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चिमुकल्या हातांची मोठी झेप: साडेसहा वर्षांच्या ईशाने दिला पर्यावरणासोबत माणुसकीचा संदेश

चिमुकल्या हातांची मोठी झेप: साडेसहा वर्षांच्या ईशाने दिला पर्यावरणासोबत माणुसकीचा संदेश



ठाणे: पर्यावरणाचे रक्षण करण्यासाठी केवळ वय नाही, तर संवेदनशील मन आणि संस्कारांची गरज असते, हे ठाण्यातील ईशा संदीप मोरे या ६.५ वर्षांच्या चिमुकलीने सिद्ध करून दाखवले आहे. ईशाने तिचे आई-वडील कविता आणि संदीप मोरे यांच्यासोबत भेट देऊन 'प्रकल्प आशादायी' (Project Aashayein) उपक्रमासाठी स्वतः जमा केलेल्या ५१ NWPP (नॉन-वोव्हन) पिशव्या सुपूर्द केल्या.

कुटुंबाचा सहभाग: खऱ्या जागरूकतेची सुरुवात

ईशाचे हे पाऊल केवळ पिशव्या जमा करण्यापुरते मर्यादित नाही, तर ते 'REACH' (जबाबदारी, सहानुभूती, जागरूकता, करुणा आणि सुसंवाद) या मूल्यांचे जिवंत उदाहरण आहे. जेव्हा कविता आणि संदीप मोरे यांच्यासारखे पालक आपल्या मुलांना अशा उपक्रमात सहभागी करून घेतात, तेव्हा खऱ्या अर्थाने समाज बदलतो. पर्यावरण रक्षण हा केवळ सरकारचा विषय नसून, घरातील प्रत्येक सदस्याने त्यात वाटा उचलणे हाच खऱ्या जागरूकतेचा आणि समस्येवरचा खरा उपाय आहे.

काय आहे 'प्रकल्प आशादायी'?

हा ठाणे जिल्हा प्रशासनाचा एक पथदर्शी (Pilot) प्रकल्प असून तो विजयकुमार कट्टी (संस्थापक, वेसॅक इंडिया) यांच्या संकल्पनेतून साकार झाला आहे. या मोहिमेला मनोज सानप (जिल्हा माहिती अधिकारी, ठाणे) यांचे सक्रिय सहकार्य लाभले असून, ठाण्याचे जिल्हाधिकारी डॉ. श्रीकृष्ण पांचाळ I.A.S. यांनी याला विशेष पाठबळ दिले आहे.

या मोहिमेची मुख्य उद्दिष्टे:

• प्लास्टिक मुक्ती: या पिशव्यांचा पुनर्वापर करून ६२.५ टन एकेरी वापरल्या जाणाऱ्या प्लास्टिकला (Single-use plastic) प्रतिबंध करणे.

• दुसरे आयुष्य (Second Life): घराघरातील अडगळीत पडलेल्या NWPP पिशव्यांना पुन्हा चलनात आणून 'REUSE' संकल्पना राबवणे.

• मुळापासून प्लास्टिक बंदी आणि आर्थिक बचत: जेव्हा आपण या जमा झालेल्या पिशव्या लहान विक्रेत्यांना देतो, तेव्हा ते मुळातूनच प्लास्टिक पिशव्यांची खरेदी थांबवू शकतात. यामुळे त्या लहान व्यापाऱ्यांची दरमहा २,००० ते २,५०० रुपयांची बचत होते, जी त्यांच्या कुटुंबासाठी मोठा आधार ठरते.

ईशाच्या योगदानाचे पर्यावरण मूल्य (Impact Scorecard)

सोबत जोडलेल्या 'प्रशस्तीपत्र आणि इम्पॅक्ट स्कोरकार्ड' मधील माहितीनुसार, ईशाच्या ५१ पिशव्यांनी पर्यावरणावर पुढील सकारात्मक परिणाम साधला आहे:

• १२.७५ किलो एकेरी प्लास्टिकचा वापर टाळला.

• औद्योगिक प्रक्रियेतील २,२९५ लिटर पाण्याची बचत झाली.

• ७६.५ किलो CO2e उत्सर्जनाचे प्रमाण कमी झाले.

• एका वर्षात ३.८३ पूर्ण वाढलेली झाडे जेवढा कार्बन शोषतात, तेवढी मदत निसर्गाला झाली.

________________________________________

एका 'सामान्य माणसाचे' आवाहन

सोबतच्या दुसऱ्या छायाचित्रात ईशाचा आनंदी चेहरा आणि तिने जमा केलेल्या पिशव्या पाहून आपल्याला हे उमजते की, बदल आपल्यापासूनच सुरू होतो. मी एक 'सामान्य माणूस' म्हणून सर्व ठाणेकरांना विनंती करतो की, आपणही ईशाचा आदर्श घेऊन आपल्या घरातील अशा पिशव्या या मोहिमेसाठी दान कराव्यात. आपली ही छोटीशी मदत आणि काळजी एखाद्या लहान व्यापाऱ्याचा मोठा आर्थिक आणि मानसिक आधार बनू शकते.

"छोटे कृती, मोठा बदल."

चला, आपण सर्व मिळून २५०,००० पिशव्यांचे ध्येय गाठूया आणि ठाण्याला प्लास्टिकमुक्त आणि अधिक हरित बनवूया!

— विजयकुमार कट्टी

संस्थापक, वेसॅक इंडिया (VesacIndia)


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जय संविधान जय भीम जय संविधान का चौथा स्तंभ ने अपने दिल की कुछ प्रमुखताएं या बातें या भावनाएं रखा है अप सभी के बिच में सभी नागरिकों के समक्ष प्रस्तुत किया है और लिखने में कोई त्रुटि हुई है तो क्षमा करें लिखने गलती हुई हैं तो क्षमा करना श्री दयाशंकर गुप्ता जी की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद🙏

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