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जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में... जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया RTI आवेदन

 जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में... जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया RTI आवेदन


  सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) के तहत दायर आवेदन खारिज किया।

 इस आवेदन में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोपों के संबंध में इन-हाउस जांच समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) द्वारा राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को उक्त जांच रिपोर्ट अग्रेषित करते हुए लिखे गए पत्र की प्रति मांगी गई थी। 

सुप्रीम कोर्ट के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी ने अमृतपाल सिंह खालसा द्वारा 9 मई को प्रस्तुत आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया बनाम सुभाष चंद्र अग्रवाल में सुप्रीम कोर्ट के फैसले में उल्लिखित परीक्षणों के मद्देनजर जानकारी प्रदान नहीं की जा सकती।

 RTI Act की धारा 8(1)(ई) और 11(1) का भी संदर्भ दिया गया। Also Read - एससी कॉलेजियम ने की सुप्रीम कोर्ट जज के तौर पर इन नामों की सिफारिश अधिनियम की धारा 8(1)(ई) के अनुसार, किसी व्यक्ति के पास उसके प्रत्ययी संबंध में उपलब्ध जानकारी को तब तक प्रकटीकरण से छूट दी जाती है जब तक कि सक्षम प्राधिकारी इस बात से संतुष्ट न हो कि व्यापक जनहित में ऐसी जानकारी का प्रकटीकरण आवश्यक है। अधिनियम की धारा 11 के अनुसार, तीसरे पक्ष की जानकारी को प्रकटीकरण से छूट दी गई।

 सुप्रीम कोर्ट के एडिशनल रजिस्ट्रार और सीपीआईओ द्वारा 21 मई को दिए गए जवाब में कहा गया, "माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा सिविल अपील नंबर 10044-45/2010 (सीपीआईओ, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया बनाम सुभाष चंद्र अग्रवाल, (2020) 5 एससीसी 481) में पारित दिनांक 13.11.2019 के अपने फैसले में उल्लिखित परीक्षणों के मद्देनजर जानकारी प्रदान नहीं की जा सकती, जैसे कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता, आनुपातिकता परीक्षण, प्रत्ययी संबंध, निजता के अधिकार का हनन और गोपनीयता के कर्तव्य का उल्लंघन आदि।

 RTI Act, 2005 की धारा 8(1)(ई) और धारा 11(1) के प्रावधानों के संदर्भ में।" Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने BPSL के लिक्विडेशन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया ताकि JSW को रीव्यू पीटिशन दायर करने की अनुमति मिल सके 8 मई को तत्कालीन सीजेआई संजीव खन्ना ने आंतरिक जांच समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज दिया था।

 22 मार्च को सीजेआई ने जस्टिस शील नागू (पी एंड एच हाईकोर्ट के सीजे), जस्टिस जीएस संधावालिया (एचपी हाईकोर्ट के सीजे) और जस्टिस अनु शिवरामन (कर्नाटक हाईकोर्ट के जज) की समिति गठित की थी।

 यह समिति जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास के बाहरी हिस्से में आग बुझाने के अभियान के दौरान एक स्टोर रूम से अचानक नकदी का एक बड़ा भंडार मिलने की रिपोर्ट के बाद गठित की गई थी।

 उस समय जस्टिस वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट के मौजूदा जज थे। विवाद के बाद जस्टिस वर्मा को उनके पैतृक हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। सीजेआई के निर्देशानुसार जस्टिस वर्मा से न्यायिक कार्य वापस ले लिया गया।

 दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की प्रारंभिक रिपोर्ट और जस्टिस वर्मा के जवाब के साथ-साथ दिल्ली पुलिस द्वारा ली गई तस्वीरों और वीडियो को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड करके सार्वजनिक कर दिया गया, लेकिन अंतिम जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया ?    

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         संपादक श्री दयाशंकर गुुुप्ता जी


नोट........ 👉


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