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अगर पुलिस आपको कॉल या मैसेज करके पूछताछ के लिए बुलाए तो पहले लिखित में नोटिस जरूर मांगे BNSS की धारा 179 आपको यह अधिकार देती है बिना नोटिस आपको थाने जाना जरूरी नहीं है...

 अगर पुलिस आपको कॉल या मैसेज करके पूछताछ के लिए बुलाए तो पहले लिखित में नोटिस जरूर मांगे BNSS की धारा 179 आपको यह अधिकार देती है बिना नोटिस आपको थाने जाना जरूरी नहीं है...



नए कानून (BNSS) के अनुसार आपके अधिकार

1. पूछताछ के लिए नोटिस (Section 35(3) BNSS)

पुराने कानून की धारा 41A को अब BNSS की धारा 35(3) में बदल दिया गया है।

नियम: यदि किसी ऐसे अपराध का आरोप है जिसमें 7 साल से कम की सजा है, तो पुलिस आपको सीधे गिरफ्तार नहीं कर सकती। उन्हें आपको लिखित नोटिस देना होगा।

अनिवार्य शर्त: पुलिस को गिरफ्तारी करने से पहले अब अपने वरिष्ठ अधिकारी (कम से कम DSP स्तर) की लिखित अनुमति लेना आवश्यक है, यदि वे 7 साल से कम सजा वाले मामले में किसी बुजुर्ग (60+ साल) या बीमार व्यक्ति को गिरफ्तार करना चाहते हैं।

2. महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष सुरक्षा (Section 179 BNSS)

नए कानून ने उन लोगों की सूची बढ़ा दी है जिन्हें थाने नहीं बुलाया जा सकता। BNSS की धारा 179 के अनुसार, निम्नलिखित व्यक्तियों को पूछताछ के लिए थाने बुलाने के बजाय पुलिस को उनके घर जाना होगा:

महिलाएं: किसी भी उम्र की महिला को थाने नहीं बुलाया जा सकता।

बच्चे: 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे।

बुजुर्ग: 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति (पुराने कानून में यह सीमा 65 वर्ष थी)।

दिव्यांग: मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति।

3. गिरफ्तारी की सूचना देना अनिवार्य (Section 36 BNSS)

अब पुलिस के लिए यह अनिवार्य है कि वे प्रत्येक थाने और जिला मुख्यालय पर एक अधिकारी (Designated Officer) नियुक्त करें, जो गिरफ्तार व्यक्ति के परिवार को तुरंत सूचना देगा। इसके अलावा, थाने के बाहर एक बोर्ड पर गिरफ्तार व्यक्तियों के नाम और उनके खिलाफ आरोपों की जानकारी प्रदर्शित करनी होगी।

4. हथकड़ी का प्रयोग (Section 43(3) BNSS) - नया बदलाव

नए कानून में पुलिस को गंभीर अपराधों (जैसे बलात्कार, हत्या, आतंकवाद) के आरोपियों को गिरफ्तार करते समय हथकड़ी लगाने का अधिकार दिया गया है। लेकिन सामान्य मामलों या छोटे अपराधों में हथकड़ी का प्रयोग अभी भी प्रतिबंधित है।

🛡️ अगर पुलिस परेशान करे तो आपके पास क्या विकल्प हैं?

जीरो एफआईआर (Zero FIR): अब आप किसी भी थाने में शिकायत दर्ज करा सकते हैं, चाहे अपराध कहीं भी हुआ हो।

वीडियो रिकॉर्डिंग: नए कानून के अनुसार, तलाशी और जब्ती के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग (Audio-Video Means) अनिवार्य है। आप इसकी मांग कर सकते हैं।

मजिस्ट्रेट को शिकायत: यदि पुलिस प्रक्रिया का पालन नहीं कर रही है, तो आप BNSS की धारा 175 के तहत मजिस्ट्रेट से शिकायत कर सकते हैं।


पुराने कानून के अनुसार


आपके मुख्य कानूनी अधिकार (Your Key Legal Rights)

1. बिना वारंट गिरफ्तारी से संरक्षण (Protection from Arrest without Warrant)

CrPC की धारा 41: पुलिस आपको केवल तभी गिरफ्तार कर सकती है जब उनके पास कोई ठोस कारण (जैसे आपने कोई संज्ञेय अपराध किया है) हो।

41A नोटिस (Notice of Appearance): अगर किसी मामले में सात साल तक की सजा हो सकती है (जैसे छोटे-मोटे झगड़े, धमकी, आदि), तो पुलिस आपको सीधे गिरफ्तार नहीं कर सकती। उन्हें आपको पहले CrPC की धारा 41A के तहत एक नोटिस भेजना होगा, जिसमें थाने में हाजिर होने की तारीख और समय लिखा हो।

नोट: अगर आप इस नोटिस का पालन करते हैं, तो पुलिस को आपको गिरफ्तार नहीं करना चाहिए, जब तक कि उनके पास नए और मजबूत कारण न हों।

2. पूछताछ के लिए बुलाने का नियम (Rules for Calling for Interrogation)

थाने में बुलाने का कारण: पुलिस आपको केवल जांच (Investigation) या पूछताछ (Interrogation) के लिए ही बुला सकती है। उन्हें बताना होगा कि वे किस मामले या शिकायत के संबंध में आपको बुला रहे हैं।

महिलाओं के लिए विशेष नियम (Special Rule for Women):

CrPC की धारा 160 के तहत, किसी भी महिला को पूछताछ के लिए थाने में नहीं बुलाया जा सकता। पुलिस को उनके निवास स्थान (घर पर) या किसी अन्य सहमत स्थान पर जाकर ही पूछताछ करनी होगी, और यह एक महिला पुलिस अधिकारी या महिला कांस्टेबल की उपस्थिति में होना चाहिए।

समय सीमा: किसी भी व्यक्ति को सुबह 6 बजे से पहले और शाम 6 बजे के बाद पूछताछ के लिए थाने में नहीं बुलाया जा सकता।

3. वकील से मिलने का अधिकार (Right to Meet a Lawyer)

गिरफ्तारी के समय: अगर आपको गिरफ्तार किया जाता है, तो आपको अपने पसंद के वकील से मिलने और कानूनी सलाह लेने का अधिकार है (संविधान का अनुच्छेद 22)।

पूछताछ के समय: पूछताछ के दौरान आप अपने वकील को साथ रखने की मांग कर सकते हैं, हालांकि वकील को पूरी पूछताछ के दौरान आपके साथ बैठने की अनुमति नहीं दी जा सकती, लेकिन उन्हें निश्चित दूरी से देखने की अनुमति दी जानी चाहिए।

📝 अगर पुलिस आपको बिना कारण बुलाती है तो क्या करें? (What to Do if Police Call Without Cause?)

विनम्रता से कारण पूछें: पुलिस अधिकारी से विनम्रता से पूछें कि वे आपको किस मामले, शिकायत संख्या (FIR Number), या धारा के तहत बुला रहे हैं।

लिखित नोटिस मांगें: हमेशा CrPC की धारा 41A के तहत लिखित नोटिस की मांग करें। मौखिक बुलावा कानूनी रूप से कमजोर होता है।

वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करें: यदि आपको लगता है कि पुलिस अधिकारी उत्पीड़न कर रहे हैं, तो आप उनके वरिष्ठ अधिकारियों (DSP/ACP, SP, या कमिश्नर) से शिकायत कर सकते हैं।

कानूनी सहायता लें: तुरंत किसी वकील से संपर्क करें। वकील आपको सही सलाह देंगे कि क्या आपको थाने जाना चाहिए और वहां क्या कहना है।

हाई कोर्ट में याचिका (Habeas Corpus): अगर आपको गैरकानूनी रूप से हिरासत में लिया जाता है, तो आपका वकील हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) की याचिका दायर कर सकता है।

निष्कर्ष:

पुलिस आपको 'सिर्फ यूं ही' या 'बिना कारण' थाने नहीं बुला सकती। उन्हें हमेशा एक वैध कानूनी आधार और लिखित नोटिस देना होगा, खासकर अगर अपराध गंभीर नहीं है।

🙏👇👇👇👇👇👇👇👇👇 🙏 


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        संपादक श्री दयाशंकर गुुुप्ता जी


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