माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा निजी विद्यालयों में 25% आरटीई कोटे के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राज्यों को नियम बनाने का निर्देश दिया गया है।
माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा निजी विद्यालयों में 25% आरटीई कोटे के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राज्यों को नियम बनाने का निर्देश दिया गया है।
यह निर्देश विधि के क्षेत्र में कोई नवीन अवधारणा नहीं है, बल्कि पूर्व से स्थापित संवैधानिक और वैधानिक स्थिति की पुनः पुष्टि है।
उल्लेखनीय है कि लगभग एक वर्ष पूर्व, माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ द्वारा Writ-C No. 6035 of 2025 में यह स्पष्ट किया जा चुका है कि—
अनुच्छेद 21-A के अंतर्गत प्रदत्त शिक्षा का अधिकार एक enforceable right है
RTE Act, 2009 की धारा 12(1)(c) पढ़ी जाए धारा 2(n) के साथ
निजी विद्यालयों द्वारा प्रवेश देने के बाद बच्चे को पढ़ने से रोकना कानूनन अस्वीकार्य है
विद्यालय के प्रधानाचार्य को अवमानना की कार्यवाही तक के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराया जा सकता है
माननीय उच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि आरटीई के अंतर्गत चयनित बच्चे को तत्काल विद्यालय में पढ़ने दिया जाए, अन्यथा यह न्यायालय के आदेश की अवहेलना होगी।
माननीय सुप्रीम कोर्ट का आदेश वस्तुतः उसी विधिक सिद्धांत की राष्ट्रीय स्तर पर पुनः पुष्टि है, जिसे उच्च न्यायालय पहले ही स्थापित कर चुका है।
शिक्षा का अधिकार कोई अनुग्रह नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त बाध्यकारी अधिकार है।
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संपादक श्री दयाशंकर गुुुप्ता जी
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जय संविधान जय भीम जय संविधान का चौथा स्तंभ ने अपने दिल की कुछ प्रमुखताएं या बातें या भावनाएं रखा है अप सभी के बिच में सभी नागरिकों के समक्ष प्रस्तुत किया है और लिखने में कोई त्रुटि हुई है तो क्षमा करें लिखने गलती हुई हैं तो क्षमा करना श्री दयाशंकर गुप्ता जी की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद🙏
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