Skip to main content

भारत में पुलिस विभाग के बारे में लोग अक्सर दो ध्रुवों में बात करते हैं: अच्छे/ईमानदार पुलिस वाले और भ्रष्टाचारी पुलिस वाले। हकीकत यह है कि दोनों ही मौजूद हैं, लेकिन सिस्टम की कमजोरियों (कम तनख्वाह, राजनीतिक दबाव, ट्रांसफर का डर, जनता की रिश्वत देने की आदत) की वजह से भ्रष्टाचार ज्यादा चर्चा में आता है।

 जनता पुलिस से डरने के कई कारण हैं, लेकिन यह पूरी तरह से पुलिस की गलती नहीं है—यह सिस्टम, समाज और इतिहास से जुड़ी समस्या है। चलिए स्टेप बाय स्टेप समझते हैं, और फिर सरल समाधान पर बात करेंगे।


1. जनता पुलिस से क्यों डरती है?

भ्रष्टाचार और पावर का दुरुपयोग: कई मामलों में पुलिस वाले रिश्वत मांगते हैं, झूठे केस बनाते हैं या आम लोगों को परेशान करते हैं। जैसे ट्रैफिक चेकिंग में बिना वजह फाइन या छोटे-मोटे मामलों में धमकी। इससे लोग सोचते हैं कि पुलिस मदद करने की बजाय समस्या बढ़ाएगी।

डर का माहौल: पुलिस की यूनिफॉर्म और अथॉरिटी से ही डर लगता है। भारत में औपनिवेशिक काल से पुलिस सिस्टम ब्रिटिश दौर का है, जो दमन करने के लिए बनाया गया था। आज भी कई जगहों पर पुलिस को "सत्ता का हथियार" माना जाता है, खासकर गरीबों या कमजोर वर्गों के लिए।

मीडिया और अनुभव: न्यूज में पुलिस की क्रूरता या घूसखोरी की खबरें ज्यादा दिखती हैं, जबकि अच्छे काम कम हाइलाइट होते हैं। अगर किसी का पर्सनल अनुभव बुरा रहा, तो वो पूरे सिस्टम को वैसा ही मान लेता है।

ट्रस्ट की कमी: सर्वे (जैसे इंडिया टुडे या अन्य रिपोर्ट्स) दिखाते हैं कि करीब 50-60% लोग पुलिस पर भरोसा नहीं करते, क्योंकि FIR दर्ज करने में देरी, जांच में पक्षपात या राजनीतिक दबाव जैसी शिकायतें आम हैं।

लेकिन हां, "भाई" (शायद "भय" का मतलब है?) इतना क्यों है? क्योंकि डर सिस्टमिक है—लोग सोचते हैं कि पुलिस से पंगा लेना महंगा पड़ेगा, चाहे वो सही हों।

2. क्या पुलिस वाले अच्छे नहीं होते?

नहीं, ऐसा नहीं है। बहुत से पुलिस वाले ईमानदार और समर्पित होते हैं। उदाहरण के लिए, महामारी में या आपदा में पुलिस ने जान जोखिम में डालकर काम किया। कई ऑफिसर जैसे किरन बेदी, अभयानंद या लोकल लेवल पर हजारों पुलिसकर्मी दिन-रात ड्यूटी करते हैं, बिना किसी रिवॉर्ड के।

समस्या ये है कि सिस्टम में कुछ भ्रष्ट लोग (जैसे सीनियर या राजनीतिक कनेक्शन वाले) अच्छे वालों को दबाते हैं। ट्रांसफर का डर, प्रमोशन में राजनीति या काम के बोझ (कम स्टाफ, ज्यादा केस) से ईमानदार लोग भी मजबूर हो जाते हैं।

आंकड़ों से: भारत में पुलिस फोर्स में करीब 20 लाख लोग हैं, और ज्यादातर (80-90%) ईमानदार काम करते हैं, लेकिन 10-20% भ्रष्टाचार की वजह से पूरी इमेज खराब हो जाती है।

3. इसका सरल उपाय क्या है?

समस्या जड़ से हल करने के लिए बड़े रिफॉर्म्स चाहिए, लेकिन सरल और प्रैक्टिकल उपाय ऐसे हो सकते हैं जो तुरंत लागू किए जा सकें:

ट्रांसपेरेंसी बढ़ाएं: हर पुलिस स्टेशन में बॉडी कैमरा अनिवार्य करें, ताकि इंटरैक्शन रिकॉर्ड हो। ऑनलाइन FIR और शिकायत सिस्टम (जैसे UP पुलिस का ऐप) को पूरे देश में फैलाएं, ताकि लोग बिना डर के रिपोर्ट कर सकें।

एकाउंटेबिलिटी: इंडिपेंडेंट बोर्ड बनाएं (जैसे पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी) जहां सिविलियन और रिटायर्ड जज शिकायतों की जांच करें। भ्रष्ट पुलिसवालों पर तेज सजा (जैसे सस्पेंशन या जेल) और अच्छे काम करने वालों को रिवॉर्ड दें।

ट्रेनिंग और सपोर्ट: पुलिस की ट्रेनिंग में मानवाधिकार, कम्युनिटी पुलिसिंग और मेंटल हेल्थ पर फोकस करें। स्टाफ बढ़ाएं ताकि ओवरवर्क न हो, और सैलरी/सुविधाएं बेहतर करें—खुश पुलिसकर्मी बेहतर काम करेंगे।

समाज की भूमिका: जनता भी पुलिस से सहयोग करे—अच्छे काम की सराहना करें, और भ्रष्टाचार की रिपोर्ट करें। मीडिया अच्छी स्टोरीज को भी कवर करे।

सरकारी स्तर पर: पुलिस रिफॉर्म्स (जैसे 2006 का सुप्रीम कोर्ट निर्देश) को सख्ती से लागू करें, जहां राजनीतिक हस्तक्षेप रोका जाए।

ये उपाय सरल हैं क्योंकि इन्हें लोकल लेवल से शुरू किया जा सकता है, बिना बड़े बजट के। लेकिन असली बदलाव तभी आएगा जब सरकार, पुलिस और जनता मिलकर काम करें? 🙏



आपका यह संदेश बहुत ही हृदयस्पर्शी और सच्चा है, Dayashankar Gupta जी!

सही कहा आपने—पुलिस वाले त्योहारों में भी, रात-दिन ड्यूटी पर तैनात रहते हैं। वे न अपनी सुविधा देखते हैं, न किसी अड़चन से पीछे हटते हैं। बस आम नागरिक की सुरक्षा, शांति और मदद के लिए दिन-रात एक कर देते हैं। त्योहारों के समय जब हम परिवार के साथ खुशियां मनाते हैं, तब वे हमें सुरक्षित रखने के लिए अपनी छुट्टियां, आराम सब कुर्बान कर देते हैं।

ऐसे समर्पित, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मियों को दिल से सैल्यूट और धन्यवाद!

जय महाराष्ट्र! 🇮🇳

जय हिंद! 🇮🇳

आप जैसे नागरिकों का यह सम्मान और आभार ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे ही सकारात्मक संदेश फैलाते रहिए—यह समाज को और मजबूत बनाता है। 🙏

अच्छे (ईमानदार) पुलिस वाले और भ्रष्ट पुलिस वाले में मुख्य फर्क इन बातों से दिखता है:

अच्छा/ईमानदार पुलिस वाला

विशेषता

भ्रष्ट पुलिस वाला

कर्तव्य निभाना

कानून का पालन करवाता है, बिना पक्षपात के। गरीब-अमीर सबके साथ एक जैसा व्यवहार।

पैसे/दबाव/रिश्वत के आधार पर काम करता है। गरीब को सताता है, अमीर/पावरफुल को बचाता है।

रिश्वत

रिश्वत नहीं लेता, चाहे कितना भी दबाव हो

छोटी-बड़ी हर चीज में रिश्वत मांगता है (चालान, FIR, जांच, छूट आदि)।

जनता के प्रति व्यवहार

मदद करता है, सहानुभूति दिखाता है, पीड़ित की सुनता है।

डराता-धमकाता है, अपमान करता है, FIR तक दर्ज नहीं करता बिना पैसे के।

न्याय की भावना

अपराधी को सजा दिलवाने की कोशिश करता है, चाहे वो कोई भी हो।

अपराधी से मिलीभगत करता है, केस कमजोर करता है, गवाहों को डराता है।

निजी लाभ

नौकरी को सेवा मानता है, पैसे से ज्यादा कर्तव्य महत्व देता है।

पद का इस्तेमाल व्यक्तिगत कमाई, संपत्ति बढ़ाने या रिश्वतखोरी के लिए करता है।

सिस्टम में प्रभाव

अच्छे पुलिस वाले को अक्सर ट्रांसफर, लूप लाइन या साइडलाइन कर दिया जाता है।

भ्रष्ट वाले अक्सर अच्छी पोस्टिंग, प्रमोशन और सुरक्षा पाते हैं।

समाज पर असर

समाज में विश्वास बढ़ाता है, कानून का राज मजबूत करता है।

कानून का मजाक बनाता है, लोगों का पुलिस से भरोसा उठ जाता है।

कुछ आसान उदाहरण से समझिए:

अच्छा पुलिस वाला — रात में किसी महिला को परेशान देखकर मदद करता है, घर छोड़कर आता है, FIR बिना पैसे के लिखता है।

भ्रष्ट पुलिस वाला — ट्रैफिक में छोटी गलती पर 500-1000 रुपये मांगता है, नहीं तो गाड़ी जब्त करने की धमकी देता है।

भारत में सच ये है कि दोनों तरह के पुलिस वाले मौजूद हैं। बहुत सारे ईमानदार और मेहनती अफसर हैं जो दिन-रात ड्यूटी करते हैं, अपनी जान जोखिम में डालते हैं, लेकिन सिस्टम की कमजोरियां (कम वेतन, राजनीतिक दबाव, ट्रांसफर का डर) भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती हैं।

फिर भी, अच्छे पुलिस वाले ही वो लोग हैं जो समाज को सुरक्षित रखने की असली उम्मीद हैं। अगर सिस्टम में सुधार आए (बेहतर ट्रेनिंग, बॉडी कैमरा, पारदर्शिता, मजबूत जवाबदेही) तो भ्रष्टाचार बहुत कम हो सकता है।

आपके आसपास कोई अच्छा पुलिस वाला दिखा हो या कोई खास अनुभव हो तो बताइए! 😊



भारत में पुलिस विभाग के बारे में लोग अक्सर दो ध्रुवों में बात करते हैं: अच्छे/ईमानदार पुलिस वाले और भ्रष्टाचारी पुलिस वाले। हकीकत यह है कि दोनों ही मौजूद हैं, लेकिन सिस्टम की कमजोरियों (कम तनख्वाह, राजनीतिक दबाव, ट्रांसफर का डर, जनता की रिश्वत देने की आदत) की वजह से भ्रष्टाचार ज्यादा चर्चा में आता है।

भ्रष्टाचारी पुलिस वाले (Corrupt Side)

कई सर्वे (जैसे Transparency International और हाल के रिपोर्ट्स) में भारतीय पुलिस को सबसे ज्यादा भ्रष्ट विभागों में टॉप पर रखा गया है।

आम लोग ट्रैफिक चालान, FIR दर्ज कराने, झगड़े सुलझाने में रिश्वत देने की शिकायत करते हैं।

हाल के कुछ बड़े केस:

पंजाब में एक सीनियर IPS अधिकारी (DIG स्तर) के घर से करोड़ों कैश, सोना, लग्जरी कारें बरामद हुईं (CBI ने गिरफ्तार किया)।

India में थानों में आरोपियों को बचाने/फंसाने के नाम पर रिश्वत के कई मामले आए।

माइनिंग माफिया, जमीन माफिया या क्राइम से जुड़े पुलिस वाले अक्सर सिस्टम में घुसे रहते हैं।

समस्या इतनी गहरी है कि कुछ लोग कहते हैं "एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है" — यानी कुछ भ्रष्ट लोग पूरे विभाग की छवि खराब कर देते हैं।


अच्छे/ईमानदार पुलिस वाले (Honest & Brave Side)

बहुत से ऐसे अधिकारी हैं जो सिस्टम के बावजूद ईमानदारी से काम करते हैं, अपराधियों से लड़ते हैं, और जनता की सेवा करते हैं। ये लोग अक्सर ट्रांसफर, धमकियां या राजनीतिक दबाव झेलते हैं, लेकिन अपनी ड्यूटी निभाते हैं।

कुछ मशहूर उदाहरण:

किरण बेदी — पहली महिला IPS, तिहाड़ जेल में सुधार किए, ड्रग्स और महिलाओं के खिलाफ काम किया।

अजित डोभाल — नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर, कई बड़े ऑपरेशनों में भूमिका (सर्जिकल स्ट्राइक आदि)।

संजुक्ता पराशर — असम में नक्सलियों और उग्रवादियों के खिलाफ बहादुरी से लड़ीं।

डी. रूपा — कर्नाटक कैडर, ईमानदारी और साहस के लिए जानी जाती हैं, कई बार ट्रांसफर हुए लेकिन नहीं झुकीं।

शिवदीप लांडे — बिहार में अपराध नियंत्रण के लिए मशहूर, बेधड़क काम किया।

नरेंद्र कुमार — माइनिंग माफिया के खिलाफ लड़ते हुए शहीद हो गए।

और भी कई जैसे सचिन अतुलकर, मनु महाराज, सोनिया नरंग — जो छोटे-छोटे स्तर पर भी ईमानदारी दिखाते हैं।

निष्कर्ष

सारे पुलिस वाले भ्रष्ट नहीं हैं, और न ही सारे ईमानदार। ज्यादातर आम पुलिसकर्मी कम सैलरी में लंबी ड्यूटी करते हैं, लेकिन कुछ लोग सिस्टम का फायदा उठाते हैं। अच्छे पुलिस वाले अक्सर चुपचाप काम करते हैं और मीडिया में कम आते हैं, जबकि भ्रष्टाचार के केस बड़े-बड़े हेडलाइंस बनते हैं।

अगर सिस्टम में सुधार हो (बेहतर ट्रेनिंग, सुरक्षा, राजनीतिक दखल कम करना, पारदर्शिता), तो ईमानदार पुलिस वाले ज्यादा मजबूत होंगे। आपका क्या अनुभव है? क्या कभी कोई ईमानदार पुलिस वाले से मदद मिली है? 😊

 आपका सवाल बिल्कुल जायज है और बहुत से लोग इसी बारे में सोचते हैं। "पुलिस वाले भी जब तक वर्दी में हैं, तब तक पुलिस हैं, उसके बाद वो भी आम नागरिक हैं—क्या उनको भैया डर नहीं है?"

दरअसल, हाँ—बहुत से पुलिसकर्मी वर्दी उतारने के बाद डरते हैं, और ये डर कई वजहों से होता है:

वर्दी की ताकत असली नहीं, बल्कि कानूनी/सामाजिक होती है — वर्दी पहनते ही उन्हें authority मिल जाती है, लोग डरते हैं, सहयोग करते हैं, और कानून उनके साथ खड़ा दिखता है। लेकिन वर्दी उतरते ही वो साधारण इंसान बन जाते हैं—कोई स्पेशल प्रोटेक्शन नहीं, कोई तुरंत मदद नहीं। कई बार तो वो खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं, खासकर उन इलाकों में जहाँ उन्होंने ड्यूटी के दौरान सख्ती की हो, मुकदमे लड़े हों, या अपराधियों से टकराव हुआ हो।

रियल लाइफ एग्जांपल्स और बातें — सोशल मीडिया पर कई वीडियो और चर्चाएँ आती हैं जहाँ पुलिस वाले खुद कहते हैं कि "वर्दी पहन लो, फिर पता चलेगा डर क्यों लगता है" — ये बात अक्सर तब निकलती है जब कोई आम आदमी उनसे सवाल करता है या बहस करता है। एक वायरल क्लिप में एक एक्स-आर्मी/शिक्षक ने जवाब दिया था कि "मैंने तो पहनकर उतार दी, फिर भी डर नहीं लगा" — मतलब वर्दी के बिना भी कुछ लोग मजबूत रहते हैं, लेकिन पुलिस में ये फर्क साफ दिखता है।

क्यों डर लगता है?

अपराधी/गैंग याद रखते हैं कौन सा पुलिस वाला उनके खिलाफ था।

बदला लेने का डर (खासकर छोटे शहरों/गाँवों में)।

परिवार की सुरक्षा का डर।

रोज की ड्यूटी में जो दुश्मनी बनती है, वो वर्दी उतरने पर भी खत्म नहीं होती।

कई पुलिसकर्मी ऑफ-ड्यूटी सादे कपड़ों में रहते हैं, कम प्रोफाइल रखते हैं, और कभी-कभी घर से बाहर निकलते वक्त भी सतर्क रहते हैं। कुछ तो कहते हैं कि वर्दी उनकी ढाल है—उतारते ही वो नंगे हो जाते हैं (मतलब सुरक्षा के मामले में)।

फिर भी, अच्छे पुलिस वाले ये भी मानते हैं कि वर्दी जिम्मेदारी की होती है, डर फैलाने या गुंडागर्दी की लाइसेंस नहीं। जो वर्दी का दुरुपयोग करते हैं, वो खुद को और सिस्टम को बदनाम करते हैं।

संक्षेप में: हाँ, उनको डर लगता है—क्योंकि वर्दी के बिना वो भी वही आम इंसान हैं, जिन्हें कानून और समाज की वैसी ही सुरक्षा चाहिए जैसी बाकी लोगों को। बस फर्क ये है कि उनकी जॉब की वजह से दुश्मन ज्यादा होते हैं।

आप क्या सोचते हैं—क्या वर्दी उतारने के बाद पुलिस वालों को ज्यादा सुरक्षा मिलनी चाहिए?

🙏👇👇👇👇👇👇👇👇👇 🙏 




       मेरा देश मेरा वतन समाचार 




                    🙏 पत्र के🙏




        संपादक श्री दयाशंकर गुुुप्ता जी




नोट........ 👉🙏




 दोस्तों उम्मीद करता हूं कि आप सभी, यह आर्टिकल को अंत तक पढ़े होंगे एवं यह आर्टिकल आपको बेहद पसंद आया होगा, हैं।और अगर लिखने में कोई त्रुटि हुई हो तो क्षमा करें इस के लिए हम आप क्षमा मांगते हैं और हमारे इस आर्टिकल को लाइक करें शेयर करें ? 🙏 जनहित लोकहित के लिए धन्यवाद 🙏


जय संविधान जय भीम जय संविधान का चौथा स्तंभ ने अपने दिल की कुछ प्रमुखताएं या बातें या भावनाएं रखा है अप सभी के बिच में सभी नागरिकों के समक्ष प्रस्तुत किया है और लिखने में कोई त्रुटि हुई है तो क्षमा करें लिखने गलती हुई हैं तो क्षमा करना श्री दयाशंकर गुप्ता जी की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद🙏


Comments

Popular posts from this blog

किरायेदार पुलिस सत्यापन: मकान मालिकों और किरायेदारों के लिए

किरायेदार पुलिस सत्यापन: मकान मालिकों और किरायेदारों के लिए                आवश्यक मार्गदर्शिका लगातार बढ़ती आबादी और आवास की कमी के कारण, यह स्वाभाविक है कि ज़्यादातर लोग घर खरीदने के बजाय किराए पर लेना ज़्यादा पसंद कर रहे हैं। सभी के लिए किराए पर लेना आसान बनाने के लिए, सरकार ने 2019 में मॉडल टेनेंसी एक्ट की शुरुआत की और इस एक्ट में, आप देखेंगे कि किराएदार का पुलिस सत्यापन एक बड़ी भूमिका निभाता है।  चूँकि भारत एक विकासशील देश है, इसलिए आम लोगों के बजट के भीतर लागत को बनाए रखना के कारण होने वाले तनाव को बढ़ाता है और रियल एस्टेट उद्योग पर दबाव काफी बढ़ गया है।  भारत में, जनसंख्या और शहरीकरण में वृद्धि के कारण, घर बनाने के लिए जगह कम हो गई है और अधिक इमारतें बन गई हैं। इससे किफायती घरों की कमी हो गई है। इस प्रकार, लोग अपार्टमेंट किराए पर देने की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसा करते समय, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि किराएदार का पुलिस सत्यापन पहले से ही हो चुका है। सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी किरायेदार पुलिस सत्यापन प्रक्रिया लागू ...

हाइब्रिड टेक्नोलॉजी फ़ॉर एन्हान्सिंग क्रॉप प्रॉडक्टिविटी नामक विषय पर तीन दिवसीस नैशनल सिम्पोज़ियम (संगोष्ठी) का आयोजन

 हाइब्रिड टेक्नोलॉजी फ़ॉर एन्हान्सिंग क्रॉप प्रॉडक्टिविटी नामक विषय पर तीन दिवसीस नैशनल सिम्पोज़ियम (संगोष्ठी) का आयोजन दि ट्रस्ट फ़ॉर एडवांसमेंट ऑफ़ एग्रीकल्चरल साइंसेस (टास) द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् और सी.जी.आई.ए.आर. के इक्रीसैट (इंडिया), इंटरनैशनल मेज़ एंड व्हीट इंप्रूवमेंट सैंटर (सिमिट), मैक्सिको; इंटरनैशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट, फ़िलिपीन्स और इंडियन सोसाइटी ऑफ़ प्लान्ट जैनेटिक रिसोर्सेस जैसे प्रमुख संस्थानों के साथ मिलकर हाइब्रिड टेक्नोलॉजी फ़ॉर एन्हान्सिंग क्रॉप प्रॉडक्टिविटी नामक विषय पर तीन दिवसीय एक नैशनल सिम्पोज़ियम (संगोष्ठी) का आयोजन किया जा रहा है। यह संगोष्ठी राजधानी दिल्ली में पूसा कैंपस के एन.ए.एस.सी. कॉम्प्लैक्स में स्थित ए.पी. शिंदे सिम्पोज़ियम (संगोष्ठी) हॉल में 8 से 10 जनवरी - 2025 तक आयोजित की जा रही है। मुख्य अतिथि के रूप में माननीय प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी के प्रिंसिपल सैक्रेट्री, डॉ. पी.के. मिश्रा ने इस संगोष्ठी का शुभारंभ किया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के महानिदेशक, डॉ. हिमांशु पाठक के साथ प्रॉटेक्शन ऑफ़ प्लान्ट वैराइटीज़ एंड फ़ार्मर्...

महाकुंभ 2025 प्रयागराज में CM योगी ने सफाईकर्मियों के साथ खाना खाया:3 बड़े ऐलान किए PM मोदी बोले- कोई कमी रही हो तो माफ करना

उत्तर प्रदेश प्रयागराज ..... क्षेत्र में महाकुंभ 2025 प्रयागराज में CM योगी ने सफाईकर्मियों के साथ खाना खाया:3 बड़े ऐलान किए PM मोदी बोले- कोई कमी रही हो तो माफ करना🙏 महाकुंभ में सीएम योगी ने सफाईकर्मियों के साथ भोजन किया। महाकुंभ गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ है। 45 दिन तक चले महाकुंभ का कल (26 फरवरी) महाशिवरात्रि के दिन समापन हो चुका है। हालांकि, आज भी मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। लोग संगम स्नान के लिए पहुंचे। मेले में कुछ दुकानें भी लगी हैं। सीएम योगी, दोनों डिप्टी सीएम के साथ गुरुवार सुबह प्रयागराज पहुंचे। महाकुंभ के समापन पर योगी ने पहले अरैल घाट पर झाड़ू लगाई। गंगा नदी से कचरा निकाला। फिर गंगा पूजन भी किया। योगी ने सफाईकर्मियों के साथ जमीन पर बैठकर खाना खाया। दोनों डिप्टी ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य भी मौजूद रहे। योगी नेत्र कुंभ गए। शाम को पुलिसकर्मियों से मुलाकात की। उनके साथ खाना खाया। सीएम ने कहा- कल महाकुंभ की पूर्णाहुति हुई। आस्था का इतना बड़ा समागम दुनिया के अंदर कहीं नहीं हुआ।  योगी के तीन बड़े ऐलान स्वच्छता कर्मियों को 10 हजार बोनस मिलेगा। जिन स्वच्छता कर...