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आज, 15 मार्च 2026 को भक्त शिरोमणि माँ कर्मा देवी (या भक्त माता कर्मा) की जयंती है। यह पावन अवसर मुख्य रूप से साहू (तेली/वैश्य) समाज की आराध्य देवी के रूप में बहुत उत्साह से मनाया जाता है, खासकर छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और अन्य क्षेत्रों में। माँ कर्मा देवी के बारे में संक्षेप में: जन्म: चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी (चातिरा ग्यारस) को झाँसी (उत्तर प्रदेश) में राम साह के घर हुआ था (संवत 1073, लगभग 1017 ईस्वी)। वे भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थीं। कथा है कि उन्होंने अपनी भक्ति से भगवान को खिचड़ी चढ़ाई, और तब से पुरी के जगन्नाथ मंदिर में उनकी खिचड़ी का पहला प्रसाद जगन्नाथ जी को अर्पित किया जाता है

 माँ कर्मा जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🙏✨




आज, 15 मार्च 2026 को भक्त शिरोमणि माँ कर्मा देवी (या भक्त माता कर्मा) की जयंती है। यह पावन अवसर मुख्य रूप से साहू (तेली/वैश्य) समाज की आराध्य देवी के रूप में बहुत उत्साह से मनाया जाता है, खासकर छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और अन्य क्षेत्रों में।

माँ कर्मा देवी के बारे में संक्षेप में:

जन्म: चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी (चातिरा ग्यारस) को झाँसी (उत्तर प्रदेश) में राम साह के घर हुआ था (संवत 1073, लगभग 1017 ईस्वी)।

वे भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थीं। कथा है कि उन्होंने अपनी भक्ति से भगवान को खिचड़ी चढ़ाई, और तब से पुरी के जगन्नाथ मंदिर में उनकी खिचड़ी का पहला प्रसाद जगन्नाथ जी को अर्पित किया जाता है।

आदर्श: त्याग, सेवा, समर्पण, भक्ति और समाज सुधार की प्रतीक। उन्होंने अस्पृश्यता और रूढ़िवाद के खिलाफ आवाज उठाई, महिलाओं को सशक्त बनाया।

आराधना: मुख्य रूप से साहू समाज की कुलदेवी/आराध्य देवी के रूप में पूजी जाती हैं। जयंती पर शोभायात्रा, भजन-कीर्तन, आरती, प्रसाद वितरण और सामूहिक आयोजन होते हैं।

जय भक्त माता कर्मा! जय माँ कर्मा देवी!

आपको और आपके परिवार को माँ की कृपा से सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और भक्ति की प्राप्ति हो।

हर दुख दूर हो, जीवन में सेवा और समर्पण का भाव सदैव बना रहे। 🌸🙏

|| ॐ माँ कर्मा देव्यै नमः ||

जय माँ कर्मा! 🙏



माँ कर्मा (कर्मा बाई या कर्मा देवी) साहू (तेली) समाज की आराध्य देवी और भक्त शिरोमणि हैं। वे भगवान श्री कृष्ण (जगन्नाथ) की परम भक्त थीं, जिनका जीवन सेवा, त्याग, भक्ति और कर्मयोग का अद्भुत उदाहरण है।

मुख्य जानकारी:

जन्म: लगभग 1017 ईस्वी (संवत 1073) में उत्तर प्रदेश के झाँसी में चैत्र कृष्ण पक्ष की पापमोचनी एकादशी को हुआ था।

पिता: राम साह (जीवनराम डूडी) – एक दानवीर और धर्मपरायण व्यक्ति।

समाज: वाघरी वंशीय वैश्य (साहू/तेली) समुदाय से संबंधित।

जीवन का सार: बचपन से ही श्री कृष्ण की भक्ति में लीन रहती थीं। विवाह के बाद भी भक्ति और सेवा भाव अटूट रहा। कई चमत्कारों और कठिनाइयों के बीच उन्होंने समाज में अस्पृश्यता, रूढ़िवाद के खिलाफ आवाज उठाई और महिलाओं के सशक्तिकरण का कार्य किया।

प्रसिद्ध कथा: उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने पुरी (जगन्नाथ पुरी) में उनकी बनाई खिचड़ी को पहले भोग के रूप में स्वीकार किया। आज भी जगन्नाथ मंदिर में सुबह सबसे पहले कर्मा बाई की खिचड़ी का भोग लगता है – यह परंपरा 1000 वर्षों से चली आ रही है।

जयंती: हाल ही में (मार्च 2026 के आसपास) माँ कर्मा बाई जयंती मनाई गई है, जिसके लिए देशभर में साहू समाज और अन्य भक्तों ने बधाइयाँ दीं। कई जगहों पर आरती, भजन और कथा का आयोजन होता है।

माँ कर्मा का जीवन संदेश देता है कि सच्ची भक्ति कर्म से होती है – निस्वार्थ सेवा, समर्पण और अच्छे कार्य से ही ईश्वर प्रसन्न होते हैं।

जय माँ कर्मा देवी! जय भक्त शिरोमणि! 🌺

हर हर महादेव, जय जगन्नाथ!

क्या आप माँ कर्मा की कोई विशेष कथा, आरती या भजन सुनना/जानना चाहते हैं? 😊


माँ कर्मा देवी (जिन्हें भक्त शिरोमणि माँ कर्मा, कर्माबाई या कर्मा माता भी कहा जाता है) साहू (तेली) समाज की आराध्य देवी हैं। वे भक्ति, त्याग, सेवा और परोपकार की प्रतीक मानी जाती हैं। मुख्य रूप से उत्तर भारत और छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश जैसे क्षेत्रों में उनकी पूजा बहुत श्रद्धा से की जाती है।

जीवन परिचय (संक्षेप में)

जन्म: चैत्र कृष्ण पक्ष की पाप मोचनी एकादशी, संवत 1073 (लगभग 1017 ईस्वी) को उत्तर प्रदेश के झाँसी शहर में।

पिता: श्री राम साह (या रामशाह साहू) – एक प्रसिद्ध तेल व्यापारी और धार्मिक व्यक्ति।

माता: लीलावती।

समुदाय: वाघरी/बाथरी वंश के वैश्य (साहू/तेली) समुदाय से।

वे अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं और बचपन से ही भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थीं। वे भजन गातीं, कीर्तन करतीं और दीन-दुखियों की मदद करतीं।

विवाह: पद्माजी साहू (नरवार, शिवपुरी, मध्य प्रदेश) से हुआ।

जीवन का मुख्य प्रसंग: उनकी भक्ति इतनी गहन थी कि वे पुरी (जगन्नाथ धाम) तक पैदल गईं। वहाँ उन्होंने भगवान जगन्नाथ को अपनी सादगी भरी खिचड़ी का भोग लगाया। ऐसा माना जाता है कि भगवान ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर पहले उनकी खिचड़ी ग्रहण की, जिसके कारण आज भी जगन्नाथ मंदिर में "जगन्नाथ का भात जगत पसारे हाथ" वाली परंपरा है – अर्थात खिचड़ी का भोग सबसे पहले लगता है।

समाधि/दिव्यता: उनकी भक्ति और बलिदान की वजह से उन्हें देवी रूप में पूजा जाता है। वे सेवा, समर्पण और निस्वार्थ भक्ति की मिसाल हैं।

महत्व और पूजा

साहू समाज में उन्हें आराध्य देवी माना जाता है।

माँ कर्मा जयंती चैत्र मास में (आमतौर पर मार्च-अप्रैल) धूमधाम से मनाई जाती है।

देशभर में उनके कई मंदिर हैं, जैसे राजिम (छत्तीसगढ़), गंजबासौदा (मध्य प्रदेश) आदि में।

उनकी आरती और भजन बहुत लोकप्रिय हैं (जैसे अनुराधा पौडवाल की आवाज में "आरती माँ कर्मा की")।

वे सभी सनातनीयों के लिए परोपकार और भक्ति का आदर्श हैं।

जय माँ कर्मा देवी!

भक्त शिरोमणि माँ कर्मा देवी की जय! 🙏

यदि आप उनकी आरती, जीवन गाथा की पूरी कहानी, मंदिर की जानकारी या कुछ और विशिष्ट जानना चाहें तो बताइए! 🌺

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                    🙏 पत्र के🙏


        संपादक श्री दयाशंकर गुुुप्ता जी


नोट........ 👉🙏


 दोस्तों उम्मीद करता हूं कि आप सभी, यह आर्टिकल को अंत तक पढ़े होंगे एवं यह आर्टिकल आपको बेहद पसंद आया होगा, हैं।और अगर लिखने में कोई त्रुटि हुई हो तो क्षमा करें इस के लिए हम आप क्षमा मांगते हैं और हमारे इस आर्टिकल को लाइक करें शेयर करें ? 🙏 जनहित लोकहित के लिए धन्यवाद 🙏


जय संविधान जय भीम जय संविधान का चौथा स्तंभ ने अपने दिल की कुछ प्रमुखताएं या बातें या भावनाएं रखा है अप सभी के बिच में सभी नागरिकों के समक्ष प्रस्तुत किया है और लिखने में कोई त्रुटि हुई है तो क्षमा करें लिखने गलती हुई हैं तो क्षमा करना श्री दयाशंकर गुप्ता जी की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद🙏


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