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विश्व पुस्तक मेला - 2026 में तेज प्रताप नारायण की पहली नाट्य कृति “यशोधरा” का भव्य विमोचन!

 *विश्व पुस्तक मेला - 2026 में तेज प्रताप नारायण की पहली नाट्य कृति “यशोधरा” का भव्य विमोचन!*


*श्रीनाथ दीक्षित, वरिष्ठ संवाददाता, दिल्ली।*


दिल्ली..... 

तेज प्रताप नारायण! यह वो नाम है, जो हिंदी भाषा के प्रचार और प्रसार में एक जाना-माना नाम है। वर्तमान में भारतीय रेलवे के रेलवे बोर्ड में बतौर एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर का पदभार संभाल रहे श्री तेज प्रताप नारायण की हिंदी भाषीय कृतियाँ हिंदी जगत में एक क्रांति लाने के रूप में देखी जाती हैं।


हाल ही में राजरानी दिल्ली के भारत मंडपम में संपन्न हुए “विश्व पुस्तक मेला - 2026” में साहित्य प्रेमियों के बीच लेखक तेज प्रताप नारायण की प्रथम नाट्य कृति - “यशोधरा” का भव्य विमोचन किया गया।


ए.आर. पब्लिशिंग हाउस द्वारा प्रकाशित इस नाटक ने अपनी पहली झलक से ही पाठकों और आलोचकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है।


तेज प्रताप की इस पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में साहित्य जगत के दिग्गजों ने शिरकत कर अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को गरिमामयी बनाया। मुख्य वक्ताओं के रूप में रण विजय, प्रो. सरोज कुमारी, डॉ. संतोष पटेल, डॉ. सुशील द्विवेदी, तेज प्रताप तेजस्वी कुमार, डॉ. रामाशंकर कुशवाहा और स्वर्ण लता पटेल ने पुस्तक के कथानक और शिल्प पर अपने विचार साझा किए।


इस अवसर पर डॉ. मीनाक्षी तेज, राजेश कुमार मांझी, राजेश कुमार, आत्मानंद, समीक्षा जैन, आदित्य, मयंक सचान और आर.एन. सिंह जैसे विद्वानों की उपस्थिति ने चर्चा को और अधिक समृद्ध किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन भारती प्रवीण द्वारा किया गया, जबकि डॉ. मीनाक्षी तेज ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन दिया।


*यशोधरा के व्यक्तित्व का नया आयाम!*

समारोह में मौजूद आलोचकों ने नाटक की गहन समीक्षा करते हुए इसे समकालीन साहित्य की एक उत्कृष्ट कृति बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि लेखक ने यशोधरा के चरित्र को एक नई ऊँचाई दी है। नाटक में उनके:


*•* धैर्य और करुणा का सजीव चित्रण।


*•* मौन और आंतरिक संघर्ष की सूक्ष्म अभिव्यक्ति।


*•* त्याग और आत्मसम्मान के बीच का संतुलन।


इन बारीक़ियों के कारण ही आलोचक इसे एक “सफल नाटक” की श्रेणी में रख रहे हैं।


अपनी पहली कृति के बारे में बताते हुए श्री तेज प्रताप नारायण बताते हैं - “यशोधरा” मात्र एक पात्र नहीं, बल्कि नारी शक्ति की पराकाष्ठा है। यह नाटक उनके अनछुए पहलुओं को समाज के सामने लाने का एक लघु प्रयास है।

दिल्ली.... 👇

*फ़ोटो सौजन्य: श्रीनाथ दीक्षित*


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                    🙏 पत्र के🙏




        संपादक श्री दयाशंकर गुुुप्ता जी




नोट........ 👉🙏




 दोस्तों उम्मीद करता हूं कि आप सभी, यह आर्टिकल को अंत तक पढ़े होंगे एवं यह आर्टिकल आपको बेहद पसंद आया होगा, हैं।और अगर लिखने में कोई त्रुटि हुई हो तो क्षमा करें इस के लिए हम आप क्षमा मांगते हैं और हमारे इस आर्टिकल को लाइक करें शेयर करें ? 🙏 जनहित लोकहित के लिए धन्यवाद 🙏


जय संविधान जय भीम जय संविधान का चौथा स्तंभ ने अपने दिल की कुछ प्रमुखताएं या बातें या भावनाएं रखा है अप सभी के बिच में सभी नागरिकों के समक्ष प्रस्तुत किया है और लिखने में कोई त्रुटि हुई है तो क्षमा करें लिखने गलती हुई हैं तो क्षमा करना श्री दयाशंकर गुप्ता जी की तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद🙏



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