होली रंगों का त्यौहार है, जो हँसी-खुशी, प्रेम और एकता का प्रतीक माना जाता है। यह मुख्य रूप से फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है (आमतौर पर मार्च में)। होली के पीछे कई पौराणिक कथाएँ और महत्वपूर्ण कारण हैं, जिनमें मुख्य रूप से ये शामिल हैं
होली रंगों का त्यौहार है, जो हँसी-खुशी, प्रेम और एकता का प्रतीक माना जाता है। यह मुख्य रूप से फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है (आमतौर पर मार्च में)। होली के पीछे कई पौराणिक कथाएँ और महत्वपूर्ण कारण हैं, जिनमें मुख्य रूप से ये शामिल हैं: 1. बुराई पर अच्छाई की जीत (सबसे प्रसिद्ध कथा) हिरण्यकश्यप नाम का एक अहंकारी राजा था, जो खुद को भगवान मानता था और लोगों से विष्णु भगवान की पूजा न करने की आज्ञा देता था। उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को वरदान था कि आग उसे नहीं जलेगी। होलिका ने प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठने की योजना बनाई, ताकि प्रह्लाद जल जाए। लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका जल गई। इसलिए होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है, जो बुराई के नाश और सत्य/भक्ति की विजय का प्रतीक है। 2. राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम का उत्सव ब्रज (मथुरा-वृंदावन) में होली की शुरुआत श्रीकृष्ण और राधा रानी की लीलाओं से जुड़ी मानी जाती है। कृष्ण ने राधा और गोपियों के साथ रंग खेलना शुरू किया था, क्योंकि राधा की गोरी रंगत पर कृष्ण मजाक उड़ाते...