision-making

Important: SMC is a tool for parent empowerment - make full use of it.

Section 22 - School Development Plan

What it is: The School Management Committee must prepare a school development plan every year.

Explanation:

Planning for school needs

Infrastructure improvements

Enhance academic quality

Financial planning

Submit to local authorities

What should be in the plan:

Current status of the school

Required improvements

Academic objectives

Financial needs

Implementation timeline

How to use it:

Participate in preparing the plan in SMC meetings

Identify and note school needs

Check if the plan is implemented

Display the plan publicly (in school)

Discuss in Gram Sabha/Municipality to get funds

Section 23 - Appointment, Qualifications and Terms of Teachers

What it is: Minimum qualifications and service conditions for teacher appointments.

Minimum Qualifications:

B.Ed or D.Ed (Diploma in Education)

Qualifications fixed by government (as per NCTE)

TET (Teacher Eligibility Test) passed

Other Conditions:

Transparent appointment process

Appropriate salary and benefits

Regular teachers (not ad-hoc)

Preference to local teachers

How to use it:

Check teachers' qualifications in the school

Complain if unqualified teachers

Review teachers' quality through SMC

Demand regular teachers instead of ad-hoc

Section 24 - Duties of Teachers

What it is: Code of conduct and duties that teachers must follow.

Key Duties:

Regular and punctual attendance

Complete the curriculum

Achieve learning outcomes for each child

Conduct regular evaluations

Communicate with parents

Cooperate with school and SMC

Follow the full academic schedule

Things to Avoid:

Private tuitions (to students of the same school)

Non-teaching work

Discrimination

How to use it:

Check if teachers come regularly (attendance register)

Inform SMC if curriculum not completed

Check if teachers are giving private tuitions (violation of Section 28)

Complain in writing to the school principal

Section 25 - Pupil-Teacher Ratio (PTR)

What it is: Specified number of teachers required based on student strength.

Prescribed Ratio:

Classes 1-5: 1 teacher per 30 students

Classes 6-8: 1 teacher per 35 students

Subject-wise teachers (Math, Science, Social, Language)

Physical education and art teachers

Explanation:

Low teacher numbers affect quality

Ensure adequate attention to each child

Subject expert teachers required

How to use it:

Count student and teacher numbers in the school

Complain in writing if ratio not proper

Demand more teachers through SMC

Follow up consistently with education officers

Example: 90 students in school but only 2 teachers = violation of Section 25.

Section 26 - Filling Vacant Teacher Posts

What it is: Vacant teacher posts must be filled within 6 months.

Explanation:

Immediate appointment if teacher retires/on leave/transfers

Post cannot remain vacant for more than 6 months

Temporary arrangement necessary

Education quality should not suffer

How to use it:

Note the time when a teacher post is vacant

Complain if 6 months pass

Apply pressure through SMC on administration

Ask for appointment process info via RTI

Section 27 - Prohibition of Non-Educational Duties

What it is: Teachers cannot be assigned non-teaching duties.

Prohibited Duties:

Election duties (except census)

Disaster management (except education-related)

Alcohol policy, pulse polio (except education-related programs)

Permitted Duties:

Census

Educational surveys

Voter list updates (as school work)

Explanation:

Teachers' main purpose is teaching

Other duties degrade education

Protect children's rights

How to use it:

Ask reasons if teacher is absent from school

Complain if frequently on non-teaching duties

Administration should not call teachers unnecessarily

Measure teachers' school attendance through SMC

Section 28 - Prohibition of Private Tuitions

What it is: Teachers cannot give private tuitions to students of their own school.

Explanation:

Conflict of interest

Deliberately teaching less in class and more in tuitions - unethical

Financial burden on children and parents

Misuse of school time

Permission:

Can teach students from other schools

Allowed if not their own school

How to use it:

Complain if teacher is tutoring own school students

Collect evidence (fee receipts, other parents' testimonies)

Written complaint to school principal/BEO

Disciplinary action possible

Important: If all subjects are taught well in school, no need for tuitions.

Section 29 - Curriculum and Evaluation

What it is: Curriculum should be balanced and child-friendly, evaluation continuous.

Explanation:

Curriculum for all-round development of the child

Follow NCERT/state curriculum

Continuous and Comprehensive Evaluation (CCE) - not focus on exams

Avoid supplementary books, heavy bags

Education should be enjoyable

Types of Evaluation:

Daily classroom observations

Projects, homework

Oral exams

Year-end exam (not decisive)

How to use it:

Object if child's bag is heavy

Complain if extra books are imposed

Focus on learning progress, not just marks

Ask for regular feedback from teachers

Section 30 - Examination and Completion Certificate

What it is: Issue certificate on completion of Class 8.

Explanation:

Proof of completing elementary education

Necessary for further education

No board exam (only school level)

School must issue the certificate

How to use it:

Demand certificate after completing Class 8

Get duplicate if lost

Required for secondary education

Carry when changing schools

Section 31 - Protection of Child's Rights

What it is: Provisions to protect the child's rights.

Explanation:

No exploitation of any kind

Respect and dignity for the child

Safe environment

Education without discrimination

Role of Child Rights Commission

Areas of Protection:

Physical safety

Emotional safety

Educational rights

Equality and justice

How to use it:

Complain if child's rights are violated

Contact State/National Commission for Protection of Child Rights

Complain to Child Welfare Committee (CWC)

Seek legal help

Section 32 - Redressal of Grievances

What it is: Power to redress grievances arising in the implementation of this Act.

Explanation:

Central/State government has power to resolve grievances

Issue clarifications

New guidelines

Decisions as per the spirit of the law

How to use it:

Ask for clarification if confused about the law's meaning

Read government guidelines

Get official clarification via RTI

Section 33 - Constitution of National Advisory Council

What it is: Central government to constitute a national-level advisory council.

Functions:

Review implementation of RTE

Advise central government

Policy guidance

Coordination among states

Prepare annual report

Members:

Education experts

Child rights activists

Government officials

Teachers' union representatives

Parent representatives

How to use it:

Send national-level issues to the council

Read and study council reports

Send suggestions for policy changes

Section 34 - Constitution of State Advisory Council

What it is: Each state to constitute an advisory council.

Functions:

Review RTE implementation in the state

Advise state government

Resolve local issues

Coordination at district level

Annual report to state government

How to use it:

Send state-level educational issues to the council

Participate in council meetings (as citizen)

Get council reports through RTI

Form pressure groups at local level

Section 35 - Power to Issue Directions

What it is: Appropriate government has power to issue directions to schools and local authorities.

Explanation:

For full implementation of the law

Issue orders

Ensure compliance

Penal action

How to use it:

If school not complying, demand government to issue directions

Check if administrative directions are issued

Follow up if directions are implemented

Section 36 - Previous Sanction for Prosecution

What it is: Prior approval of appropriate government required before filing a case for RTE violation.

Explanation:

Protection from frivolous complaints

Court action in serious cases

Efforts at administrative level before filing complaint

Protection for officials (if acted in good faith)

How to use it:

First file administrative complaint

If no satisfactory action, approach court

Get prior approval from government

Seek legal consultation

Section 37 - Protection of Action Taken in Good Faith

What it is: Legal protection for officials for actions taken in good faith.

Explanation:

Mistakes in implementation of the law

No malicious intent

Decisions taken honestly

Protection for employees

How to use it:

Check if official's misconduct was intentional

Different perspective if action in good faith

Legal remedies if malicious

Section 38 - Power to Make Rules

What it is: Appropriate government has power to make rules for implementing RTE.

Rules can include:

Admission process

Accepting proof of age

School recognition process

Teachers' qualifications and appointment

Establishment and functions of SMC

If RTE 2009 (Right to Education Act) is not implemented, complaints can be filed at the following places — (in sequence / simultaneously):

School Level

Principal / Institution Head

File written complaint and get receipt.

Education Department (Local)

Block Education Officer (BEO) – Primary

Education Officer (Primary / Secondary), Zilla Parishad

For issues like denial of admission, charging fees, lack of facilities, etc.

Deputy Director of Education (DyDE)

For serious or pending cases at district/division level.

RTE Complaint Portal / Education Department

Online/written complaint to state education department.

State Commission for Protection of Child Rights (SCPCR)

Violation of children's rights (denial of admission, discrimination, harassment, RTE violation).

District Collector

Administrative neglect, non-implementation of orders.

Director of Public Instruction / Education Commissioner

Policy-level or repeated violation cases.

Right to Information (RTI)

To obtain admission lists, RTE quota, expenses, recognition, inspection reports.

If information not given, first appeal → State Information Commission.

Police Complaint

If threats, fake documents, financial fraud, harassment (IPC applicable).

Court

High Court (Writ Petition) – for serious and persistent violations.

Useful Tips:

Always complain in writing, with evidence (applications, receipts, photos, WhatsApp/emails).

Clearly mention date, section number (RTE).

Simultaneous approach like Education Officer + SCPCR + RTI is effective for pressure.🙏

Note.. 👇

Important Information About the Right to Information (RTI) Act

👉 Right to Information (RTI) – Right to Information

👉 Useful Information for RTI Activists

Note............... 👇

👉 As per the Right to Information Act, 2005, an RTI application can be filed in Hindi, English, or the official language of the respective area.

👉 This is a fundamental right of every common citizen, which strengthens democracy.

👉 You can seek information from all states, union territories, and government departments of India.

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 शिक्षणाचा हक्क कायदा, 2009 (RTE-2009)

 सर्व कलमांचे सविस्तर स्पष्टीकरण


## **कलम १ - संक्षिप्त नाव, विस्तार व प्रारंभ**


**काय आहे:** या कलमात कायद्याचे अधिकृत नाव, तो कोठे लागू होतो आणि कधीपासून लागू झाला हे सांगितले आहे.


**स्पष्टीकरण:**

- हा कायदा "मुलांचा मोफत व सक्तीचे शिक्षण हक्क अधिनियम, 2009" म्हणून ओळखला जातो

- संपूर्ण भारतात लागू होतो (जम्मू-काश्मीर वगळता, जे नंतर जोडले गेले)

- १ एप्रिल २०१० पासून अंमलात आला


**वापर कसा करावा:**

- कायदेशीर तक्रारी करताना या कायद्याचा संदर्भ द्या

- आपल्या राज्यात कायदा लागू आहे की नाही हे तपासा

- शाळेत प्रवेश नाकारल्यास या कलमाचा उल्लेख करून तक्रार करा


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## **कलम २ - व्याख्या**


**काय आहे:** या कायद्यात वापरलेल्या महत्त्वाच्या शब्दांची व्याख्या.


**मुख्य व्याख्या:**

- **बालक**: ६ ते १४ वर्षे वयोगटातील मुलगा किंवा मुलगी

- **प्रारंभिक शिक्षण**: इयत्ता १ ली ते ८ वी पर्यंतचे शिक्षण

- **समुचित शासन**: केंद्र/राज्य शासन जे शाळेसाठी जबाबदार आहे

- **शाळा**: शासकीय, शासन अनुदानित किंवा अनुदान न घेणारी खाजगी शाळा

- **मान्यताप्राप्त शाळा**: नियमांनुसार मान्यता मिळालेली शाळा


**वापर कसा करावा:**

- आपल्या मुलाचे वय ६-१४ मध्ये असल्यास हा कायदा लागू होतो

- कोणत्याही प्रकारच्या शाळेत (शासकीय/खाजगी) प्रवेश मागता येतो

- तक्रार करताना योग्य अधिकारी (समुचित शासन) कोण आहे हे समजून घ्या


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## **कलम ३ - मोफत व सक्तीचे शिक्षण अधिकार**


**काय आहे:** प्रत्येक ६-१४ वर्षे वयोगटातील बालकाला शेजारच्या शाळेत मोफत व सक्तीचे शिक्षण मिळण्याचा मूलभूत हक्क.


**स्पष्टीकरण:**

- **मोफत**: कोणतीही फी, शुल्क, खर्च नाही

- **सक्तीचे**: राज्याने प्रत्येक बालकाला प्रवेश, उपस्थिती व शिक्षण पूर्ण करण्याची खात्री करणे

- **शेजारची शाळा**: घरापासून १ किमी (प्राथमिक) व ३ किमी (उच्च प्राथमिक) अंतरावरील शाळा


**वापर कसा करावा:**

- जवळच्या शाळेत प्रवेश मागा - शाळा नकार देऊ शकत नाही

- कोणतीही फी आकारली तर तक्रार करा

- गणवेश, पुस्तके, जेवण - सर्व मोफत मिळायला हवे

- मुलाची शाळा सोडण्याची शक्यता असल्यास स्थानिक अधिकाऱ्यांकडे तक्रार करा


**उदाहरण:** राजूची शाळा घरापासून २ किमी अंतरावर आहे. शाळेने प्रवेश नाकारला तर हे कायद्याचे उल्लंघन आहे.


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## **कलम ४ - वयानुरूप प्रवेश (थेट)**


**काय आहे:** ६ वर्षांपेक्षा जास्त वयाच्या मुलाला त्याच्या वयाच्या योग्य इयत्तेत थेट प्रवेश द्यावा.


**स्पष्टीकरण:**

- जर ८ वर्षाच्या मुलाने कधी शाळा गाठली नाही तर त्याला इयत्ता ३ रीत प्रवेश द्यावा

- विशेष प्रशिक्षणाद्वारे त्याला इतरांच्या बरोबरीने आणावे

- ३ महिन्यांचे विशेष प्रशिक्षण दिल्यानंतर मुख्य प्रवाहात समाविष्ट करावे


**वापर कसा करावा:**

- जर मुलाने कधी शाळा गाठली नाही तर त्याला इयत्ता १ लीत घेण्याची गरज नाही

- वयानुसार योग्य इयत्तेत प्रवेश मागा

- विशेष प्रशिक्षणाची मागणी करा

- मुलाला "मागे" म्हणून वागवू नका


**उदाहरण:** १० वर्षांची सीता पहिल्यांदाच शाळेत येत आहे. तिला इयत्ता ५ वीत थेट प्रवेश द्यावा आणि विशेष प्रशिक्षण द्यावे.


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## **कलम ५ - दाखला हस्तांतरण**


**काय आहे:** मुलाने एका शाळेतून दुसऱ्या शाळेत बदली केली तर नवीन शाळेने त्वरित प्रवेश द्यावा.


**स्पष्टीकरण:**

- दाखला न मिळाल्यास देखील प्रवेश द्यावा

- मागील शाळेतील दाखला नंतर मिळवता येतो

- प्रवेश रोखता येणार नाही

- स्थलांतर झालेल्या कामगार, भटक्या जमातींच्या मुलांसाठी विशेष महत्त्व


**वापर कसा करावा:**

- एका गावातून दुसऱ्या गावात गेल्यास लगेच नवीन शाळेत प्रवेश घ्या

- दाखला नसल्यास देखील प्रवेश मागा - शाळा नकार देऊ शकत नाही

- मागील शाळेतील अभिलेख नंतर मिळवा

- स्थलांतरित कामगारांची मुले या सुविधेचा लाभ घ्यावा


**उदाहरण:** रमेशचे वडील बांधकाम कामासाठी मुंबईहून पुण्यात आले. रमेशला त्वरित पुण्यातील शाळेत प्रवेश मिळायला हवा.


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## **कलम ६ - शाळा स्थापन**


**काय आहे:** समुचित शासनाने ३ वर्षांच्या आत प्रत्येक परिसरात शाळा स्थापन करणे किंवा मान्यता देणे आवश्यक.


**स्पष्टीकरण:**

- शेजारच्या क्षेत्रात शाळा नसल्यास शासनाने स्थापन करावी

- खाजगी शाळांना मान्यता देऊन सुविधा वाढवावी

- अनुसूचीतील मानकांची पूर्तता आवश्यक

- ३ वर्षांच्या आत (२०१३ पर्यंत) ही सुविधा उपलब्ध करावी


**वापर कसा करावा:**

- आपल्या परिसरात शाळा नसल्यास स्थानिक प्रशासनाकडे लेखी मागणी करा

- ग्रामसभेत, पालक समितीत या मुद्द्यावर चर्चा करा

- शिक्षण अधिकाऱ्याकडे सामूहिक अर्ज सादर करा

- RTI द्वारे शाळा स्थापनेबाबत माहिती घ्या


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## **कलम ७ - आर्थीक व इतर जबाबदाऱ्या**


**काय आहे:** शासनाने व स्थानिक प्राधिकरणांनी RTE लागू करण्यासाठी आर्थिक व इतर संसाधने पुरवावीत.


**स्पष्टीकरण:**

- केंद्र व राज्य शासनाने निधी उपलब्ध करावा

- मोफत शिक्षणासाठी बजेट तरतूद करावी

- पायाभूत सुविधा, शिक्षक, साहित्य यासाठी खर्च करावा

- आर्थिक भाराची विभागणी (केंद्र-राज्य) करावी


**वापर कसा करावा:**

- शाळेत मूलभूत सुविधा नसल्यास तक्रार करा

- बजेट तरतुदीबाबत माहिती मागा (RTI)

- पालक-शिक्षक संघटना (PTA) द्वारे दबाव आणा

- शिक्षण अधिकाऱ्यांना निधी उपलब्धतेबाबत विचारा


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## **कलम ८ - शासनाची कर्तव्ये**


**काय आहे:** समुचित शासनाच्या विविध जबाबदाऱ्या.


**मुख्य कर्तव्ये:**

1. प्रत्येक बालकाला मोफत व सक्तीचे शिक्षण उपलब्ध करणे

2. वंचित गटांना प्राधान्य देणे

3. शाळांमधील अंतर दूर करणे (विशेषत: SC/ST/मागासवर्गीय क्षेत्रात)

4. शिक्षकांचे प्रशिक्षण

5. शैक्षणिक कॅलेंडर तयार करणे

6. गुणवत्ता व मानकांची देखरेख

7. वंचित बालकांची ओळख व प्रवेश

8. प्रवेश, उपस्थिती व शिक्षण पूर्ण करणे सुनिश्चित करणे


**वापर कसा करावा:**

- मुलाला प्रवेश न मिळाल्यास जिल्हा शिक्षण अधिकाऱ्याकडे तक्रार करा

- वंचित गटातील असाल तर विशेष प्राधान्याची मागणी करा

- शिक्षकांचे प्रशिक्षण झाले का याची चौकशी करा

- शाळेतील गुणवत्तेबाबत शिक्षण विभागाला कळवा


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## **कलम ९ - स्थानिक प्राधिकरण कर्तव्ये**


**काय आहे:** स्थानिक स्तरावरील (ग्रामपंचायत, नगरपालिका) जबाबदाऱ्या.


**मुख्य कर्तव्ये:**

1. शाळा बाहेर असलेल्या मुलांची यादी तयार करणे

2. त्यांना प्रवेश देण्यासाठी प्रयत्न करणे

3. मुलाच्या उपस्थितीवर लक्ष ठेवणे

4. मुलांना शाळा सोडण्यापासून रोखणे

5. शाळा व्यवस्थापन समितीची स्थापना

6. शाळेच्या सुविधांचे नियमन व पाळत ठेवणे


**वापर कसा करावा:**

- परिसरातील शाळा न जाणाऱ्या मुलांची माहिती ग्रामसेवकाला द्या

- ग्रामपंचायत/नगरपालिकेत शिक्षणाबाबत चर्चा करा

- शाळा व्यवस्थापन समितीत सहभागी व्हा

- स्थानिक प्राधिकरणाला जबाबदार धरा


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## **कलम १० - माता-पिता व पालकांची कर्तव्ये**


**काय आहे:** पालकांनी मुलाला शाळेत पाठवणे आणि त्याच्या शिक्षणाची जबाबदारी घेणे.


**स्पष्टीकरण:**

- ६ ते १४ वर्षे वयोगटातील बालकाला शाळेत प्रवेश द्यावा

- नियमित उपस्थिती सुनिश्चित करावी

- प्रारंभिक शिक्षण पूर्ण करण्यास प्रोत्साहन द्यावे

- हे केवळ जैविक पालकच नव्हे तर कायदेशीर पालक व संरक्षकांनाही लागू


**वापर कसा करावा:**

- मुलाला नियमित शाळेत पाठवा

- आजारपणाच्या वेळी शाळेला कळवा

- पालक-शिक्षक बैठकीत सहभागी व्हा

- मुलाच्या शैक्षणिक प्रगतीवर लक्ष ठेवा

- आर्थिक अडचण असल्यास शासकीय शाळेत प्रवेश घ्या (मोफत)


**महत्त्वाचे:** मुलाला शाळेत न पाठवणे हे पालकांचे कर्तव्य न पाळणे होय.


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## **कलम ११ - शालापूर्व शिक्षण तरतूद**


**काय आहे:** ३ वर्षे पूर्ण होईपर्यंत बालकासाठी लवकर बालपण काळजी व शिक्षण.


**स्पष्टीकरण:**

- ३ ते ६ वर्षे वयोगटातील मुलांसाठी आंगणवाडी/बालवाडी

- शालेय शिक्षणासाठी तयारी

- या कलमाचा RTE कायद्यात समावेश आहे पण स्वतंत्र योजनांअंतर्गत अंमलबजावणी

- ICDS (एकात्मिक बालविकास सेवा) योजनेशी संबंधित


**वापर कसा करावा:**

- ३-६ वर्षे वयोगटातील मुलासाठी आंगणवाडीत प्रवेश घ्या

- बालवाडीच्या सुविधेबाबत स्थानिक प्राधिकरणाला विचारा

- शालापूर्व शिक्षणाचा लाभ घेऊन मूल शाळेसाठी तयार करा


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## **कलम १२ - शाळांची जबाबदारी**


**काय आहे:** शाळांनी व शाळा व्यवस्थापनाने RTE कायद्याची अंमलबजावणी करणे.


**मुख्य जबाबदाऱ्या:**

1. शेजारच्या सर्व बालकांना प्रवेश देणे

2. अनुसूचीतील मानकांची पूर्तता

3. RTE कायद्याचे पालन

4. गुणवत्तापूर्ण शिक्षण देणे

5. कोणत्याही भेदभावाशिवाय सर्व मुलांना समान वागणूक


**वापर कसा करावा:**

- शाळा RTE चे पालन करत आहे का हे तपासा

- शाळेने प्रवेश नाकारल्यास या कलमाचा उल्लेख करा

- शाळेतील मानकांबाबत तक्रार करा

- शाळा व्यवस्थापन समितीद्वारे शाळेला जबाबदार धरा


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## **कलम १३ - प्रवेश फी व चाचणी पध्दत प्रतिबंध**


**काय आहे:** प्रवेशासाठी कोणतीही फी आकारता येणार नाही किंवा प्रवेश चाचणी घेता येणार नाही.


**स्पष्टीकरण:**

- **प्रवेश शुल्क नाही**: कॅपिटेशन फी, डोनेशन, बिल्डिंग फंड वगैरे नाही

- **चाचणी नाही**: मुलाची किंवा पालकांची मुलाखत/परीक्षा नाही

- **भेदभाव नाही**: प्रवेश नाकारण्याचे कारण म्हणून चाचणी वापरता येणार नाही

- हे सर्व शाळांना (शासकीय आणि खाजगी) लागू


**वापर कसा करावा:**

- प्रवेशासाठी कोणतेही शुल्क देऊ नका

- शाळेने फी मागितली तर लेखी नकार द्या व तक्रार करा

- प्रवेश चाचणी घेतली तर शिक्षण विभागाकडे तक्रार करा

- या कलमाचे उल्लंघन गंभीर आहे - कायदेशीर कारवाई होऊ शकते


**उदाहरण:** खाजगी शाळेने "डेव्हलपमेंट फी" ₹५०,००० मागितली, हे बेकायदेशीर आहे.


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## **कलम १४ - प्रवेशासाठी वयाचा पुरावा**


**काय आहे:** प्रवेशासाठी वयाचा पुरावा सोपा असावा, कठोर नियम नसावेत.


**स्पष्टीकरण:**

- जन्म दाखला असेल तो पुरेसा

- नसेल तर कोणताही वैध पुरावा (आरोग्य कार्ड, आधार, शाळा रेकॉर्ड)

- पुराव्याअभावी प्रवेश रोखता येणार नाही

- स्वयं-घोषणा देखील मान्य


**वापर कसा करावा:**

- जन्म दाखला नसल्यास लगेच मिळवा (तहसील कार्यालय/नगरपालिका)

- इतर पुरावे (लसीकरण कार्ड, आधार) सादर करा

- शाळेने नकार दिला तर स्वयं-घोषणा सादर करा

- वयाच्या पुराव्याअभावी मूल शाळेबाहेर राहू नये


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## **कलम १५ - प्रवेशास नकार प्रतिबंध**


**काय आहे:** कोणत्याही शाळेला प्रवेश नाकारता येणार नाही.


**स्पष्टीकरण:**

- शेजारच्या शाळेने सर्व बालकांना प्रवेश द्यावा

- जागा नसल्याचे निमित्त धरता येणार नाही

- प्रवेश नाकारणे हे RTE उल्लंघन

- शाळेवर दंडात्मक कारवाई होऊ शकते


**वापर कसा करावा:**

- प्रवेश नाकारल्यास लेखी कारण मागा

- Block Education Officer (BEO) / District Education Officer (DEO) कडे तक्रार करा

- शाळा व्यवस्थापन समितीला कळवा

- RTE कलम ३ आणि १५ चे उल्लंघन म्हणून नोंद करा


**कायदेशीर कारवाई:** प्रवेश नाकारल्यास शाळेवर दंड (कलम १८ नुसार मान्यता रद्द देखील शक्य)


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## **कलम १६ - मागे ठेवण्यास व निष्कासनास प्रतिबंध**


**काय आहे:** प्रारंभिक शिक्षणात कोणत्याही मुलाला वर्ग मागे ठेवता येणार नाही किंवा शाळेतून काढता येणार नाही.


**स्पष्टीकरण:**

- इयत्ता १ ली ते ८ वी पर्यंत मुलाला फेल करता येणार नाही

- शाळेतून निष्कासित करता येणार नाही

- परीक्षा पास न झाली तरी पुढच्या इयत्तेत प्रवेश

- सतत व सर्वंकष मूल्यमापन (CCE) करावे


**वापर कसा करावा:**

- मुलाला फेल ठरवले तर शाळेला आक्षेप घ्या

- निष्कासनाची धमकी दिली तर लेखी तक्रार करा

- शिकण्यात अडचण असल्यास विशेष मदत मागा (ना की फेल)

- हे बालकाच्या आत्मविश्वासासाठी महत्त्वाचे


**महत्त्वाचे:** मुलाला मानसिक ताण न देता शिकण्याची संधी द्यावी.


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## **कलम १७ - शारीरिक शिक्षा व मानसीक त्रास प्रतिबंध**


**काय आहे:** शाळेत मुलाला शारीरिक शिक्षा किंवा मानसिक त्रास देता येणार नाही.


**स्पष्टीकरण:**

- मारहाण, बेंत, चापट नाही

- अपमान, शिवीगाळ, धमकावणे नाही

- वर्गाबाहेर उभे करणे, कानउघडणे, मुठी मारणे - बंद

- मुलाचा सन्मान व प्रतिष्ठा राखावी


**वापर कसा करावा:**

- शिक्षकाने मारहाण केली तर शाळा प्रमुखाकडे तक्रार करा

- प्रमुखाने कारवाई न केली तर शिक्षण अधिकाऱ्याकडे लेखी तक्रार सादर करा

- पोलीस तक्रार देखील करता येते (IPC कलम ३२३, ३५०)

- वैद्यकीय तपासणी करून पुरावे जतन करा

- मुलाला मानसिक सल्ला उपलब्ध करा


**कायदेशीर परिणाम:** शिक्षकावर शिस्तभंगाची कारवाई, निलंबन, नोकरीतून काढणे शक्य.


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## **कलम १८ - शाळा स्थापनेस मान्यता**


**काय आहे:** कोणत्याही शाळेला मान्यता घेणे आवश्यक, नाहीतर चालवता येणार नाही.


**स्पष्टीकरण:**

- नवीन शाळा सुरू करण्यापूर्वी मान्यता आवश्यक

- अनुसूचीतील मानके पूर्ण करावीत

- मान्यतेशिवाय शाळा चालवणे गुन्हा

- मान्यता रद्द झाली तर शाळा बंद करावी


**वापर कसा करावा:**

- मुलाचा प्रवेश करण्यापूर्वी शाळा मान्यताप्राप्त आहे का तपासा

- शिक्षण विभागाच्या वेबसाईटवर यादी पाहा

- मान्यता नसलेल्या शाळेत प्रवेश टाळा

- तक्रार करा जर शाळा बेकायदेशीर चालत असेल


**नोंद:** शाळा चालवणाऱ्यांनी मान्यता प्रमाणपत्र प्रदर्शित करणे बंधनकारक.


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## **कलम १९ - शाळेसाठी मानके व निकष**


**काय आहे:** शाळेने विशिष्ट मानके पूर्ण करणे आवश्यक (अनुसूचीत दिलेले).


**मुख्य मानके:**

1. पुरेशी जागा - मैदान, खेळाचे मैदान, वर्गखोली

2. शौचालय - मुलांसाठी व मुलींसाठी स्वतंत्र

3. सुरक्षित पिण्याचे पाणी

4. स्वयंपाकघर (मध्यान्ह भोजनासाठी)

5. ग्रंथालय

6. पुरेशे शिक्षक 


विद्यार्थी-शिक्षक प्रमाण)

7. खेळाचे साहित्य व शिकण्याचे साधन

8. वर्गखोल्या - हवेशीर व प्रकाशमय

9. शाळेची भिंत/कंपाऊंड

10. अपंग मुलांसाठी सुविधा (रॅम्प इ.)


**वापर कसा करावा:**

- शाळेत या सुविधा आहेत का तपासा

- कमतरता आढळल्यास शाळा व्यवस्थापन समितीत मांडा

- लेखी तक्रार Block/District Education Officer कडे सादर करा

- RTI द्वारे शाळेचा निरीक्षण अहवाल मागा

- सोशल मीडिया, मीडियाद्वारे जनजागृती करा


**महत्त्वाचे:** या मानकांची पूर्तता न केल्यास शाळेची मान्यता रद्द होऊ शकते.


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## **कलम २० - अनुसूचीमध्ये सुधारणा अधिकार**


**काय आहे:** समुचित शासनाला अनुसूचीतील मानकांमध्ये बदल करण्याचा अधिकार.


**स्पष्टीकरण:**

- नवीन गरजांनुसार मानके बदलता येतील

- केवळ वाढवता येतील, कमी करता येणार नाहीत

- शिक्षणाची गुणवत्ता सुधारण्यासाठी

- राज्य विधिमंडळाची मंजुरी आवश्यक


**वापर कसा करावा:**

- नवीन मानके जाहीर झाल्यास माहिती घ्या

- शाळांनी नवीन नियमांचे पालन केले आहे का तपासा

- सुधारणांबाबत सूचना सादर करा

- जनसुनावणीत सहभागी व्हा


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## **कलम २१ - शाळा व्यवस्थापन समिती (SMC)**


**काय आहे:** प्रत्येक शाळेत पालक व शिक्षकांची व्यवस्थापन समिती असणे आवश्यक.


**स्पष्टीकरण:**

- समितीत ७५% पालक-स्थानिक प्राधिकरण सदस्य

- ५०% महिला सदस्य

- वंचित गटातील पुरेसे प्रतिनिधित्व

- शाळेच्या कारभाराचा आढावा

- शिक्षणाची गुणवत्ता सुधारण्यासाठी सूचना


**SMC ची कामे:**

1. शाळा विकास योजना तयार करणे

2. मध्यान्ह भोजनाचे पर्यवेक्षण

3. शाळेतील निधीचा आढावा

4. शिक्षकांची उपस्थिती तपासणे

5. मुलांच्या शिकण्याच्या परिणामावर लक्ष ठेवणे


**वापर कसा करावा:**

- SMC चे सदस्य व्हा - सक्रिय सहभाग घ्या

- मासिक बैठकीत नियमित उपस्थित राहा

- शाळेतील समस्या समितीसमोर मांडा

- SMC नसेल तर शिक्षण विभागाकडे तक्रार करा

- निर्णय प्रक्रियेत सामील व्हा


**महत्त्वाचे:** SMC हे पालकांचे सशक्तीकरणाचे साधन - त्याचा पूर्ण उपयोग करा.


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## **कलम २२ - शालेय विकास योजना (School Development Plan)**


**काय आहे:** शाळा व्यवस्थापन समितीने दरवर्षी शाळेचा विकास योजना तयार करणे.


**स्पष्टीकरण:**

- शाळेच्या गरजांचे नियोजन

- पायाभूत सुविधा सुधारणा

- शैक्षणिक गुणवत्ता वाढवणे

- आर्थिक नियोजन

- स्थानिक अधिकाऱ्यांना सादर करणे


**योजनेत काय असावे:**

1. शाळेची सद्यस्थिती

2. आवश्यक सुधारणा

3. शैक्षणिक उद्दिष्टे

4. आर्थिक आवश्यकता

5. अंमलबजावणीचे वेळापत्रक


**वापर कसा करावा:**

- SMC बैठकीत योजना तयार करण्यात सहभाग

- शाळेच्या गरजा ओळखा व नोंदवा

- योजनेची अंमलबजावणी झाली का ते तपासा

- योजना सार्वजनिक ठिकाणी (शाळेत) प्रदर्शित करा

- गावसभा/नगरपालिकेत चर्चा करून निधी मिळवा


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## **कलम २३ - शिक्षक नेमणूक, अहर्ता व अटी-शर्ती**


**काय आहे:** शिक्षकांच्या नेमणुकीसाठी किमान अहर्ता व सेवाशर्ती.


**किमान अहर्ता:**

- B.Ed किंवा D.Ed (डिप्लोमा इन एज्युकेशन)

- शासनाने निश्चित केलेली अहर्ता (NCTE नुसार)

- TET (Teacher Eligibility Test) उत्तीर्ण


**इतर अटी:**

- पारदर्शक नेमणूक प्रक्रिया

- योग्य वेतन व सुविधा

- नियमित शिक्षक (तदर्थ नाही)

- स्थानिक शिक्षकांना प्राधान्य


**वापर कसा करावा:**

- शाळेतील शिक्षकांची अहर्ता तपासा

- अपात्र शिक्षक असल्यास तक्रार करा

- SMC द्वारे शिक्षकांच्या गुणवत्तेचा आढावा घ्या

- तदर्थ शिक्षकांऐवजी नियमित शिक्षकांची मागणी करा


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## **कलम २४ - शिक्षकांची कर्तव्ये**


**काय आहे:** शिक्षकांनी पाळावयाच्या आचारसंहिता व कर्तव्ये.


**मुख्य कर्तव्ये:**

1. नियमित व वेळेवर उपस्थित राहणे

2. अभ्यासक्रमाची पूर्तता

3. प्रत्येक मुलाचे शिकण्याचे परिणाम पूर्ण करणे

4. नियमित मूल्यमापन करणे

5. पालकांशी संवाद साधणे

6. शाळा व SMC ला सहकार्य करणे

7. शिक्षण सत्राचे पूर्ण वेळापत्रक पाळणे


**नको त्या गोष्टी:**

- खाजगी शिकवणी करणे (त्याच शाळेतील विद्यार्थ्यांना)

- शिक्षणेतर कामे करणे

- भेदभाव करणे


**वापर कसा करावा:**

- शिक्षक नियमित येत नाहीत का तपासा (उपस्थिती रजिस्टर)

- अभ्यासक्रम पूर्ण होत नाही का SMC ला कळवा

- शिक्षक खाजगी ट्यूशन घेत आहेत का तपासा (कलम २८ उल्लंघन)

- तक्रारी लेखी स्वरूपात शाळा प्रमुखाकडे करा


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## **कलम २५ - विद्यार्थी-शिक्षक प्रमाण (PTR)**


**काय आहे:** विशिष्ट विद्यार्थी संख्येवर ठरवलेले शिक्षक असणे आवश्यक.


**निर्धारित प्रमाण:**

- **इयत्ता १-५**: ३० विद्यार्थ्यांवर १ शिक्षक

- **इयत्ता ६-८**: ३५ विद्यार्थ्यांवर १ शिक्षक

- विषयवार शिक्षक (गणित, विज्ञान, सामाजिक, भाषा)

- शारीरिक शिक्षण व कला शिक्षक


**स्पष्टीकरण:**

- शिक्षकांची संख्या कमी असल्यास गुणवत्ता खालावते

- प्रत्येक मुलाला योग्य लक्ष मिळावे

- विषय तज्ञ शिक्षक असावेत


**वापर कसा करावा:**

- शाळेतील विद्यार्थी संख्या व शिक्षक संख्या मोजा

- प्रमाण योग्य नसल्यास लेखी तक्रार करा

- SMC द्वारे अधिक शिक्षकांची मागणी करा

- शिक्षण अधिकाऱ्यांकडे सातत्याने पाठपुरावा करा


**उदाहरण:** शाळेत ९० विद्यार्थी पण फक्त २ शिक्षक = कलम २५ चे उल्लंघन.


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## **कलम २६ - शिक्षकाची रिक्त पदे भरणे**


**काय आहे:** शिक्षकांची रिक्त पदे ६ महिन्यांच्या आत भरणे आवश्यक.


**स्पष्टीकरण:**

- शिक्षक निवृत्त/रजेवर/बदली झाला तर लगेच नेमणूक

- ६ महिन्यांपेक्षा जास्त काळ पद रिक्त ठेवता येणार नाही

- तात्पुरती व्यवस्था करणे आवश्यक

- शिक्षणाची गुणवत्ता खालावू नये


**वापर कसा करावा:**

- शिक्षक रिक्त पदावर नसल्यास वेळ नोंदवा

- ६ महिने उलटले तर तक्रार करा

- SMC द्वारे प्रशासनावर दबाव आणा

- RTI द्वारे नेमणूक प्रक्रिया माहिती मागा


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## **कलम २७ - शिक्षणेतर प्रयोजनास प्रतिबंध**


**काय आहे:** शिक्षकांना शिक्षणाव्यतिरिक्त कामे करण्यास लावता येणार नाही.


**प्रतिबंधित कामे:**

- निवडणूक कर्तव्य (जनगणना सोडून)

- आपत्ती व्यवस्थापन (शिक्षण वगळता)

- दारू धोरण, पल्स पोलिओ (शिक्षण संबंधित कार्यक्रम सोडून)


**परवानगी असलेली कामे:**

- जनगणना

- शैक्षणिक सर्वेक्षण

- मतदार यादी अद्ययावत (शालेय कार्य म्हणून)


**स्पष्टीकरण:**

- शिक्षकांचा मुख्य उद्देश शिकवणे

- इतर कामांमुळे शिक्षण खालावते

- मुलांचा हक्क संरक्षित करणे


**वापर कसा करावा:**

- शिक्षक शाळेत नसल्यास कारण विचारा

- सतत शिक्षणेतर कामात असल्यास तक्रार करा

- प्रशासनाने शिक्षकांना अनावश्यक बोलावू नये

- SMC द्वारे शिक्षकांची शाळेतील उपस्थिती मोजा


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## **कलम २८ - खाजगी शिकवणी प्रतिबंध**


**काय आहे:** शिक्षक आपल्या शाळेतील विद्यार्थ्यांना खाजगी ट्यूशन देऊ शकत नाहीत.


**स्पष्टीकरण:**

- हितसंबंधाचा टक्कर

- वर्गात मुद्दाम कमी शिकवणे व ट्यूशनमध्ये शिकवणे - अनैतिक

- मुलांवर व पालकांवर आर्थिक ताण

- शाळेच्या वेळेचा गैरवापर


**परवानगी:**

- इतर शाळेतील विद्यार्थ्यांना शिकवू शकतात

- स्वतःची शाळा नाही तर परवानगी


**वापर कसा करावा:**

- शिक्षक आपल्या शाळेतील मुलांना ट्यूशन देत असल्यास तक्रार करा

- पुरावे (फी पावत्या, इतर पालकांची साक्ष) गोळा करा

- शाळा प्रमुख/BEO कडे लेखी तक्रार

- शिस्तभंगाची कारवाई होऊ शकते


**महत्त्वाचे:** शाळेत सर्व विषय चांगल्या पद्धतीने शिकवले तर ट्यूशनची गरज नसावी.


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## **कलम २९ - अभ्यासक्रम व मूल्यमापन**


**काय आहे:** अभ्यासक्रम संतुलित व बालमित्र असावा, मूल्यमापन सतत असावे.


**स्पष्टीकरण:**

- अभ्यासक्रम बालकाच्या सर्वांगीण विकासासाठी

- NCERT/राज्य अभ्यासक्रम पालन करणे

- सतत व सर्वंकष मूल्यमापन (CCE) - परीक्षांवर भर नाही

- पोट पुस्तके, भारी पिशव्या टाळाव्यात

- शिक्षण आनंददायी असावे


**मूल्यमापनाचे प्रकार:**

- दैनंदिन कक्षेतील निरीक्षण

- प्रोजेक्ट, गृहपाठ

- मौखिक परीक्षा

- वर्षांतीची परीक्षा (निर्णायक नाही)


**वापर कसा करावा:**

- मुलाची पिशवी जड असल्यास शाळेला आक्षेप घ्या

- अभ्यासक्रमाबाहेरील पुस्तके लादली तर तक्रार करा

- केवळ गुणांवर लक्ष न देता शिकण्याच्या प्रगतीवर लक्ष द्या

- शिक्षकांकडून नियमित अभिप्राय मागा


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## **कलम ३० - परीक्षा व पूर्तता प्रमाणपत्र**


**काय आहे:** इयत्ता ८ वी पूर्ण केल्यावर प्रमाणपत्र देणे.


**स्पष्टीकरण:**

- प्रारंभिक शिक्षण पूर्ण झाल्याचा पुरावा

- पुढील शिक्षणासाठी आवश्यक

- बोर्ड परीक्षा नाही (केवळ शाळा स्तरावरची)

- शाळेने प्रमाणपत्र देणे आवश्यक


**वापर कसा करावा:**

- इयत्ता ८ वी पूर्ण झाल्यावर प्रमाणपत्र मागा

- हरवल्यास डुप्लिकेट मिळवा

- माध्यमिक शिक्षणासाठी आवश्यक

- शाळा बदलताना सोबत घ्या


---


## **कलम ३१ - बालकाच्या हक्काचे संरक्षण**


**काय आहे:** बालकाच्या अधिकारांचे संरक्षण करण्यासाठी तरतूद.


**स्पष्टीकरण:**

- कोणत्याही प्रकारचे शोषण नाही

- बालकाचा आदर व सन्मान

- सुरक्षित वातावरण

- भेदभाव रहित शिक्षण

- बाल हक्क आयोगाची भूमिका


**संरक्षणाचे क्षेत्र:**

- शारीरिक सुरक्षा

- भावनिक सुरक्षा

- शैक्षणिक हक्क

- समानता व न्याय


**वापर कसा करावा:**

- मुलाच्या हक्कांचे उल्लंघन झाल्यास तक्रार करा

- राज्य/राष्ट्रीय बालहक्क आयोगाशी संपर्क साधा

- बाल कल्याण समितीकडे (CWC) तक्रार करा

- कायदेशीर मदत घ्या


---


## **कलम ३२ - गाऱ्हाणी दूर करणे**


**काय आहे:** या कायद्याची अंमलबजावणी करताना उद्भवणाऱ्या गाऱ्हाणी दूर करण्याचा अधिकार.


**स्पष्टीकरण:**

- केंद्र/राज्य शासनाला गाऱ्हाणी सोडवण्याचा अधिकार

- स्पष्टीकरण जारी करणे

- नवीन मार्गदर्शक तत्त्वे

- कायद्याच्या भावनेनुसार निर्णय


**वापर कसा करावा:**

- कायद्याच्या अर्थाबाबत संभ्रम असल्यास स्पष्टीकरण मागा

- शासनाच्या मार्गदर्शक तत्त्वे वाचा

- RTI द्वारे अधिकृत स्पष्टीकरण मिळवा


---


## **कलम ३३ - राष्ट्रीय सल्लागार परिषदेची स्थापना**


**काय आहे:** केंद्र सरकारने राष्ट्रीय स्तरावर सल्लागार परिषद स्थापन करणे.


**कार्ये:**

- RTE च्या अंमलबजावणीचा आढावा

- केंद्र सरकारला सल्ला देणे

- धोरणात्मक मार्गदर्शन

- राज्यांमधील समन्वय

- वार्षिक अहवाल तयार करणे


**सदस्य:**

- शिक्षण तज्ञ

- बालहक्क कार्यकर्ते

- शासकीय अधिकारी

- शिक्षक संघटना प्रतिनिधी

- पालक प्रतिनिधी


**वापर कसा करावा:**

- राष्ट्रीय स्तरावरील समस्या परिषदेकडे पाठवा

- परिषदेचे अहवाल वाचा व अभ्यासा

- धोरणात्मक बदलांसाठी सूचना पाठवा


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## **कलम ३४ - राज्य सल्लागार परिषदेची स्थापना**


**काय आहे:** प्रत्येक राज्यात सल्लागार परिषद स्थापन करणे.


**कार्ये:**

- राज्यातील RTE अंमलबजावणीचा आढावा

- राज्य सरकारला सल्ला

- स्थानिक समस्यांचे निराकरण

- जिल्हा स्तरावरील समन्वय

- वार्षिक अहवाल राज्य सरकारला


**वापर कसा करावा:**

- राज्यातील शैक्षणिक समस्या परिषदेकडे पाठवा

- परिषदेच्या बैठकीत सहभाग (नागरिक म्हणून)

- परिषदेचे अहवाल माहिती अधिकारातून मिळवा

- स्थानिक स्तरावर दबाव गट तयार करा


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## **कलम ३५ - निदेश देण्याचा अधिकार**


**काय आहे:** समुचित शासनाला शाळांना व स्थानिक प्राधिकरणांना निदेश देण्याचा अधिकार.


**स्पष्टीकरण:**

- कायद्याची पूर्ण अंमलबजावणी करण्यासाठी

- आदेश जारी करणे

- अनुपालन सुनिश्चित करणे

- दंडात्मक कारवाई


**वापर कसा करावा:**

- शाळा कायद्याचे पालन करत नसेल तर शासनाकडे निदेश जारी करण्याची मागणी करा

- प्रशासकीय निदेश मिळाले का तपासा

- निदेशांची अंमलबजावणी झाली का पाठपुरावा करा


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## **कलम ३६ - खटला चालविण्यास पूर्वमंजुरी**


**काय आहे:** RTE उल्लंघनासाठी खटला दाखल करण्यापूर्वी समुचित शासनाची मंजुरी आवश्यक.


**स्पष्टीकरण:**

- तुटपुंज्या तक्रारींपासून संरक्षण

- गंभीर प्रकरणी न्यायालयीन कारवाई

- फिर्याद दाखल करण्यापूर्वी प्रशासकीय पातळीवर प्रयत्न

- अधिकाऱ्यांचे संरक्षण (सदभावनापूर्वक कार्य केले असल्यास)


**वापर कसा करावा:**

- प्रथम प्रशासकीय तक्रार करा

- समाधानकारक कारवाई न झाल्यास न्यायालयाचा आश्रय

- शासनाची पूर्वमंजुरी मिळवा

- कायदेशीर सल्लामसलत घ्या


---


## **कलम ३७ - सदभावनापूर्वक कारवाईस संरक्षण**


**काय आहे:** सदभावनापूर्वक केलेल्या कार्यासाठी अधिकाऱ्यांना कायदेशीर संरक्षण.


**स्पष्टीकरण:**

- कायद्याच्या अंमलबजावणीत केलेली चूक

- हेतूपूर्ण गैरवर्तन नाही

- प्रामाणिकपणे घेतलेले निर्णय

- कर्मचाऱ्यांचे संरक्षण


**वापर कसा करावा:**

- अधिकाऱ्यांनी गैरवर्तन केले असल्यास तो हेतूपूर्ण होता का तपासा

- सदभावनेची कारवाई असल्यास वेगळे दृष्टिकोन

- दुर्भावनापूर्ण कारवाई असल्यास कायदेशीर उपाय


---


## **कलम ३८ - नियम करण्याचा अधिकार**


**काय आहे:** समुचित शासनाला RTE च्या अंमलबजावणीसाठी नियम तयार करण्याचा अधिकार.


**नियम काय असू शकतात:**

- प्रवेश प्रक्रिया

- वयाचा पुरावा स्वीकारणे

- शाळा मान्यतेची प्रक्रिया

- शिक्षकांच्या अहर्ता व नियुक्ती

- SMC ची स्थापना व कार्य


RTE 2009 (शिक्षणाचा हक्क कायदा) अंमलबजावणी झाली नाही तर खालील ठिकाणी तक्रारी करता येतात — (क्रमाने / एकाच वेळीही करता येतात):


1) शाळा स्तर


मुख्याध्यापक / संस्था प्रमुख


लेखी तक्रार व प्राप्ती पावती घ्या.


2) शिक्षण विभाग (स्थानिक)


गटशिक्षणाधिकारी (BEO) – प्राथमिक


शिक्षणाधिकारी (प्राथमिक / माध्यमिक), जिल्हा परिषद


प्रवेश नाकारला, फी आकारली, सुविधा नाहीत इ. बाबींसाठी.


3) शिक्षण उपसंचालक (DyDE)


जिल्हा/विभागीय स्तरावर गंभीर किंवा प्रलंबित प्रकरणांसाठी.


4) RTE तक्रार पोर्टल / शिक्षण विभाग


राज्य शिक्षण विभागाकडे ऑनलाईन/लेखी तक्रार.


5) राज्य बालहक्क संरक्षण आयोग (SCPCR)


बालकांच्या हक्कांचे उल्लंघन (प्रवेश नकार, भेदभाव, छळ, RTE उल्लंघन).


6) जिल्हाधिकारी (Collector)


प्रशासकीय दुर्लक्ष, आदेशांची अंमलबजावणी न होणे.


7) लोकशिक्षण संचालक / शिक्षण आयुक्त


धोरणात्मक किंवा वारंवार उल्लंघन प्रकरणे.


8) माहिती अधिकार (RTI)


प्रवेश यादी, RTE कोटा, खर्च, मान्यता, निरीक्षण अहवाल मिळवण्यासाठी


माहिती न दिल्यास प्रथम अपील → राज्य माहिती आयोग.


9) पोलिस तक्रार


धमकी, बनावट कागदपत्रे, आर्थिक फसवणूक, छळ असल्यास (IPC लागू).


10) न्यायालय


उच्च न्यायालय (रिट याचिका) – गंभीर व सातत्यपूर्ण उल्लंघनासाठी.


---


उपयुक्त टिप्स:


तक्रार नेहमी लेखी, पुराव्यांसह (अर्ज, पावती, फोटो, व्हॉट्सअॅप/ईमेल).


दिनांक, कलम क्रमांक (RTE) स्पष्ट नमूद करा.


एकाच वेळी शिक्षणाधिकारी + SCPCR + RTI असा दबावयुक्त मार्ग प्रभावी ठरतो.

नोट..... 👇

माहितीचा अधिकार (RTI) – राइट टू इन्फॉर्मेशन

👉 माहितीचा अधिकार (RTI) अधिनियम, २००५

👉 RTI कार्यकर्त्यांसाठी उपयुक्त माहिती

नोट............... 👇

👉 माहितीचा अधिकार अधिनियम, २००५ नुसार, RTI अर्ज मराठी, इंग्रजी किंवा त्या क्षेत्रातील अधिकृत भाषेत सादर करता येतो.

👉 हा प्रत्येक सामान्य नागरिकाचा मूलभूत अधिकार आहे, जो लोकशाहीला मजबूत करतो.

👉 तुम्ही भारतातील सर्व राज्ये, केंद्रशासित प्रदेश आणि सरकारी विभागांकडून माहिती मागू शकता.

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👉 संपादक एवं लेखक: समाजसेवक, RTI कार्यकर्ता

👉 श्री दयाशंकर गुप्ता जी

👉 नमस्कार चमत्कार 👈

👉 मेरा देश मेरा वतन समाचार 👈

👉 बुलंद आवाज न्यूज़ 👈

👉 दया की सोच

नोट........ 👉 👇👇✍️🙏

मित्रांनो, आशा आहे की तुम्ही ही माहिती शेवटपर्यंत वाचली असेल आणि ती तुम्हाला खूप आवडली असेल. लिहिताना काही चूक झाली असेल तर माफ करा, त्याबद्दल आम्ही क्षमस्व मागतो. कृपया ही पोस्ट लाईक करा, शेअर करा आणि जनहित व लोकहितासाठी पुढे पाठवा. 🙏 धन्यवाद 🙏

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नमस्कार मित्रांनो! 🙏

जय हिंद 🇮🇳 जय भारत 🇮🇳 जय महाराष्ट्र 🙏 वंदे मातरम 🙏

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आरटीई (RTE) अधिनियम 2009, जिसका पूरा नाम निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 है, भारत में 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है। यह अधिनियम 4 अगस्त 2009 को पारित हुआ और 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ।

एडमिशन से संबंधित मुख्य प्रावधान:

कोई स्क्रीनिंग या इंटरव्यू नहीं: कोई भी स्कूल (सरकारी या निजी) एडमिशन के लिए बच्चे या अभिभावक का इंटरव्यू नहीं ले सकता। कैपिटेशन फीस (डोनेशन) लेना पूरी तरह प्रतिबंधित है। (धारा 13)

25% आरक्षण निजी स्कूलों में: अनएडेड निजी स्कूलों (प्राइवेट अनएडेड) को एंट्री लेवल क्लास (क्लास 1 या प्री-प्राइमरी) में कुल सीटों का कम से कम 25% आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूहों (disadvantaged groups जैसे SC/ST, विकलांग आदि) के बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है। इन बच्चों की शिक्षा निःशुल्क होती है, और स्कूल को सरकार से प्रतिपूर्ति मिलती है। (धारा 12(1)(c))

उम्र के अनुसार एडमिशन: यदि कोई बच्चा 6 वर्ष से अधिक उम्र का है और पहले स्कूल नहीं गया या ड्रॉपआउट है, तो उसे उम्र के अनुसार подходя कक्षा में एडमिशन दिया जाएगा। विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जा सकती है। (धारा 4)

किसी भी समय एडमिशन: बच्चे को शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद भी एडमिशन से वंचित नहीं किया जा सकता। (धारा 15)

आवेदन प्रक्रिया: ज्यादातर राज्यों में RTE के तहत 25% आरक्षण के लिए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया जाता है (जैसे गुजरात में rte.orpgujarat.com, अन्य राज्यों में राज्य शिक्षा विभाग की वेबसाइट)। लॉटरी सिस्टम से चयन होता है। दस्तावेज जैसे आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण, जन्म प्रमाण आदि आवश्यक होते हैं।

यदि आप किसी विशिष्ट राज्य में वर्तमान RTE एडमिशन प्रक्रिया (2025-26 सत्र) या आवेदन की जानकारी चाहते हैं, तो कृपया राज्य का नाम बताएं, ताकि अधिक सटीक जानकारी दे सकूं। RTE से संबंधित शिकायत के लिए राज्य शिक्षा विभाग या NCPCR से संपर्क करें? ✍️🙏🙏

है।

🙏👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇 🙏 




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                    🙏 पत्र के🙏



        संपादक श्री दयाशंकर गुुुप्ता जी



नोट........ 👉🙏



 दोस्तों उम्मीद करता हूं कि आप सभी, यह आर्टिकल को अंत तक पढ़े होंगे एवं यह आर्टिकल आपको बेहद पसंद आया होगा, हैं।और अगर लिखने में कोई त्रुटि हुई हो तो क्षमा करें इस के लिए हम आप क्षमा मांगते हैं और हमारे इस आर्टिकल को लाइक करें शेयर करें ? 🙏 जनहित लोकहित के लिए धन्यवाद 🙏

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